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प्रौद्योगिकी का उपयोग और एकीकरण

प्रौद्योगिकी का उपयोग और एकीकरण

23.1 भारत, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी तथा अंतरिक्ष जैसे अन्य अत्याधुनिक क्षेत्रों में वैश्विक स्तर पर नेतृत्व कर रहा है। डिजिटल इंडिया अभियान पूरे देश को एक डिजिटल रूप से सशक्त समाज एवं ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था में परिवर्तित करने में मदद कर रहा है । इस रूपांतरण में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ प्रौद्योगिकी भी शैक्षिक प्रक्रिया एवं परिणामों के सुधार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इस प्रकार, सभी स्तरों पर प्रौद्योगिकी और शिक्षा के बीच द्विदिश संबंध है।

23.2 तकनीक को समझने एवं इस्तेमाल करने वाले शिक्षक व उद्यमियों , जिनमें छात्र उद्यमी भी शामिल हैं की वास्तविक रचनात्मकता के साथ-साथ प्रौद्योगिकी विकास की तीव्र दर को देखते हुए यह निश्चित है कि प्रौद्योगिकी, शिक्षा को कई मायनों में प्रभावित करेगी, जिनमें से वर्तमान में सिर्फ कुछ के बारे में अंदाजा लगाया जा सकता है। नए प्रौद्योगिकी क्षेत्र जैसे कि आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, ब्लॉक चेन, स्मार्ट बोर्ड, हस्त संचालित कंप्यूटिंग उपकरण, छात्रों के विकास के लिए एडेप्टिव कंप्यूटर टेस्टिंग, और अन्य प्रकार के सॉफ्टवेयर द्वारा न केवल यह परिवर्तन होगा कि छात्र क्या सीखता है वरन यह भी परिवर्तन होगा कि वो कैसे सीखता है। इस प्रकार इन क्षेत्रों में भविष्य में भी प्रौद्योगिकी एवं शैक्षिक दोनों दृष्टि से व्यापक शोध की आवश्यकता होगी ।

23.3 शिक्षा के विभिन्न आयामों को बेहतर बनाने के लिए प्रौद्योगिकी के सभी प्रकार के प्रयोग व एकीकरण को समर्थन दिया जाएगा एवं अंगीकृत किया जाएगा, बशर्ते कि वृहद्‌ स्तर पर लागू करने से पहले इनका प्रासंगिक सन्दर्भों में ठोस एवं पारदर्शी ढंग से आंकलन किया गया हो। विद्यालयी एवं उच्चतर शिक्षा दोनों क्षेत्र में शिक्षण, मूल्यांकन, नियोजन, प्रशासन आदि में सुधार हेतु प्रौद्योगिकी के उपयोग पर विचारों के मुक्त आदान-प्रदान को एक मंच प्रदान करने के लिए एक स्वायत्त निकाय के रूप में राष्ट्रीय शैक्षिक प्रौद्योगिकी मंच (एनईटीएफ) का निर्माण किया जाएगा । एनईटीएफ का उद्देश्य प्रौद्योगिकी को अपनाये जाने और किसी क्षेत्र विशेष में उसके उपयोग से संबच्धित निर्णयों को सुगम बनाना होगा | एनईटीएफ यह कार्य, शैक्षिक संस्थानों के प्रमुखों, केंद्रीय और राज्य सरकारों व अन्य हितधारकों को, नवीनतम ज्ञान व अनुसन्धान के साथ ही साथ सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों को एक-दूसरे से साझा करने और परामर्श के अवसर प्रदान करके करेगा। एनईटीएफ के निम्नलिखित कार्य होंगे :
  • प्रौद्योगिकी आधारित हस्तक्षेप में केंद्र एवं राज्य सरकार की एजेंसियों को स्वतंत्र एवं प्रमाण आधारित परामर्श उपलब्ध कराना;
  • शैक्षिक प्रौद्योगिकी में बौद्धिक एवं संस्थागत क्षमता का निर्माण;
  • इस क्षेत्र में रणनीतिक रूप से अत्यंत प्रभावी कार्यों की परिकल्पना करना; और
  • अनुसंधान एवं नवाचार के लिए नई दिशाओं को स्पष्ट करना ।
23.4 शैक्षिक प्रौद्योगिकी के तीव्रता से परिवर्तित हो रहे क्षेत्र में प्रासंगिक बने रहने के लिए एनईटीएफ विविध स्रोतों से, जिनमें शैक्षिक प्रौद्योगिकी के आविष्कार को और उस प्रोद्योगिकी को प्रयोग करने वाले लोग सम्मिलित हैं, से प्राप्त प्रमाणिक डेटा के नियमित प्रवाह को बनाए रखेगा और शोधकर्ताओं के विविध वर्ग के साथ मिलकर इस डेटा का विश्लेषण करेगा। ज्ञान एवं उसके प्रयोग तथा इस दिशा में सतत नए सृजन को बढ़ावा देने के लिए, एनईटीएफ अंतर्राष्ट्रीय शैक्षिक प्रौद्योगिकी शोधकर्ताओं, उद्यमियों और प्रौद्योगिकी को उपयोग में ला रहे व्यक्तियों के विचारों से लाभान्वित होने के लिए कई क्षेत्रीय और राष्ट्रीय सम्मेलनों, कार्यशालाओं आदि का आयोजन करेगा।

23.5 प्रौद्योगिकी हस्तक्षेपों का मुख्य उद्देश्य शिक्षण-अधिगम और आंकलन प्रक्रियाओं को बेहतर बनाना, शिक्षकों की तैयारी एवं व्यावसायिक विकास में सहयोग करना, शैक्षिक पहुँच को बढ़ाना, शैक्षिक नियोजन, प्रबंधन एवं प्रशासन को सरल एवं व्यवस्थित करना जिसमें प्रवेश, उपस्थिति, मूल्यांकन संबंधी प्रक्रियाएं आदि सम्मिलित हैं।

23.6 उपरोक्त सभी उद्देश्यों की प्राप्ति हेतु सभी स्तरों पर शिक्षकों और विद्यार्थियों के लिए बहुत से शैक्षिक सॉफ्टवेयर विकसित किए जाएंगे और उन्हें उपलब्ध करवाये जायेंगे | ऐसे सभी सॉफ्टवेयर सभी प्रमुख भारतीय भाषाओं में उपलब्ध होंगे और सुदूर क्षेत्रों में रहने वाले छात्रों, तथा दिव्यांग विद्यार्थियों समेत सभी प्रकार के उपयोगकर्ताओं के लिए उपलब्ध होंगे | सभी राज्यों तथा एनसीईआरटी, सीआईईटी, सीबीएसई, एनआईओएस एवं अन्य निकायों / संस्थानों द्वारा विभिन्न क्षेत्रीय भाषाओं में विकसित शिक्षण एवं अधिगम संबंधी ई-कंटेंट दीक्षा प्लेटफार्म पर अपलोड किया जाएगा। इस प्लेटफार्म पर उपलब्ध ई-कंटेंट का उपयोग शिक्षकों के व्यावसाय सम्बन्धी विकास के लिए किया जा सकता है। दीक्षा के साथ साथ अन्य शैक्षिक प्रौद्योगिकी संबंधी उपायों के संवर्धन एवं प्रसार हेतु सीआईईटी को मजबूत बनाया जाएगा। स्कूलों में शिक्षकों के लिए उपयुक्त उपकरण उपलब्ध कराये जायेंगे ताकि शिक्षक अपने शिक्षण-अधिगम अभ्यासों में ई-सामग्री को उपयुक्त रूप से शामिल कर सकें। प्रौद्योगिकी आधारित शिक्षा प्लेटफॉर्म, जैसे दीक्षा/ स्वयम, सम्पूर्ण स्कूली और उच्चतर शिक्षा में समन्वित किये जाएंगे, और इसमें उपयोगकर्ताओं द्वारा रेटिंग / समीक्षाएं शामिल होंगी, ताकि कंटेन्ट विकासकर्ता प्रयोक्ता अनुकूल और गुणवत्ता पूर्ण कंटेन्ट बना सकें।

23.7 संपूर्ण शिक्षा व्यवस्था को अनिवार्यत: रूप से रूपांतरित करने में तेज़ी से उभरती परिवर्तनशील प्रौद्योगिकी पर भी विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। जब 1986/1992 में राष्ट्रीय शिक्षा नीति बनायी गयी थी, तब इंटरनेट के वर्तमान क्रांतिकारी प्रभावों का अनुमान लगाना कठिन था। हमारी वर्तमान शिक्षा प्रणाली की इन तीव्र और युगांतरकारी परिवर्तनों का सामना करने की असमर्थता इस तेजी से प्रतिस्पर्धी होती दुनिया में हमें (व्यक्तिगत रूप से और एक राष्ट्र के रूप में) खतरनाक और हानिकारक स्थिति की ओर ले जा रही है। उदाहरण के लिए, आज जब कंप्यूटर ने तथ्यात्मक और प्रक्रियात्मक ज्ञान के मामले में मनुष्य को काफी पीछे छोड़ दिया है, तब भी हमारी शिक्षा व्यवस्था, उच्चतर स्तर की दक्षताओं के विकास के स्थान पर, अपने विद्यार्थियों पर शिक्षण के सभी स्तरों पर ऐसे ज्ञान का अत्यधिक बोझ डालती रहती है।

23.8 इस नीति को ऐसे समय में तैयार किया गया है जब कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफ़िश्यल इंटेलिजेंस) 3डी/7डी वर्चुअल रिएल्टी जैसी निश्चित परिवर्तनकारी प्रौद्योगिकी का विकास रहा है। जैसे-जैसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता-आधारित पूर्वानुमानों की लागत कम होती जाएगी, वैसे-वैसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता कुशल पेशेवरों की बराबरी करने लगेगी व उनसे भी आगे निकल जाएगी और डॉक्टर जैसे अन्य पेशेवरों के लिए, पूर्वानुमान लगाने के कामों में मूल्यवान सहायक सिद्ध होगी। एआई की परिवर्तन ला पाने की क्षमता स्पष्ट है जिस पर त्वरित प्रतिक्रिया के लिए शिक्षा व्यवस्था को तैयार रहना होगा। एनईटीएफ के स्थायी कार्यों में से एक, उभरती हुई प्रौद्योगिकियों को उनकी क्षमता व परिवर्तन लाने की अनुमानित समय सीमा के आधार पर वर्गीकृत करना और समय-समय पर इन विश्लेषणों को मानव संसाधन विकास मंत्रालय के समक्ष प्रस्तुत करना होगा। इन सूचनाओं के आधार पर मानव संसाधन विकास मंत्रालय औपचारिक रूप से ऐसी प्रौद्योगिकी को चिह्नित करेगा जिनके उद्धव के लिए शिक्षा प्रणाली से प्रतिक्रिया आवश्यक होगी।

23.9 मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा औपचारिक रूप से नवीन परिवर्तनकारी प्रौद्योगिकी को औपचारिक रूप से स्वीकार करने के प्रतिक्रियास्वरूप, राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन द्वारा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अनुसंधान का प्रारम्भ या विस्तार किया जाएगा। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के संदर्भ में, एनआरएफ त्रि-आयामी दृष्टिकोण अपना सकता है: 
  • कोर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अनुसंधान को आगे बढ़ाना,
  • एप्लिकेशन आधारित अनुसंधान का विकास और प्रयोग, तथा 
  • स्वास्थ्य, कृषि व जलवायु संकट जैसे वैश्विक संकटों की चुनौतियों का सामना करने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग करते हुए अंतर्राष्ट्रीय अनुसंधान के प्रयासों को प्रारंभ करना।

23.10 उच्चतर शिक्षण संस्थान न सिर्फ परिवर्तनकारी प्रौद्योगिकी पर अनुसंधान में सक्रिय भूमिका निभाएंगे बल्कि अत्याधुनिक क्षेत्रों में आरंभिक निर्देशात्मक सामग्री और पाठ्यक्रम (ऑनलाइन पाठ्यक्रमों सहित) भी तैयार करने के साथ ही साथ व्यावसायिक शिक्षा जैसे विशिष्ट क्षेत्रों में उनके प्रभाव का आकलन भी करेंगे। जब प्रौद्योगिकी एक स्तर की परिपक्षता प्राप्त कर लेगी, हजारों छात्रों के साथ उच्चतर शिक्षा संस्थान इस प्रकार के शिक्षण और कौशल निर्माण के कामों को बढ़ाने के लिए आदर्श स्थिति में होंगे, जिसमे रोजगारपरक तैयारी के लिए लक्षित प्रशिक्षण के प्रयास भी शामिल होंगे। परिवर्तनकारी प्रौद्योगिकी कुछ नौकरियों को निरर्थक बना देंगी, अतः रोजगार पैदा करने और उन्हें बनाए रखने के लिए स्किलिंग और डि-स्किलिंग के प्रति प्रभावी और गुणवत्तापूर्ण दृष्टिकोण महत्वपूर्ण होगा। संस्थानों को कौशल और उच्चतर शिक्षा के साथ एकीकृत किये जा सकने वाले प्रशिक्षण देने के लिए संस्थागत और गैर-संस्थागत भागीदारों को मंजूरी देने की स्वायत्तता होगी, जिसे कौशल और उच्चतर शिक्षण संबंधी रूपरेखाओं के साथ एकीकृत किया जाएगा।

23.11 विश्वविद्यालयों का उद्देश्य मशीन लर्निंग जैसे मूल क्षेत्रों/ कोर एरिया, बहु-विषयक क्षेत्रों “कृत्रिम बुद्धिमत्ता + X” और व्यावसायिक क्षेत्रों (जैसे स्वास्थ्य, कृषि, विधि) में पीएचडी और स्नातकोत्तर कार्यक्रम प्रदान करना होगा। ये स्वयम जैसे मंचों की सहायता से इन क्षेत्रों में आधिकारिक पाठ्यक्रमों को विकसित कर उनका प्रसार कर सकते हैं। शीघ्रता से अपनाने के लिए उच्चतर शिक्षा संस्थान आरंभ में इन ऑनलाइन पाठ्यक्रमों को पारंपरिक शिक्षण के स्नातक और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में सम्मिलित कर सकते हैं। उच्चतर शिक्षा संस्थान कृत्रिम बुद्धिमत्ता को सहायता प्रदान करने के लिए कम विशेषज्ञता की मांग वाले क्षेत्रों, जैसे डेटा एनोटेशन, इमेज क्लासिफिकेशन और स्पीच ट्रांसक्रिप्शन, में लक्षित प्रशिक्षण भी दे सकते हैं। स्कूली विद्यार्थियों को भाषा सिखाने के प्रयासों को भारत की विविध भाषाओं के लिए स्वाभाविक भाषा प्रोसेसिंग को बढ़ावा देने के प्रयासों के साथ जोड़ा जाएगा।

23.12 जैसे जैसे परिवर्तनकारी प्रौद्योगिकियाँ उभर रही हैं, स्कूली और अग्रिम शिक्षा इनके अत्यंत शक्तिशाली प्रभावों के बारे में आम जनता की जागरूकता बढ़ाने में सहायता करेगी और इसके साथ ही इससे संबंधित मुद्दों को भी हल करेगी। इन प्रौद्योगिकियों से संबंधित मुद्दों पर एक सुविचारित सार्वजनिक सहमति बनाने के लिए यह जागरूकता आवश्यक है। विद्यालय स्तर पर अध्ययन हेतु चर्या नैतिक व समसामयिक मुद्दों में एनईटीएफ़ /एमएचआरडी द्वारा चिह्नित अत्यंत प्रभावशाली प्रौद्योगिकियों पर चर्चा को भी शामिल किया जाएगा। सतत शिक्षा हेतु उचित निर्देशात्मक एवं विमर्शात्मक सामग्री भी तैयार की जाएगी।

23.13 कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित प्रौद्योगिकी के लिए डाटा एक महत्वपूर्ण ईंधन के समान है, और गोपनीयता के मुद्दों पर, डाटा-संधारण, डाटा-संरक्षण आदि से जुड़ी सुरक्षा, कानून और मानकों के प्रति जागरूकता बढ़ाना अति आवश्यक है। साथ ही कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित प्रौद्योगिकी के विकास और प्रयोग से जुड़े नैतिक मुद्दों को उठाना भी आवश्यक है। शिक्षा इन मुद्दों पर जागरूकता पैदा करने के प्रयासों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। अन्य परिवर्तनकारी प्रौद्योगिकी जैसे स्वच्छ और अक्षय ऊर्जा, जल संरक्षण, संवहनीय खेती, पर्यावरण संरक्षण और अन्य हरित उपाय आदि जो हमारे जीवन जीने तथा छात्रों को शिक्षा प्रदान करने के तरीके पर प्रभाव डालने की क्षमता रखते है इन पर भी शिक्षा के क्षेत्र में प्राथमिक रूप से ध्यान दिया जाएगा।

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