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प्रौढ़ शिक्षा और जीवनपर्यत सीखना

प्रौढ़ शिक्षा और जीवनपर्यत सीखना

21.1 बुनियादी साक्षरता प्राप्त करना, शिक्षा प्राप्त करना और जीविकोपार्जन का अवसर प्रत्येक नागरिक का मौलिक अधिकार है। साक्षरता और बुनियादी शिक्षा किसी व्यक्ति के वैयक्तिक, नागरिक, आर्थिक और जीवनपर्यत शिक्षा के अवसरों की एक नवीन दुनिया को खोल देती है जो व्यक्ति को निजी और पेशेवराना, दोनों ही स्तरों पर आगे बढ़ने में मदद करती है। समाज और देश के स्तर पर साक्षरता और बुनियादी शिक्षा एक ऐसी शक्ति के रूप में काम करती है जो विकास हेतु किये जा रहे अन्य सभी प्रयासों की सफलता को कई गुना बढ़ा देती है। वैश्विक स्तर पर विभिन्न देशों के आंकड़े यह दर्शाते हैं कि किसी देश की साक्षरता दर और उसकी प्रति व्यक्ति जीडीपी में उच्चतर सहसंबंध होता है।

21.2 साथ ही, एक समुदाय का गैर-साक्षर होने के कारण असंख्य नुकसान हैं, जिनमें बुनियादी वित्तीय लेनदेन न कर पाना; प्रभारित मूल्य पर खरीदे गए माल की गुणवत्ता /मात्रा की तुलना करना; नौकरियों, ऋण, सेवाओं, आदि के लिए आवेदन करने के लिए फ़ॉर्म भरना; समाचार मीडिया में सार्वजनिक परिपत्रों और लेखों को समझना; व्यापार को संप्रेषित और संचालित करने के लिए पारंपरिक और इलेक्ट्रॉनिक मेल का उपयोग करना; अपने जीवन और पेशे को बेहतर बनाने के लिए इंटरनेट और अन्य प्रौद्योगिकी का उपयोग करना; दवाइयों, सड़क आदि पर दिशाओं और सुरक्षा निर्देशों को समझना; बच्चों को उनकी शिक्षा में मदद करना; भारत के नागरिक के रूप में किसी के मूल अधिकारों और जिम्मेदारियों के बारे में पता होने; साहित्य के कार्यों की सराहना करने; और साक्षरता की आवश्यकता से जुड़े मध्यम या उच्चतर उत्पादकता वाले क्षेत्रों में रोजगार प्राप्त कर पाने में असमर्थता शामिल है। यहाँ सूचीबद्ध क्षमताएं उन परिणामों की सांकेतिक सूची है जिन्हें प्रौढ़ शिक्षा के लिए नवाचारी उपायों के रूप में अपनाकर प्राप्त किया जा सकता है।

21.3 भारत एवं विश्वभर में हुए व्यापक शोध अध्ययन और विश्लेषण स्पष्ट तौर पर दर्शाते हैं कि राजनीतिक इच्छाशक्ति, संगठनात्मक संरचना, उचित योजना, पर्याप्त वित्तीय सहायता और स्वैच्छिक कार्यकर्ताओं का उच्चतर गुणवत्तापूर्ण क्षमता संवर्धन के साथ-साथ स्वयंसेवा और सामुदायिक भागीदारी और एकजुट होना, प्रौढ़ साक्षरता कार्यक्रमों की सफलता के प्रमुख कारक हैं। स्वैच्छिक कार्यकर्ताओं पर आधारित साक्षरता कार्यक्रम के परिणामस्वरूप न सिर्फ समुदाय के वयस्कजनों की साक्षरता में वृद्धि होती है बल्कि इससे समुदाय में सभी बच्चों की शिक्षा हेतु मांग भी बढ़ती है. साथ ही सकारात्मक सामाजिक बदलाव और न्याय के लिए समुदाय की भागीदारी में भी बढ़ोतरी होती है। वर्ष 1988 में जब राष्ट्रीय साक्षरता मिशन की शुरुआत की गई तो यह मुख्यतः लोगों की स्वैच्छिक भागीदारी और सहयोग पर आधारित था, जिसके फलस्वरूप देश में 1991-2011 के दशक के दौरान महिलाओं के बीच साक्षारता सहित सम्पूर्ण साक्षरता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई और तत्कालीन सामाजिक मुद्दों पर चर्चा और विचार विमर्श भी शुरू हुआ।

21.4 प्रौढ़ शिक्षा के लिए सुदृढ़ एवं नवाचारी सरकारी पहलकदमियों, ख़ासकर समुदाय की भागीदारी को सुगम बनाना तथा प्रौद्योगिकी के सुचारू और लाभकारी एकीकरण को जल्द से जल्द लागू किया जाएगा ताकि 100% साक्षरता के सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य की प्राप्ति शीघ्र हो सके।

21.5 सबसे पहले एनसीईआरटी के एक नए और सु-समर्थित घटक संगठन द्वारा एक उत्कृष्ट प्रौड़ शिक्षण पाठ्यचर्या ढांचा विकसित किया जाएगा जो प्रोदा शिक्षा के लिए समर्थित हो ताकि साक्षरता, संख्यात्मकता बुनियादी शिक्षण, व्यावसायिक कौशल आदि के लिए उत्कृष्ट पाठ्यचर्या बनाने में एनसीईआरटी की मौजूदा विशेषज्ञता के प्रति अनुरूपता विकसित और उससे सामंजस्य रखते हुए प्रौढ़ शिक्षा की पाठ्यचर्या ढांचा तैयार होगा। इस पाठ्यचर्यात्मक ढाँचे में कम से कम निम्न पांच प्रकार के कार्यक्रम शामिल होंगे, जिनमें से प्रत्येक के परिणाम स्पष्ट रूप से परिभाषित किये जाएंगे :-
  • बुनियादी साक्षरता और संख्या ज्ञान 
  • महत्वपूर्ण जीवन कौशल (जैसे वित्तीय साक्षरता, डिजिटल साक्षरता, व्यावसायिक कौशल, स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता, शिशु पालन एवं शिक्षा और परिवार कल्याण), 
  • व्यावसायिक कौशल विकास (स्थानीय रोज़गार प्राप्ति के मद्देनज़र), 
  • बुनियादी शिक्षा (प्रारंभिक, माध्यमिक एवं उच्चतर माध्यमिक स्तर के समकक्ष) एवं 
  • सतत शिक्षा (जैसे कला, विज्ञान, तकनीकी, संस्कृति, खेल, मनोरंजन आदि के अलावा स्थानीय शिक्षार्थियों की रूचि अथवा लाभ की दृष्टि से अन्य विषयों, उदाहरण के लिए महत्वपूर्ण जीवन कौशलों पर अधिक उन्नत सामग्री, पर प्रौढ शिक्षा कोर्स)। 
ऐसा करते हुए यह ध्यान भी रखा जायेगा कि कई मामलों में वयस्कों को, बच्चों के साथ इस्तेमाल किये जाने वाले तरीकों और सामग्री की जगह, भिन्न प्रकार की शिक्षण-अधिगम पद्धतियों और सामग्री की आवश्यकता होगी।

21.6 उपयुक्त बुनियादी ढांचा सुनिश्चित किया जाएगा ताकि सभी इच्छुक प्रौढ़ो को प्रौढ़ शिक्षा और आजीवन अधिगम प्राप्त हो सके । इस दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल स्कूल के घंटों के बाद और सप्ताहांत पर स्कूल / स्कूल परिसरों का उपयोग, प्रौढ़ शिक्षा पाठ्यक्रमों के लिए सार्वजनिक पुस्तकालय स्थान, जो जहाँ तक संभव हो आईसीटी से सुसज्जित होंगे और अन्य सामुदायिक भागीदारी और संवर्धन गतिविधियों के लिए किया जाना होगा। स्कूल शिक्षा, उच्चतर शिक्षा, प्रौढ़ शिक्षा और व्यावसायिक शिक्षा के लिए और अन्य सामुदायिक और स्वयंसेवी गतिविधियों के लिए अवसंरचना का साझाकरण, भौतिक और मानव, दोनों संसाधनों के कुशल उपयोग को सुनिश्चित करने के साथ-साथ इन चार प्रकार की शिक्षा और उससे परे के बीच तालमेल बनाने के लिए महत्वपूर्ण होगा। इन कारणों से, उच्चतर शिक्षण संस्थानों, व्यावसायिक प्रशिक्षण केन्द्रों आदि जैसे , आदि अन्य सार्वजनिक संस्थानों के भीतर प्रौढ़ शिक्षा केन्द्रो को भी शामिल किया जा सकता है।

21.7 प्रौढ़ शिक्षा पाठ्यक्रम ढांचे में वर्णित सभी पांच प्रकार की प्रौढ़ शिक्षा के लिए परिपक्व शिक्षार्थियों को पाठ्यक्रम की रूपरेखा प्रदान करने के लिए प्रशिक्षकों / शिक्षकों / प्रेरकों की आवश्यकता होगी। मौजूदा प्रशिक्षकों को प्रौढ़ शिक्षा केंद्रों में शिक्षण गतिविधियों को व्यवस्थित करने और नेतृत्व करने के साथ-साथ स्वयंसेवक प्रशिक्षकों और ट्यूटर्स के साथ समन्वय करने के लिए राष्ट्रीय-, राज्य- और जिला-स्तरीय संसाधन सहायता संस्थानों द्वारा प्रशिक्षित किया जाएगा। समुदाय से योग्य सदस्यों, उच्चतर शिक्षा संस्थानों के समुदाय से जुड़ने के मिशन के अंतर्गत उच्चतर शिक्षा संस्थानों से भी, को प्रोत्साहित किया जाएगा कि वे लघु अवधि के प्रशिक्षण कोर्स करें और स्वैच्छिक कार्यकर्ता के बतौर या तो व्यापक स्तर पर प्रौढ़ साक्षरता प्रशिक्षक के रूप में या फिर निजी शिक्षक/ट्यूटर के रूप में काम करें। राष्ट्र के लिए की गयी इस महत्वपूर्ण सेवा के लिए उन्हें सम्मानित भी किया जायेगा। राज्य, साक्षरता और प्रौढ़ शिक्षा की दिशा में प्रयासों को प्रोत्साहित करने के लिए गैर-सरकारी संगठनों और अन्य सामुदायिक संगठनों के साथ भी काम करेंगे।

21.8 समुदाय के सदस्य प्रौढ़ शिक्षा कार्यक्रम में भाग लें, यह सुनिश्चित करने के सभी प्रयास किये जायेंगे। जो सामाजिक कार्यकर्ता समुदायों में जा कर गैर-नामांकित एवं स्कूल छोड़ देने वाले छात्रों का पता लगाते हैं और उनकी सहभागिता को सुनिश्चित करते हैं, उनसे भी ऐसे अभिभावकों, किशोरों और अन्य इच्छुक लोगों के आंकड़े इकट्ठे करने का अनुरोध किया जायेगा जो प्रौढ़ शिक्षा के अवसरों (शिक्षार्थी अथवा प्रशिक्षक /ट्यूटर के बतौर) में रूचि रखते हों; इसके उपरांत सामाजिक/ परामर्शदाता कार्यकर्ता इन लोगों की सूचना स्थानीय प्रौढ़ शिक्षा केन्द्रों को देंगे एवं उन्हें इससे जोड़ेंगे। विज्ञापनों और घोषणाओं और गैर-सरकारी संगठनों और अन्य स्थानीय संगठनों की गतिविधियों एवं विभिन्न पहलकदमियों के माध्यम से भी प्रौढ़ शिक्षा के अवसरों का व्यापक प्रचार किया जायेगा।

21.9 समुदाय एवं शिक्षण संस्थानों में पढ़ने की आदत विकसित करने के लिए पुस्तकों तक पहुँच और उपलब्धता बेहतर करना आवश्यक है। यह नीति अनुशंसा करती है कि सभी समुदाय एवं शिक्षण संस्थान - विद्यालय, महाविद्यालय और विश्वविद्यालय ऐसी पुस्तकों की समुचित आपूर्ति सुनिश्चित करेंगे जो कि सभी शिक्षार्थियों - जिसमें निशक्तजन एवं विशेष आवश्यकता वाले शिक्षार्थी भी शामिल हैं, की आवश्यकताओं और रुचियों को पूरा करते हों। केंद्र एवं राज्य सरकरें ये सुनिश्चित करेंगी कि पूरे देश में सभी की - जिसमें सामाजिक आर्थिक रूप से वंचित लोगों के साथ साथ ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले भी शामिल हैं, पुस्तकों तक पहुँच हो व पुस्तकों का मूल्य सभी के खरीद सकने की सामर्थ्य के अन्दर हो। सार्वजनिक एवं निजी दोनों प्रकार की एजेंसियां / संस्थान पुस्तकों की गुणवत्ता एवं आकर्षण बेहतर बनाने की रणनीति बनाने पर काम करेंगी। पुस्तकों की ऑनलाइन उपलब्धता बेहतर बनाने एवं डिजिटल पुस्तकालय को अधिक व्यापक बनाने हेतु कदम उठाये जायेंगे। समुदायों एवं शिक्षण संस्थानों में जीवंत पुस्तकालयों को बनाने एवं उनका सफल सच्जालन सुनिश्चित करने के लिए, यथोचित संख्या में पुस्तकालय स्टाफ की उपलब्धता हो एवं उनके व्यावसायिक विकास के लिए उचित करियर मार्ग बनाने एवं करियर प्रबंधन डिजाईन करने की आवश्यकता है। अन्य प्रयासों में शामिल होंगे - विद्यालयों के पुस्तकालयों को समृद्ध करना, वंचित क्षेत्रों में ग्रामीण पुस्तकालयों एवं पठन कक्षों की स्थापना करना, भारतीय भाषाओं में पठन सामग्री उपलब्ध कराना, बाल-पुस्तकालय एवं चल-पुस्तकालय खोलना, पूरे भारत में और विषयों पर सामाजिक पुस्तक क्लबों की स्थापना व शिक्षण संस्थानों और पुस्तकालयों में आपसी सहयोग बढ़ाना।

21.10 अंततः: उपरोक्त सभी पहलों को मजबूत करने के लिए प्रौद्योगिकी का लाभ उठाया जाएगा। सरकारी और परोपकारी पहलों के साथ-साथ क्राउडसोर्सिंग और प्रतियोगिताओं के माध्यम से प्रौढ़ शिक्षा के लिए गुणवत्तापूर्ण प्रौद्योगिकी-आधारित विकल्प, जैसे ऐप, ऑनलाइन कोर्स/मॉड्यूल, उपग्रह-आधारित टीवी चैनल, ऑनलाइन किताबें, और आईसीटी से सुसज्जित पुस्तकालय और प्रौढ़ शिक्षा केंद्र आदि विकसित किए जाएंगे। कई मामलों में, गुणवत्तापूर्ण प्रौढ़ शिक्षा का संचालन ऑनलाइन या मिश्रित मोड में किया जा सकता है।

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