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स्कूलों में पाठ्यक्रम और शिक्षण-शास्त्र : परिणाम आंकलन में परिवर्तन

विद्यार्थियों के विकास के लिए आकलन में आमूल-चूल परिवर्तन

शिक्षा नीति 2020 अध्याय 4 भाग 5

4.34 हमारी स्कूली शिक्षा प्रणाली की संस्कृति में आकलन के उद्देश्य को योगात्मक (जो मुख्य रूप से रटकर याद करने के कौशल को ही जांचता है) से हटाकर नियमित रचनात्मक आकलन की ओर ले जाना होगा (जो अधिक दक्षता-आधारित है), हमारे विद्यार्थियों में सीखने और उनके विकास को बढावा देता हैं, और उनकी उच्चतर-स्तरीय दक्षताओं जैसे कि विश्लेषण, तार्किक चिंतन और अवधारणात्मक स्पष्टता को जांचता है। आकलन का प्राथमिक उद्देश्य वास्तव में सीखने के लिए होगा - यह शिक्षक और विद्यार्थी और पूरी स्कूली शिक्षा प्रणाली में मदद करेगा, सभी विद्यार्थियों के लिए सीखने और विकास का अनुकूलन करने के लिए, शिक्षण और सीखने की प्रक्रियाओं को लगातार संशोधित करने में मदद करेगा। यह शिक्षा के सभी स्तरों पर मूल्यांकन के लिए अंतर्निहित सिद्धांत होगा।

4.35 प्रस्तावित राष्ट्रीय आकलन केंद्र, एनसीईआरटी और एससीईआरटी के मार्गदर्शन में राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों द्वारा सभी विद्यार्थियों के स्कूल आधारित आकलन के आधार पर तैयार होने वाले और अभिभावकों को दिए जाने वाले प्रगति कार्ड को पूरी तरह से नया स्वरुप दिया जायेगा। यह प्रगति कार्ड एक समग्र, 360-डिग्री, बहु-आयामी कार्ड होगा जिसमें प्रत्येक विद्यार्थी के संज्ञानात्मक, भावात्मक, साइकोमोटर डोमेन में विकास का बारीकी से किये गए विश्लेषण का विस्तृत विवरण, विद्यार्थी की विशिष्टताओं समेत दिया जायेगा।

इसमें स्व-मूल्यांकन, सहपाठी मूल्यांकन, प्रोजेक्ट कार्य और खोज-आधारित अध्ययन में प्रदर्शन, क्विज, रोल प्ले, समूह कार्य, पोर्टफोलियो आदि शिक्षक मूल्यांकन सहित शामिल होगा। यह समग्र प्रगति कार्ड घर और स्कूल के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी बनेगा और यह माता-पिता-शिक्षक बैठकों के साथ-साथ अपने बच्चों की समग्र शिक्षा और विकास में माता-पिता को सक्रिय रूप से शामिल करने के लिए होगा। इस प्रगति कार्ड के द्वारा शिक्षकों और माता-पिता को बच्चे के बारे में

महत्वपूर्ण जानकारी भी मिलेगी जिससे कक्षा में और कक्षा के बाहर विद्यार्थी को मदद उपलब्ध करायी जा सकेगी। छात्रों द्वारा एआई-आधारित सॉफ़्टवेयर का विकास और उपयोग माता-पिता, छात्रों और शिक्षकों के लिए सीखने के डेटा और इंटरैक्टिव प्रश्नावती के आधार पर उनके स्कूल के वर्षों के दौरान उनके विकास को ट्रैक करने में मदद करने के लिए किया जा सकता है ताकि छात्रों को उनके सामर्थ्य, रुचि के क्षेत्रों, फोकस के आवश्यक क्षेत्रों के बारे में बहुमूल्य जानकारी प्रदान की जा सके जिससे उन्हें इष्टतम कैरियर विकल्प बनाने में मदद मिल सके।

4.36 बोर्ड परीक्षा और प्रवेश परीक्षा सहित माध्यमिक स्कूल परीक्षाओं की वर्तमान प्रकृति और परिणामस्वरूप आज की कोचिंग संस्कृति - विशेष रूप से माध्यमिक विद्यालय स्तर पर बहुत नुकसान कर रही है। इनके चलते विद्यार्थी अपना कीमती समय सार्थक अधिगम की बजाए परीक्षाओं की तैयारी और अत्यधिक परीक्षा कोचिंग करने में खर्च कर रहे हैं। ये परीक्षाएं विद्यार्थियों को चुनाव के विकल्पों में एक लचीलापन- जो कि भविष्य की व्यक्ति-केद्धित शिक्षा प्रणाली में बहुत महत्वपूर्ण होगा - देने के बजाय उन्हें किसी ख़ास स्ट्रीम में बेहद संकुचित दायरे में ही तैयारी करने के लिए मजबूर करती हैं।

4.37 जबकि ग्रेड 10 और 12 के लिए बोर्ड परीक्षाएं जारी रहेंगी, कोचिंग कक्षाओं की आवश्यकता को समाप्त करने के लिए बोर्ड और प्रवेश परीक्षाओं की मौजूदा प्रणाली में सुधार किया जाएगा। वर्तमान मूल्यांकन प्रणाली के इन हानिकारक प्रभावों को उलटने के लिए, बोर्ड परीक्षाओं को समग्र विकास को प्रोत्साहित करने के लिए फिर से डिजाइन किया जाएगा; छात्र अपने व्यक्तिगत हितों के आधार पर उन विषयों में से कई विषय चुन सकते हैं जिनमें वे बोर्ड परीक्षा देते हैं।

बोर्ड परीक्षाओं को भी 'आसान' बनाया जाएगा, इस मायने में कि वे कोचिंग और रटने के बजाय मुख्य रूप से क्षमताओं/योग्यताओं का ही आकलन करेंगी। कोई भी छात्र जो स्कूल की कक्षा में जाता है और अपनी ओर से एक बुनियादी प्रयास करता है, वह आसानी से बिना किसी अतिरिक्त प्रयास के संबंधित विषय बोर्ड परीक्षा को पास कर सकेगा और अच्छा प्रदर्शन कर सकेगा। बोर्ड परीक्षाओं के 'उच्चतर जोखिम' पहलू को समाप्त करने के लिए सभी छात्रों को किसी भी स्कूल वर्ष के दौरान दो बार बोर्ड परीक्षा देने की अनुमति दी जाएगी, एक मुख्य परीक्षा और यदि वांछित हो तो एक सुधार के लिए।

4.38 अधिक लचीलेपन, विद्यार्थी के लिए चुनाव के विकल्प, और सर्वोत्तम-दो-प्रयास वाले आकलन जो मुख्य रूप से मुख्य क्षमताओं की ही जांच करते हैं- सभी बोर्ड परीक्षाओं के लिए तत्काल महत्वपूर्ण सुधार के रूप में देखे जाने चाहिए। इसी बीच बोर्ड अपनी बोर्ड परीक्षाओं के लिए अन्य समुचित मॉडल भी विकसित कर सकते हैं ताकि कोचिंग संस्कृति और परीक्षा दबावों को कम किया जा सके। ऐसी कुछ संभावनाओं में ये चीज़े शामिल हो सकती हैं: वार्षिक / सेमेस्टर / मॉड्यूलर बोर्ड परीक्षाओं की एक प्रणाली विकसित की जा सकती है - जिसमे काफी कम सामग्री से ही प्रत्येक टेस्ट लिया जाए, और स्कूल में संबंधित कोर्स के तुरंत बाद इसे लिया जाए ताकि माध्यमिक स्कूल स्तर में परीक्षा के दबाव बेहतर ढंग से वितरित हों, कम दबाव हो, और प्रत्येक परीक्षा पर बहुत कुछ दांव पर ना लगा हो, गणित से शुरू करके सभी विषय और संबंधित आकलन दो स्तरों पर उपलब्ध करवाए जा सकते हैं- एक कक्षा के स्तर पर और कुछ उच्चतर स्तर पर; और कुछ विषयों में बोर्ड परीक्षा को दो भागों में तैयार किया जा सकता है - एक भाग में बहुविकल्पीय प्रश्न होंगे और दूसरे में वर्णनात्मक प्रश्न होंगे।

4.39 उपरोक्त सभी के संबंध में एनसीई आरटी द्वारा सभी प्रमुख हितधारकों, जैसे एससीईआरटी, बोर्ड ऑफ़ असेसमेंट(बीओए), प्रस्तावित नया राष्ट्रीय आकलन केंद्र(एनएसीएसई) आदि और शिक्षकों के साथ परामर्श के जरिये दिशानिर्देश तैयार किए जाएंगे, ताकि 2022-23 शैक्षणिक सत्र तक एनसीएफ 2020-21 के समनुरूप आकलन प्रणाली को पूरी तरह बदला जा सके।

4.40 सभी विद्यालयी वर्षों के दौरान, न कि केवल ग्रेड 10 और 42 के अंत में प्रगति को ट्रैक करने के लिए छात्रों, अभिभावकों, शिक्षकों, प्रिंसिपलों के लाभ के लिए और स्कूलों और पूरी स्कूली शिक्षा प्रणाली में शिक्षण-अधिगम प्रक्रियाओं में सुधार करने के उद्देश्य से - सभी विद्यार्थियों को, एक उपयुक्त प्राधिकरण द्वारा संचालित ग्रेड 3, 5 और 8 में स्कूल की परीक्षा देनी होगी। ये परीक्षाएँ रटकर याद करने की बजाए प्रासंगिक उच्चतर-क्रम के कौशलों और वास्तविक जीवन स्थितियों में ज्ञान के अनुप्रयोग के साथ-साथ राष्ट्रीय और स्थानीय पाठ्यक्रम से मूल अवधारणाओं और ज्ञान के मूल्यांकन के माध्यम से बुनियादी शिक्षण परिणामों की उपलब्धि का परीक्षण करेंगी।

विशेष रूप से, ग्रेड 3 की परीक्षा बुनियादी साक्षरता, संख्या-ज्ञान और अन्य मूलभूत कौशलों का परीक्षण करेगी। स्कूल परीक्षाओं के परिणामों का उपयोग केवल स्कूल शिक्षा प्रणाली के विकासात्मक उद्देश्यों के लिए किया जाएगा- जिसमें स्कूलों द्वारा उनके समग्र छात्र परिणामों को (बिना विद्यार्थियों के नाम लिए) सार्वजनिक किया जाना, साथ ही स्कूली प्रणाली की सतत निगरानी और सुधार के लिए किया जाना शामिल है।

4.41 एमएचआरडी के तहत एक मानक-निर्धारक निकाय के रूप में एक राष्ट्रीय मूल्यांकन केंद्र, परख (समग्र विकास के लिए ज्ञान का प्रदर्शन मूल्यांकन, समीक्षा और विश्लेषण) स्थापित किये जाने का प्रस्ताव है जो भारत के सभी मान्यता प्राप्त स्कूल बोर्डों के लिए विद्यार्थी आकलन एवं मूल्यांकन के लिए मानदंड, मानक और दिशानिर्देश बनाने जैसे कुछ मूल उद्देश्यों को पूरा करेगा। साथ ही साथ यह, स्टेट अचीवमेंट सर्वे (एसएएस) का मार्गदर्शन और नेशनल अचीवमेंट सर्वे (एनएएस) का संचालन भी करेगा।

इसके अलावा देश में सीखने के परिणामों की निगरानी करना, इस नीति के घोषित उद्देश्यों के अनुरूप 2 वीं सदी की कौशल आवश्यकताओं को पूरा करने की दिशा में अपने मूल्यांकन पैटर्न को बदलने के लिए स्कूल बोर्डों की मदद करना भी इसका उद्देश्य होगा। यह केंद्र नए मूल्यांकन पैटर्न और नवीनतम शोधों के बारे में स्कूल बोर्डों को भी सलाह देगा, स्कूल बोर्डों के बीच सहयोग को बढ़ावा देगा। सभी स्कूल बोर्डों के बीच सर्वोत्तम प्रैक्टिस को साझा करने और शिक्षार्थियों के बीच शैक्षणिक मानकों की समानता सुनिश्चित करने के लिए सभी स्कूल बोर्डों के लिए एक उपकरण बनेगा।

4.42 विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा के लिए सिद्धांत समान होंगे; राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) उच्चतर गुणवत्ता वाली सामान्य योग्यता परीक्षा, साथ ही विज्ञान, मानविकी, भाषा, कला और व्यावसायिक विषयों में हर साल कम से कम दो बार विशिष्ट सामान्य विषय की परीक्षा लेने का काम करेगी। इन परीक्षाओं में अवधारणात्मक समझ और ज्ञान को लागू करने की क्षमता की जांच की जाएगी, और इन परीक्षाओं के लिए कोचिंग लेने की आवश्यकता को समाप्त करने पर जोर रहेगा। विद्यार्थी उन विषयों का चुनाव कर पाएंगे जिनमें वे परीक्षा देने में रूचि रखते हैं, और प्रत्येक विश्वविद्यालय प्रत्येक विद्यार्थी के व्यक्तिगत विषय पोर्टफोलियो को देख पाएगा और विद्यार्थियों की रूचि और प्रतिभाओं के मुताबिक उन्हें अपने कार्यक्रमों में प्रवेश दे पायेंगे।

राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (National Test Agency) उच्चतर शिक्षा संस्थानों में अंडरग्रेजुएट और ग्रेजुएट में दाखिले और फैलोशिप के लिए प्रवेश परीक्षा आयोजित करने के लिए एक प्रमुख, विशेषज्ञ, स्वायत्त टेस्टिंग संगठन के रूप में काम करेगा। एनटीए टेस्टिंग सेवाओं की उच्चतर गुणवत्ता, रेंज, और लचीलेपन से अधिकांश विश्वविद्यालय इन सामान्य प्रवेश परीक्षाओं का उपयोग करने में सक्षम होंगे- बजाय इसके कि सैंकड़ों विश्वविद्यालय अपनी-अपनी प्रवेश परीक्षाएं तैयार करें- इसके चलते विश्वविद्यालयों और कॉलेजों और संपूर्ण शिक्षा व्यवस्था पर बोझ को काफी कम किया जा सकेगा। यह निर्णय विश्वविद्यालयों और कॉलेजों पर छोड़ दिया जाएगा की क्या वे अपने प्रवेश के लिए एनटीए प्रवेश परीक्षाओं को अपनाएं या नहीं।

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