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नई पाठ्यक्रम संरचना शिक्षानीति 2020

शिक्षा नीति 2020 में लागू 5+3+3+4 की नई पाठ्यक्रम संरचना

शिक्षा नीति  2020 अध्याय 4

4.1 स्कूली शिक्षा के पाठ्यक्रम और शैक्षणिक ढांचे को पुनर्गठित किया जाएगा ताकि 3-8, 8-11, 11-14 और 14-18 की उम्र के विभिन्न पड़ावों पर विद्यार्थियों के विकास की अलग-अलग अवस्थाओं के मुताबिक उनकी रुचियों और विकास की ज़रूरतों पर समुचित ध्यान दिया जा सके। इसलिए स्कूली शिक्षा के लिए पाठ्यक्रम और शैक्षणिक ढांचे और पाठ्यक्रम रूपरेखा एक 5+3+3+4 डिजाइन से मार्गदर्शित होगी, जिसके तहत क्रमश: फाउंडेशनल स्टेज( दो भागों में अर्थात् आंगनवाड़ी/प्री-स्कूल के 3 साल+प्राथमिक स्कूल में कक्षा 1-2 में 2 साल, 3 से 8 वर्ष के बच्चों सहित), प्रिपरेटरी स्टेज (कक्षा 3-5, 8 से 11 वर्ष के बच्चों सहित), मिडिल स्कूल स्टेज (कक्षा 6-8, 11 से 14 वर्ष के बच्चों सहित), और सेकेंडरी स्टेज (कक्षा 9 से 12,दो फेज में, यानी पहले फेज में 9 और 10 और दूसरे में 11 और 12, 14 से 18 वर्ष के बच्चों सहित) शामिल होगी।

4.2 फाउंडेशनल स्टेज में पांच वर्षीय लचीली, बहु-स्तरीय खेल / गतिविधि आधारित अध्ययन और जैसा पहले जिक्र किया गया कि ईसीसीई के पाठ्यक्रम और शिक्षणशास्त्र शामिल होंगे। इसमें अच्छे व्यवहार, शिष्टाचार, नैतिकता, व्यक्तिगत और सार्वजनिक साफ़-सफाई,स्वच्छता, टीम वर्क और सहयोग इत्यादि पर भी ध्यान केंद्रित किया जाएगा। प्रीप्रेटरी स्टेज तीन वर्ष की होगी जो फाउंडेशनल स्टेज की खेल-खोज और गतिविधि आधारित शिक्षण-शास्त्रीय शैली से आगे बढ़ेगी और कुछ हल्के-फुल्के पाठ्यपुस्तक आधारित शिक्षण को भी शामिल किया जायेगा और इस प्रकार ज्यादा औपचारिक लेकिन संवादात्मक कक्षा शैली के जरिये अध्ययन-अध्यापन की ओर बढ़ेगी, जिसमे पढ़ने, लिखने, बोलने, शारीरिक शिक्षा, कला, भाषा, विज्ञान और गणित भी शामिल होंगे। 

मिडिल स्टेज में भी तीन वर्ष की शिक्षा होगी और इसमें विषय विशेषज्ञ शिक्षकों द्वारा विषय की अमूर्त अवधारणाओं पर काम शुरू होगा जिसके लिए विद्यार्थियों की पर्याप्त तैयारी हो चुकी होगी। यह कार्य विज्ञान, गणित, कला, खेल, सामाजिक विज्ञान, मानविकी और व्यावसायिक विषयों में होंगे। हर विषय में अनुभव आधारित शिक्षण और विषय-विशेषज्ञों के आ जाने के बावजूद विषयों के बीच परस्पर सम्बन्ध देखने को प्रोत्साहित किया जायेगा। हाई स्कूल (या सेकेंडरी) स्टेज में चार साल के बहु-विषयक अध्ययन शामिल होंगे, जो इस स्टेज के विषय-उन्मुख शिक्षाक्रमीय और शिक्षण-शास्त्रीय शैली पर आधारित होंगे, लेकिन अधिक गहराई, अधिक आलोचनात्मक सोच, जीवन आकांक्षाओं पर अधिक ध्यान और विद्यार्थियों द्वारा विषयों के चुनाव को लेकर अधिक लचीलेपन के साथ होंगे। विशेष रूप से, यदि किसी की इच्छा हो तो ग्रेड 10 के बाद व्यवसायिक या किसी विशेषज्ञताप्राप्त स्कूल में ग्रेड 11-12 में अन्य कोर्स के चुनाव के विकल्प लगातार विद्यार्थियों के लिए बने रहेंगे।

4.3 उपरोक्त चरण विशुद्ध रूप से पाठ्यक्रमणीय और शैक्षणिक हैं, जिन्हें कुछ इस तरह डिज़ाइन किया गया है ताकि बच्चों के संज्ञानात्मक विकास के अनुरूप विद्यार्थियों का सीखना हो सके; ये चरण राष्ट्रीय और राज्य शिक्षाक्रमों और सीखने-सिखाने की रणनीतियों के विकास को मार्गदर्शन देने में मदद करेंगे, लेकिन इनका प्रभाव भौतिक अवसंरचना पर नहीं पड़ेगा।

विद्यार्थियों का समग्र विकास

4.4 सभी स्तरों पर पाठ्यचर्या और शिक्षा विधि का समग्र केंद्रबिंदु शिक्षा प्रणाली को रटने की पुरानी प्रथा से अलग वास्तविक समझ और ज्ञान की ओर ले जाना है। शिक्षा का उद्देश्य केवल संज्ञानत्मक समझ न होकर चरित्र निर्माण और इक्कीसवी शताब्दी के मुख्य कौशल से सुसज्जित करना है। वास्तव में ज्ञान एक छुपा हुआ ख़ज़ाना है और शिक्षा व्यक्ति की प्रतिभा के साथ इसे प्राप्त करने में मदद करती है। पाठ्यचर्या और शिक्षाविधि को इन लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए पुनः तैयार किया जाएगा। पूर्व विद्यालय से उच्चतर शिक्षा तक प्रत्येक स्तर में एकीकरण के लिए विभिन्न क्षेत्रों में विशिष्ट कौशल और मूल्यों की पहचान की जाएगी। शिक्षण और अधिगम प्रक्रिया में इन कौशल और मूल्यों को आत्मसात किया जा रहा है यह सुनिश्चित करने के लिए पाठ्यचर्या ढाँचा और सम्पर्क तंत्र विकसित किया जाएगा। एनसीईआरटी इन अपेक्षित कौशल की पहचान करेगा और आरंभिक बाल्यावस्था एवं स्कूल शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या ढाँचे में उनके व्यवहार के लिए तंत्र शामिल करेगा।

अनिवार्य अधिगम और आलोचनात्मक चिंतन को बढ़ाने के लिए पाठ्यक्रम की विषय-वस्तु को कम करना

4.5 पाठ्यक्रम की विषय-वस्तु को प्रत्येक विषय में कम करके इसे बेहद बुनियादी चीज़ों पर केन्द्रित किया जाएगा ताकि आलोचनात्मक चिंतन और समग्र, खोज-आधारित, चर्चा-आधारित और विश्लेषण-आधारित अधिगम पर ज़रूरी ध्यान दिया जा सकें। यह विषय-वस्तु अब मुख्य अवधारणाओं, विचारों, अनुप्रयोगों और समस्या-समाधान पर केंद्रित होगी। शिक्षण और सीखना अधिक संवादात्मक तरीके से संचालित होगा; सवाल पूछने को प्रोत्साहित किया जाएगा, और कक्षाओं में नियमित रूप से अधिक रुचिकर, रचनात्मक, सहयोगात्मक और खोजपूर्ण गतिविधियाँ होगी ताकि गहन और प्रायोगिक सीख सुनिश्चित किया जा सकें।

प्रायोगिक अधिगम

4.6 सभी चरणों में, प्रायोगिक आधारित अधिगम को अपनाया जाएगा, जिसमें अन्य चीज़ों के अलावा स्वयं करके सीखना और प्रत्येक विषय में कला और खेल को एकीकृत किया जाएगा, और कहानी-आधारित शिक्षण-शास्त्र को प्रत्येक विषय में एक मानक शिक्षण-शास्त्र के तौर पर देखा जाएगा। साथ ही विभिन्न विषयों के बीच संबंधों की खोज को प्रोत्साहित किया जाएगा। वर्तमान अधिगम प्रतिमान (लर्निंग आउटकम) और वांछनीय अधिगम परिणामों के बीच खाई को पाटने के लिए कुछ विषयों में कक्षा-कक्षीय प्रक्रियाओं में परिवर्तन होंगे, जहाँ भी उचित होगा वहाँ इन्हें दक्षता-आधारित अधिगम और शिक्षा की ओर उन्मुख किया जाएगा। आकलन के उपकरणों (जिसमें सीखने "के रूप में", "का" "के लिए" आकलन शामिल है) को दिए गए वर्ग के हर विषय के अधिगम परिणामों, क्षमताओं और रुझानों के साथ भी सरेखित किया जाएगा।

4.7 कला-समन्वय (आर्ट-इंटीग्रेशन) एक क्रॉस-करिकुलर शैक्षणिक दृष्टिकोण है जिसमें विविध-विषयों की अवधारणाओं के अधिगम आधार के रूप में कला और संस्कृति के विभिन्न अवयवों का उपयोग किया जाता है। अनुभव आधारित अधिगम पर विशेष बल दिए जाने के अंतर्गत कला-समन्वित शिक्षण को कक्षा प्रक्रियाओं में स्थान दिया जायेगा जिससे न सिर्फ कक्षा ज्यादा आनंदपूर्ण बनेगी बल्कि भारतीय कला और संस्कृति के शिक्षण में समावेश से भारतीयता से भी बच्चों का परिचय हो पायेगा। इस एप्रोच से शिक्षा और संस्कृति के परस्पर संबंधों को भी मजबूती मिलेगी।

4.8 खेल-समन्वय एक और क्रॉस-करिकुलर शैक्षणिक दृष्टिकोण है जिसके तहत स्थानीय खेलों सहित विविध शारीरिक गतिविधियों का शिक्षण प्रक्रियाओं में उपयोग किया जाता है, ताकि परस्पर सहयोग, स्वत: पहल करना, स्वयं निर्देशित होकर कार्य करना, स्व-अनुशासन, टीम भावना, जिम्मेदारी, नागरिकता, आदि जैसे कौशल विकसित करने में सहायता हो सके। खेल समन्वय अधिगम कक्षा के दौरान होगा ताकि छात्रों को फिटनेस को एक आजीवन दृष्टिकोण के रूप में अपनाने और फिट इंडिया मूवमेंट में परिकल्पित किए गए अनुसार फिटनेस के स्तर के साथ-साथ संबंधित जीवन कौशल प्राप्त करने में मदद मिल सके। शिक्षा में खेलों के समन्वय की आवश्यकता को पहले ही पहचाना जा चुका है क्योंकि इससे बच्चों के शारीरिक और मनोवैज्ञानिक कल्याण के माध्यम से सर्वांगीण विकास होता है और संज्ञानात्मक क्षमताएँ भी बढ़ती हैं।

कोर्स चुनाव के विकल्पों में लचीलेपन के माध्यम से छात्रों को सशक्त बनाना

4.9 विद्यार्थियों को विशेष रूप से माध्यमिक विद्यालय में अध्ययन करने के लिए अधिक लचीलापन और विषयों के चुनाव के विकल्प दिए जाएंगे - इनमें शारीरिक शिक्षा, कला और शिल्प तथा व्यावसायिक विषय भी शामिल होंगे - ताकि विद्यार्थी अध्ययन और जीवन की योजना के अपने रास्ते तैयार करने के लिए स्वतंत्र हो सकें। साल दर साल समग्र विकास और विषयों और पाठ्यक्रमों के विस्तृत चुनाव विकल्पों का होना माध्यमिक विद्यालय शिक्षा की नई विशिष्ट विशेषता होगी। 'पाठ्यक्रम', 'अतिरिक्त-पाठ्यक्रम' या 'सह-पाठ्यक्रम', 'कला', 'मानविकी' और 'विज्ञान', अथवा 'व्यावसायिक' या 'अकादमिक' धारा जैसी कोई श्रेणियां नहीं होंगी। विज्ञान, मानविकी और गणित के अलावा भौतिक शिक्षा, कला और शिल्प, और व्यावसायिक कौशल जैसे विषयों को, यह विचार करते हुए कि उम्र के प्रत्येक पड़ाव पर विद्यार्थियों के लिए क्या रुचिपूर्ण और सुरक्षित है और क्या नहीं, स्कूल के पूरे पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा।

4.10 स्कूली शिक्षा के चार चरणों में से प्रत्येक, विभिन्न क्षेत्रों में जो संभव है उसके अनुसार, एक सेमेस्टर या अन्य प्रणाली की ओर बढ़ने पर विचार कर सकता है जो छोटे मॉड्यूल को शामिल करने की अनुमति देता है, या ऐसे कोर्स जिनमें वैकल्पिक दिनों पर शिक्षण होता है, ताकि अधिक विषयों का एक्सपोज़र मिले और अधिक लचीलेपन को सुनिश्चित किया जा सके। राज्यों को कला, विज्ञान, मानविकी, भाषा, खेल और व्यावसायिक विषयों सहित व्यापक श्रेणी के विषयों के अधिक से अधिक लचीलेपन और आनंद के इन उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए अभिनव तरीकों पर ध्यान देना चाहिए।

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