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उच्चतर शिक्षा संस्थानों के लिए प्रभावी प्रशासन और नेतृत्व

उच्चतर शिक्षा संस्थानों के लिए प्रभावी प्रशासन और नेतृत्व

19.1 यह प्रभावी प्रशासन और नेतृत्व ही है जो उच्चतर शिक्षा संस्थानों को उत्कृष्टता और नवाचार की संस्कृति के निर्माण में सक्षम बनाता है। भारत सहित दुनियाभर में सभी विश्वस्तरीय संस्थानों की सामान्य विशेषता वास्तव में मजबूत स्वशासन और संस्थागत लीडरों की उत्कृष्ट योग्यता आधारित नियुक्ति रही है, जिन्होंने ऐसी संस्कृति के निर्माण और पोषण को संभव बनाया।

19.2 ग्रेडेड प्रत्यायन और ग्रेडेड स्वायत्तता की एक उपयुक्त प्रणाली के माध्यम से, 15 वर्षों में एक चरणबद्ध तरीके से, भारत के सभी उच्चतर शिक्षण संस्थानों का उद्देश्य नवप्रवर्तन और उत्कृष्टता का अनुशीलन करने वाले स्वतंत्र स्वशासी संस्थान बनना होगा। उच्चतमगुणवत्ता का नेतृत्व सुनिश्चित करने और उत्कृष्टता की संस्थागत संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए सभी उच्चतर शिक्षण संस्थानों में उपाय किए जाएंगे। इस तरह के कदम के लिए तैयार संस्था को उपयुक्त ग्रेडेड प्रत्यायन प्राप्त होने पर योग्य, सक्षम और समर्पित व्यक्तियों जिनमें सिद्ध क्षमताएं और प्रतिबद्धता की एक मजबूत भावना होगी, के समूह से मिलकर बोर्ड ऑफ गवर्नर्स (बीओजी) स्थापित किया जाएगा। किसी संस्था के बीओजी को किसी भी बाहरी हस्तक्षेप से मुक्त संस्था को संचालित करने, संस्था के प्रमुख सहित सभी नियुक्तियां करने और शासन के संबंध में सभी निर्णय लेने का अधिकार होगा। ऐसे व्यापक विधान होंगे जो पहले के अन्य विधान के किसी भी उल्लंघनकारी प्रावधानों को बदल देंगे जिसमें बीओजी के गठन, नियुक्ति, कामकाज के नियमों, नियमों और विनियमों और बीओजी की भूमिका और जिम्मेदारियां शामिल हैं। बोर्ड के नए सदस्यों की पहचान बोर्ड द्वारा नियुक्त विशेषज्ञ समिति द्वारा की जाएगी; और नए सदस्यों का चयन बीओजी द्वारा ही किया जाएगा। सदस्यों का चयन करते समय इक्किटी के विचारों का भी ध्यान रखा जाएगा। यह परिकल्पना की गई है कि इस प्रक्रिया के दौरान सभी उच्चतर शिक्षण संस्थानों को प्रोत्साहन, समर्थन और सलाह दी जाएगी और इनका उद्देश्य वर्ष 2035 तक स्वायत्त बनना तथा ऐसे सशक्त बीओजी का गठन करना होगा।

19.3 बीओजी सभी संगत रिकॉर्ड के पारदर्शी स्व-प्रकटन के माध्यम से हितधारकों के लिए जिम्मेदार और जवाबदेह होगा। यह राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा नियामक परिषद (एनएचईआरसी) के माध्यम से एचईसीआई द्वारा अनिवार्य सभी नियामक दिशानिर्देशों को पूरा करने के लिए जिम्मेदार होगा।

19.4 संस्थानों में सभी नेतृत्वपदों और संस्थान प्रमुखों के लिए उच्चतर शैक्षणिक योग्यता वाले व्यक्तियों को चुना जाएगा जिन्होंने जटिल परिस्थितियों में प्रबंधन करने के साथ प्रशासनिक और नेतृत्व क्षमताओं का प्रदर्शन किया हो। किसी भी उच्चतर शिक्षण संस्थान के प्रमुख में संवैधानिक मूल्यों और संस्था की समग्र द्रष्टि के साथ-साथ एक मजबूत सामाजिक प्रतिबद्धता, टीमवर्क में विश्वास, विविधता, विभिन्न लोगों के साथ काम करने की क्षमता, एक सकारात्मक दृष्टिकोण होना चाहिए । बीओजी द्वारा गठित एक कुशल विशेषज्ञ समिति (ईईसी) के नेतृत्व में एक कठोर, निष्पक्ष, योग्यता आधारित और क्षमता आधारित प्रक्रिया के माध्यम से चयन बीओजी द्वारा किया जाएगा। एक उपयुक्त संस्कृति के विकास को सुनिश्चित करने के लिए कार्यकाल की स्थिरता महत्वपूर्ण है, साथ ही साथ नेतृत्व के उत्तराधिकार की योजना बनाई जाएगी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि किसी संस्था की प्रक्रियाओं को परिभाषित करने वाले अच्छे व्यवहार नेतृत्व में बदलाव के कारण समाप्त न हों; नेतृत्व में परिवर्तन पर्याप्त ओवर लैप के साथ किये जाएंगे, और सुचारू बदलाव सुनिश्चित करने के लिए पद खाली नहीं रहेंगे। उत्कृष्ट नेतृत्वकर्ताओं की पहचान की जाएगी और उन्हें जल्दी तैयार किया जाएगा, जो नेतृत्व की भूमिका में एक सीढ़ी-दर-सीढ़ी आगे बढ़ेंगे।

19.5 चरणबद्ध तरीके से पर्याप्त धन, वैधानिक सशक्तिकरण और स्वायत्तता प्रदान किए जाने के साथ, सभी उच्चतर शिक्षण संस्थान, संस्थागत उत्कृष्टता, अपने स्थानीय समुदायों के साथ जुड़ाव और वित्तीय इमानदारी और जवाबदेही के उच्चतममानकों के प्रति प्रतिबद्धता प्रदर्शित करेंगे । प्रत्येक संस्थान एक कार्यनीतिक संस्थागत विकास योजना बनाएगा जिसके आधार पर संस्थान अपनी पहलों को विकसित करेंगे, अपनी प्रगति का आकलन करेंगे और उसमें निर्धारित लक्ष्यों तक पहुंचेंगे, जो आगे की सार्वजनिक निधियन के लिए आधार बन सकते हैं।आईडीपी, बोर्ड के सदस्यों, संस्थागत लीडरों, संकाय, छात्रों और कर्मचारियों की संयुक्त भागीदारी के साथ तैयार किया जाएगा।

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