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उच्चतर शिक्षा में समता और समावेश

उच्चतर शिक्षा में समता और समावेश

14.1 उच्चतर शिक्षा के अनुभवजन्य क्षेत्रों में प्रवेश ऐसी अपार संभावनाओं के द्वार खोल सकता है जो व्यक्तियों और साथ ही साथ समुदायों को भी प्रतिकूल परिस्थितियों के कुचक्र से निकाल सकता है। इसी कारण सभी के लिए उच्चतर गुणवत्ता युक्त शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में होना चाहिए। यह नीति एसईडीजी पर विशेष जोर देते हुए सभी छात्रों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की समान पहुँच सुनिश्चित करती है।

14.2 डायनेमिक्स और शिक्षा प्रणाली से एसईडीजी के बाहर हो जाने से जुड़े बहुत सारे कारण भी विद्यालयी शिक्षा प्रणाली और उच्चतर शिक्षा प्रणाली में समान हैं। इसलिए, विद्यालयी शिक्षा और उच्चतर शिक्षा के क्षेत्र में समता, समानता और समावेश से जुड़ा दृष्टिकोण एक समान होना चाहिए, और इसके साथ ही साथ स्थायी सुधार सुनिश्चित करने के लिए इससे जुड़े सभी चरणों में निरंतरता होनी चाहिए। अतः उच्चतर शिक्षा में समता, समानता और समावेशन के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए आवश्यक नीतिगत पहलों को स्कूली शिक्षा के लिए भी देखा जाना चाहिए।

14.3 इन समूहों के बाहर हो जाने से जुड़े कई पहलू हैं जो स्वयं में कारण और प्रभाव दोनों हैं और उच्चतर शिक्षा से विशेष रूप से जुड़े हुए हैं या फिर उच्चतर शिक्षा के क्षेत्र में इनकी जड़ें बहुत गहरी हैं। इन्हें उच्चतर शिक्षा में विशेष रूप से दूर किया जाना चाहिए, और इसके अंतर्गत उच्चतर शिक्षा के अवसरों की जानकारी का अभाव, उच्चतर शिक्षा ग्रहण करने के दौरान के समय में शामिल आर्थिक अवसरों की हानि, आर्थिक बाधाएँ, प्रवेश प्रक्रियाएँ, भौगोलिक बाधाएँ, भाषायी अवरोध, बहुत अधिक उच्चतर शिक्षा कार्यकर्मों की सीमित रोजगार क्षमता और विद्यार्थियों के लिए उपयुक्त सहायता तंत्र की कमी से जुड़ी चुनौतियों को शामिल किया जाना चाहिए।

14.4 इस प्रयोजनार्थ, सभी सरकारों और उच्चतर शिक्षण संस्थानों द्वारा उच्चतर शिक्षा विशिष्ट अपनाए जाने वाले कुछ अतिरिक्त कदम इस प्रकार हैं:

सरकार द्वारा उठाए जाने वाले कदम :

  • एसईडीजी की शिक्षा के लिए समुचित सरकारी निधि का निर्धारण;
  • उच्चतर जीईआर तथा एसईडीजी के लिए स्पष्ट लक्ष्यों का निर्धारण;
  • उच्चतर शिक्षण संस्थानों की प्रवेश प्रक्रिया में जेंडर-संतुलन को बढ़ावा देना;
  • विकास की ओर उन्मुख जिलों में उच्चतर गुणवत्तायुक्त उच्चतर शिक्षण संस्थान बनाकर और बड़ी संख्या में एसईडीजी लिए हुए विशेष शिक्षा क्षेत्र बनाकर पहुँच को सुधारना;
  • उच्चतर गुणवत्ता युक्त ऐसे उच्चतर शिक्षण संस्थानों का निर्माण और विकास करना जो स्थानीय /भारतीय भाषाओं में या द्विभाषी रूप से शिक्षण कराएं;
  • सार्वजनिक और निजी दोनों ही तरह के उच्चतर शिक्षण संस्थानों में एसईडीजी को अधिक वित्तीय सहायता और छात्रवृत्ति प्रदान करना;
  • एसईडीजी के बीच उच्चतर शिक्षा के अवसरों और छात्रवृत्ति से जुड़ी जागरूकता के लिए प्रचार प्रसार करना;
  • बेहतर भागीदारी और सीखने के परिणामों के लिए प्रौद्योगिकी का निर्माण और विकास।

सभी उच्चतर शिक्षण संस्थानों द्वारा उठाए जाने वाले कदम:

  • उच्चतर शिक्षा प्राप्त करने से जुड़ी लागत और इस दौरान हुई आर्थिक अवसरों की हानि को कम करना 
  • सामाजिक आर्थिक रूप से वंचित छात्रों को अधिक वित्तीय सहायता और छात्रवृति प्रदान करना  
  • उच्चतर शिक्षा के अवसरों और छात्रवृत्ति से जुड़ी जागरूकता के लिए प्रचार-प्रसार करना
  • प्रवेश प्रक्रियाओं को अधिक समावेशी बनाना;
  • पाठ्यक्रम को अधिक समावेशी बनाना;
  • उच्चतर शिक्षा कार्यक्रमों को अधिक रोजगारपरक बनाना;
  • भारतीय भाषाओं और द्विभाषी रूप से पढ़ाए जाने वाले अधिक डिग्री पाठ्यक्रम विकसित करना;
  • यह सुनिश्चित करना कि सभी संबंधित इमारतें और अन्य बुनियादी सुविधाएं व्हीलचेयर सुलभ और दिव्यांगजनों के अनुकूल हों;
  • वंचित शैक्षिक पृष्ठभूमि से आने वाले विद्यार्थियों के लिए ब्रिज-कोर्स निर्मित करना;
  • ऐसे सभी विद्यार्थियों को उपयुक्त सलाह और परामर्श कार्यक्रमों के जरिए सामाजिक, भावनात्मक और अकादमिक सहायता तथा सलाह प्रदान करना;
  • पाठ्यक्रम सहित उच्चतर शिक्षण संस्थानों के सभी पहलुओं द्वारा संकाय सदस्यों, परामर्शदाताओं और विद्यार्थियों को जेंडर और जेंडर-पहचान के प्रति संवेदनशील और समावेशित करना;
  • भेदभाव और उत्पीड़न के खिलाफ बने सभी नियमों को सख्ती से लागू करना;
  • एसईडीजी से बढ़ती भागीदारी को सुनिश्चित करने से जुड़े विशिष्ट योजनाओं को शामिल करते संस्थागत विकास योजनाओं का निर्माण करना, जिनमें उपरोक्त बिन्दु शामिल हों लेकिन इन्हीं तक सीमित न हो।

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