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समतामूलक और समावेशी शिक्षा : भाग 2

समतामूलक और समावेशी शिक्षा: सभी के लिए अधिगम

6.10 ईसीसीई में दिव्यांग बच्चों को शामिल करना और उनकी समान भागीदारी सुनिश्चित करना भी इस नीति की सर्वोच्च प्राथमिकता होगी । दिव्यांग बच्चों को प्रारम्भिक स्तर से उच्चतर स्तर तक की शिक्षण प्रक्रियाओं में सम्मिलित होने के लिए सक्षम बनाया जाएगा।
दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 (आरपीडबल्यूडी अधिनियम समावेशी शिक्षा को एक ऐसी व्यवस्था के रूप में परिभाषित करता है जहाँ सामान्य व दिव्यांग, सभी बच्चे एक साथ सीखते हैं तथा शिक्षण व सीखने की प्रणाली को इस प्रकार अनुकूलित किया जाता है कि वह प्रत्येक बच्चे की सभी सामान्य अथवा विशेष आवश्यकताओं की पूर्ति में सक्षम हो । यह नीति आरपीडबल्यूडी अधिनियम 2016 के सभी प्रावधानों के साथ पूरी तरह से सुसंगत है तथा स्कूली शिक्षा के संबंध में इसके द्वारा प्रस्तावित सभी सिफारिशों को पूरा करती है । राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा तैयार करते समय एनसीईआरटी द्वारा दिव्यांगजन विभाग के राष्ट्रीय संस्थानों जैसे विशेषज्ञ संस्थानों के साथ परामर्श सुनिश्चित किया जाएगा। 

6.11 इसके लिए, दिव्यांग बच्चों के एकीकरण को ध्यान में रखते हुए विद्यालय व विद्यालय परिसरों की वित्तीय मदद की दृष्टि से सुस्पष्ट व कुशल प्रावधानों की व्यवस्था की जायेगी । इसके साथ यह भी ध्यान दिया जाएगा कि विद्यालय व विद्यालय परिसरों में दिव्यांग बच्चों की आवश्यकता से संबंधित प्रशिक्षण प्राप्त शिक्षकों की नियुक्ति की जाए | साथ ही, गंभीर अथवा एक से अधिक विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए गाँव / ब्लाक स्तर, जहाँ भी आवश्यकता हो पर एक संसाधन केंद्र स्थापित किया जाएगा । आरपीडबल्यूडी अधिनियम के अनुरूप विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की भौतिक पहुँच बाधा-मुक्त संरचनाओं (भवन इत्यादि) के माध्यम से सुनिश्चित की जाएगी | विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की विभिन्न श्रेणियों के अनुरूप विद्यालय अथवा विद्यालय परिसर कार्य करेंगें जिससे प्रत्येक बच्चे की आवश्यकता के अनुरूप मदद सुनिश्चित करने हेतु उपयुक्त प्रणाली विकसित की जायेगी ताकि कक्षा कक्ष में उनकी पूर्ण प्रतिभागिता व समावेशन सुनिश्चित किया जाए । कक्षा में शिक्षकों व अन्य सहपाठियों के साथ आसानी से जुड़ने के लिए विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को कुछ सहायक उपकरण, उपयुक्त तकनीक आधारित उपकरण, भाषा उपयुक्त शिक्षण सामग्री (जैसे - बड़े प्रिंट और ब्रेल प्रारूपों में सुलभ पाठ्य पुस्तकें) पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध करवाएं जायेंगे | यह कला, खेल और व्यावसायिक शिक्षा सहित सभी स्कूली गतिविधियों
पर भी लागू होगा | एनआईओएस भारतीय संकेत भाषा सिखाने के लिए और भारतीय संकेत भाषा का उपयोग करके अन्य बुनियादी विषयों को सिखाने के लिए उच्चतर-गुणवत्ता वाले मॉड्यूल विकसित करेगा । साथ ही दिव्यांग बच्चों की सुरक्षा पर पर्याप्त ध्यान दिया जाएगा ।

6.12 आरपीडबल्यूडी अधिनियम 2016 के अनुसार, मूल दिवयांगता वाले बच्चों के पास नियमित या विशेष स्कूली शिक्षा का विकल्प होगा । विशेष शिक्षकों के माध्यम से स्थापित संसाधन केंद्र, गंभीर अथवा एक से अधिक विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के पुर्नवास व शिक्षा से संबंधित आवश्यकताओं में मदद करेंगे एवं साथ ही उच्चतर गुणवत्ता की शिक्षा घर में ही उपलब्ध कराने (होम स्कूलिंग) व कौशल विकसित करने की दिशा में उनके माता-पिता / अभिवावकों को भी मदद करेंगे । स्कूलों में जाने में असमर्थ गंभीर और गहन दिव्यांग्ता वाले बच्चों के लिए गृह-आधारित शिक्षा के रूप में एक विकल्प उपलब्ध रहेगा । गृह-आधारित शिक्षा के तहत शिक्षा ले रहे बच्चों को अन्य सामान्य प्रणाली में शिक्षा ले रहे किसी भी अन्य बच्चे के समतुल्य माना जायेगा । गृह- आधारित शिक्षा की दक्षता व प्रभावशीलता की जांच हेतु समता व अवसर की समानता के सिद्धांत पर आधारित ऑडिट कराया जाएगा। आरपीडबल्यूडी अधिनियम 2016 के अनुरूप इस ऑडिट के आधार पर गृह-आधारित स्कूली शिक्षा के लिए दिशानिर्देश और मानक विकसित किए जाएंगे । हालांकि यह स्पष्ट है कि दिव्यांग बच्चों की शिक्षा राज्य की जिम्मेदारी है इसके लिए माता -पिता / देखरेख करने वालों के उन्मुखीकरण से लेकर बड़े स्तर पर प्राथमिकता के साथ अधिगम सामग्री के व्यापक प्रचार-प्रसार के प्रौद्योगिकी आधारित समाधान किये जायेंगे, जिनके माध्यम से माता - पिता / देखरेख करने वाले अपने बच्चे की आवश्यकता के अनुरूप मदद कर पायें।

6.13 अधिकांश कक्षाओं में ऐसे बच्चे होते हैं जिनमें सीखने की दृष्टि से कुछ विशिष्ट अक्षमता होती है जिन्हें निरंतर मदद की आवश्यकता होती है । शोध स्पष्ट करते हैं कि ऐसे मामलों में जितनी जल्दी मदद शुरू की जाती है आगे प्रगति की सम्भावना उतनी ही बेहतर नजर आती है । शिक्षकों को सीखने से संबंधित इस प्रकार की अक्षमताओं की पहचान करने और उनके निवारण के लिए योजना बनाने में विशेष रूप से मदद मिलनी चाहिए । इसके लिए किये जाने वाले विशिष्ट कार्यों जिनमें उपयुक्त तकनीकी की मदद से किये जाने वाले प्रयास सहित शामिल होंगे - बच्चों को अपनी गति के अनुरूप काम करने की स्वतंत्रता देना, प्रत्येक बच्चे की क्षमताओं का लाभ लेने की दृष्टि से पाठ्यक्रम को प्रत्येक के लिए सक्षम व लचीला बनाना तथा साथ ही उपयुक्त आकलन और प्रमाणन के लिए एक अनुकूल इकोसिस्टम बनाना। परख नामक प्रस्तावित नए 👉 राष्ट्रीय मूल्यांकन केंद्र सहित मूल्यांकन और प्रमाणन एजेंसियां दिशानिर्देश बनाएंगी और बुनियादी स्तर से लेकर उच्चतर शिक्षा (प्रवेश परीक्षाओं सहित) के स्तर तक इस तरह के मूल्यांकन के संचालन के लिए उपयुक्त तरीकों की सिफारिश करेगी, जिससे सीखने की अक्षमता वाले सभी छात्रों के लिए समान पहुँच और अवसरों सुनिश्चित किए जा सकें।

6.14 विशिष्ट दिव्यांगता वाले बच्चों (सीखने से सम्बंधित अक्षमताओं के साथ ) को कैसे पढाया जाए, इससे संबंधित जागरूकता और ज्ञान को सभी शिक्षक प्रशिक्षणों का अनिवार्य हिस्सा होना चाहिए। साथ ही लैंगिक संवेदनशीलता व अल्प प्रतिनिधित्व वाले समूहों के प्रति संवेदनशीलता विकसित की जानी चाहिए जिससे उनकी प्रतिभागिता की स्थिति को बेहतर किया जा सके |

6.15 स्कूलों के वैकल्पिक रूपों को अपनी परंपराओं और वैकल्पिक शिक्षण-शास्त्रीय अभ्यासों को संरक्षित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके साथ-साथ उन्हें अपने विषयों, शिक्षण क्षेत्रों व पाठ्यक्रम को राष्ट्रीय पाठ्यचर्या के अनुरूप एकीकृत करने में सहायता प्रदान की जायेगी ताकि उच्चतर शिक्षा के क्षेत्रों में उनके विद्यार्थियों की कम प्रतिभागिता को धीरे-धीरे बढ़ाया जा सके । ऐसे विद्यालयों को विज्ञान, गणित, सामाजिक अध्ययन, हिंदी, अंग्रेजी, राज्य भाषाओं अथवा अन्य प्रासंगिक विषयों को अपने पाठ्यक्रम में शामिल करने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी, जैसा कि शायद इन स्कूलों द्वारा वांछित हो सकता है । यह पारंपरिक सांस्कृतिक या धार्मिक स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को ग्रेड 1-12 के लिए परिभाषित किये गए अधिगम परिणामों को प्राप्त करने में सक्षम करेगा | इसके अलावा, ऐसे स्कूलों में छात्रों को एनटीए 👉 National Test Agency द्वारा राज्य या अन्य बोर्ड परीक्षाओं और मूल्यांकन के लिए उपस्थित होने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा, और इस प्रकार उच्चतर शिक्षा संस्थानों में दाखिला लिया जाएगा। विज्ञान, गणित, भाषा, और सामाजिक अध्ययन के शिक्षण में शिक्षकों की क्षमताओं को नए शैक्षणिक अभ्यासों के लिए उन्मुखीकरण सहित विकसित किया जाएगा। पुस्तकालयों और प्रयोगशालाओं को मजबूत किया जाएगा और पुस्तकों, पत्रिकाओं, आदि जैसे पर्याप्त पठन सामग्री और अन्य शिक्षण-शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी।

6.16 एसईडीजी के अंतर्गत और ऊपर वर्णित नीतिगत बिन्दुओं के सन्दर्भ में अनूसूचित जाति और जनजातियों के शैक्षणिक विकास में असमानताओं को दूर करने पर विशेष ध्यान दिया जायेगा। स्कूल शिक्षा में भागीदारी बढ़ाने के प्रयासों के तहत, सभी एसईडीजी से प्रतिभाशाली और मेधावी छात्रों के लिए बड़े पैमाने पर समर्पित क्षेत्रों में विशेष छात्रावास, ब्रिज पाठ्यक्रम और फीस माफ़ करने तथा छात्रवृत्ति के माध्यम से वित्तीय सहायता विशेषकर माध्यमिक स्तर पर प्रदान की जाएगी ताकि उच्चतर शिक्षा में उनके प्रवेश को सुविधाजनक बनाया जा सके।

6.17. रक्षा मंत्रालय के तत्वावधान में राज्य सरकारों को जनजाति बहुल प्रदेशों सहित अपने माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में एनसीसी विंग खोलने के लिए प्रोत्साहित किया जाए। इससे छात्रों की प्राकृतिक प्रतिभा और अद्वितीय क्षमता का उपयोग किया जा सकेगा जिससे वे रक्षा सेनाओं में सफल करियर के लिए प्रेरित होंगे।

6.18 एसईडीजी छात्र-छात्राओं के लिए उपलब्ध छात्रवृति, अवसर और योजनाओं में प्रतिभाग करने की दृष्टि से और समता को बढ़ाने के लिए कुछ सरलीकृत तरीके स्थापित किये जायेंगे जैसे - किसी ऐसी एकल एजेंसी या वेबसाइट के माध्यम से आवेदन लेना जो सभी विद्यार्थियों तक इन योजनाओं, छात्रवृति अथवा अवसरों की पहुँच सुनिश्चित करे और सिंगल विंडो प्रणाली के माध्यम से उनका आवेदन सुनिश्चित करे ।

6.19 उपरोक्त सभी नीतियां और उपाय सभी एसईडीजी के लिए पूर्ण समावेश और समता प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण तो हैं किन्तु पर्याप्त नहीं | इसके लिए विद्यालय की संस्कृति में बदलाव भी जरूरी है। स्कूल शिक्षा प्रणाली में सभी प्रतिभागी, जिनमें शिक्षक, प्रधानाचार्य, प्रशासक, काउंसलर और छात्र भी शामिल हैं, सभी छात्रों की आवश्यकताओं, समावेशन और समता की धारणाओं और सभी व्यक्तियों के सम्मान, प्रतिष्ठा और निजता के प्रति संवेदनशील होंगे | इस तरह की शैक्षिक संस्कृति छात्रों को सशक्त व्यक्ति बनने में मदद करने के लिए सबसे अच्छा साधन होगी, जो बदले में एक ऐसा समाज बनाने में सक्षम होंगे जो अपने सबसे कमजोर नागरिकों के लिए जिम्मेदार है । समावेशन और समता शिक्षक शिक्षा का एक प्रमुख पहलू बन जाएगा (और स्कूलों में सभी नेतृत्व, प्रशासनिक और अन्य पदों के लिए प्रशिक्षण में भी); साथ ही सभी छात्रों के लिए उत्कृष्ट रोल मॉडल लाने की दिशा में यह प्रयास किया जाएगा कि एसईडीजी में से उच्चतर गुणवत्ता के शिक्षक व नेतृत्वकर्ताओं का अधिक से अधिक चयन किया जाए।

6.20 छात्रों को शिक्षकों और अन्य विद्यालय कर्मियों (जैसे प्रशिक्षित सामाजिक कार्यकर्ता और परामर्शदाता) इत्यादि द्वारा लायी गयी इस नई स्कूली संस्कृति व पाठ्यक्रम में आये परिवर्तनों के माध्यम से संवेदनशील बनाया जाएगा । स्कूली पाठ्यक्रम में प्रारंभिक शिक्षा, मानवीय मूल्यों पर सामग्री, जैसे सभी व्यक्तियों के लिए सम्मान, सहानुभूति, सहिष्णुता, मानव अधिकार, लैंगिक समानता, अहिंसा, वैश्विक नागरिकता, समावेशन और समता शामिल होंगे । इसमें विभिन्न संस्कृतियों, धर्मों, भाषाओं, लिंग आधारित पहचान इत्यादि के बारे में अधिक विस्तृत ज्ञान शामिल होगा, जो विविधता के प्रति सम्मान और संवेदनशीलता विकसित करेगा । स्कूल के पाठ्यक्रम में किसी भी पूर्वाग्रह और रूढ़िवादिता को हटा दिया जाएगा, और ऐसी सामग्री को अधिकता में शामिल किया जाएगा जो सभी समुदायों के लिए प्रासंगिक और संबंधित है।

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