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उच्चतर शिक्षा

राष्ट्रिय शिक्षा निति 2020 को मुख्यतः चार भागों में बाँटा गया है जिसमें दूसरा भाग है उच्चतर शिक्षा। प्राथमिक शिक्षा ग्रहण करने के बाद छात्रों को भविष्य के लिए सक्षम बनाने हेतु विशेष कौशल एवं व्यावसायिक विषयों का ज्ञान होने जरुरी है उनकी जानकारी इस भाग में दी गई है। इसमें महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों में दी जाने वाली शिक्षा एवं शिक्षकों के लिए अध्यापन कार्य (बीएड) में किये गए परिवर्तनों की जानकारी को आप निम्न अध्यायों के जरिये जान सकते हैं :-
  1. गुणवत्तापूर्ण विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय : भारतीय उच्चतर शिक्षा व्यवस्था हेतु एक नया और भविष्योन्मुखी दृष्टिकोण 
  2. संस्थागत पुनर्गठन और समेकन 
  3. समग्र और बहु-विषयक शिक्षा की और 
  4. सिखने के लिए अनुकूलतम वातावरण व् छात्रों को सहयोग 
  5. प्रेरित, सक्रिय और सक्षम संकाय 
  6. उच्चतर शिक्षा में समता और समावेश 
  7. शिक्षक शिक्षा 
  8. व्यावसयिक शिक्षा का नविन आकल्पन 
  9. नविन राष्ट्रिय अनुसन्धान फाउंडेशन (एनआरएफ) के माध्यम से सभी क्षेत्रों में गुणवत्तायुक्त अकादमिक अनुसन्धान को उत्प्रेरित करना 
  10. उच्चतर शिक्षा की नियामक प्रणाली में आमूल-चूल परिवर्तन 
  11. उच्चतर शिक्षा संस्थानों के लिए प्रभावी शासन और नेतृत्व 

 उच्चतर शिक्षा

2035 तक जीईआर को बढ़ाकर 50 प्रतिशत करना

एनईपी 2020 का लक्ष्य व्यवसायिक शिक्षा सहित उच्चतर शिक्षा में सकल नामांकन अनुपात को 26.3 प्रतिशत (2018) से बढ़ाकर 2035 तक 50 प्रतिशत करना है। उच्चतर शिक्षा संस्थानों में 3.5 करोड़ नई सीटें जोड़ी जाएंगी।

समग्र बहुविषयक शिक्षा

नीति में लचीले पाठ्यक्रम, विषयों के रचनात्मक संयोजन, व्यावसायिक शिक्षा एवं उपयुक्त प्रमाणन के साथ मल्टीपल एंट्री एवं एक्जिट बिन्दुओं के साथ व्यापक, बहुविषयक, समग्र अवर स्नातक शिक्षा की परिकल्पना की गई है। यूजी शिक्षा इस अवधि के भीतर विविध एक्जिट विकल्पों तथा उपयुक्त प्रमाणन के साथ 3 या 4 वर्ष की हो सकती है। उदाहरण के लिए, 1 वर्ष के बाद सर्टिफिकेट, 2 वर्षों के बाद एडवांस डिप्लोमा, 3 वर्षों के बाद स्नातक की डिग्री तथा 4 वर्षों के बाद शोध के साथ स्नातक। 👉समग्र और बहुविषयक शिक्षा

विभिन्न एचईआई से अर्जित डिजिटल रूप से अकादमिक क्रेडिटों के लिए एक 👉 एकेडमिक बैंक आफ क्रेडिट की स्थापना की जानी है जिससे कि इन्हें अर्जित अंतिम डिग्री की दिशा में अंतरित एवं गणना की जा सके।

देश में वैश्विक मानकों के सर्वश्रेष्ठ बहुविषयक शिक्षा के माडलों के रूप में आईआईटी, आईआईएम के समकक्ष बहुविषयक शिक्षा एवं अनुसंधान विश्वविद्यालय (एमईआरयू)स्थापित किए जाएंगे। पूरी उच्च शिक्षा में एक मजबूत अनुसंधान संस्कृति तथा अनुसंधान क्षमता को बढ़ावा देने के लिए एक शीर्ष निकाय के रूप में राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन का सृजन किया जाएगा।

विनियमन

चिकित्सा एवं कानूनी शिक्षा को छोड़कर समस्त उच्च शिक्षा के लिए एक एकल अति महत्वपूर्ण व्यापक निकाय के रूप में भारत उच्च शिक्षा आयोग (एचईसीआई) का गठन किया जाएगा।

एचईसीआई के चार स्वतंत्र वर्टिकल होंगे- विनियमन के लिए राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा नियामकीय परिषद (एनएचईआरसी), मानक निर्धारण के लिए सामान्य शिक्षा परिषद (जीईसी), वित पोषण के लिए उच्चतर शिक्षा अनुदान परिषद (एचईजीसी) और प्रत्यायन के लिए राष्ट्रीय प्रत्यायन परिषद (एनएसी)। एचईसीआई प्रौद्योगिकी के जरिये चेहरारहित अंतःक्षेपों के माध्यम से कार्य करेगा और इसमें नियमों तथा मानकों का अनुपालन न करने वाले एचईआई को दंडित करने की शक्ति होगी। सार्वजनिक एवं निजी उच्चतर शिक्षा संस्थान विनियमन, प्रत्यायन एवं अकादमिक मानकों के उसी समूह द्वारा शासित होंगे। 👉 प्रेरित, सक्रिय और सक्षम संकाय

विवेकपूर्ण संस्थागत संरचना

उच्चतर शिक्षा संस्थानों को उच्च गुणवत्तापूर्ण शिक्षण, अनुसंधान एवं सामुदायिक भागीदारी उपलब्ध कराने के जरिये बड़े, साधन संपन्न, गतिशील बहु विषयक संस्थानों में रूपांतरित कर दिया जाएगा। विश्वविद्यालय की परिभाषा में संस्थानों की एक विस्तृत श्रेणी होगी जिसमें अनुसंधान केंद्रित विश्वविद्यालयों से शिक्षण केंद्रित विश्वविद्यालय तथा स्वायत्तशासी डिग्री प्रदान करने वाले महाविद्यालय शामिल होंगे। 👉व्यवसायिक शिक्षा का नवीन आकल्पन

महाविद्यालयों की संबद्धता 15 वर्षों में चरणबद्ध तरीके से समाप्त हो जाएगी तथा महाविद्यालयों को क्रमिक स्वायत्ता प्रदान करने के लिए एक राज्य वार तंत्र की स्थापना की जाएगी। ऐसी परिकल्पना की जाती है कि कुछ समय के बाद प्रत्येक महाविद्यालय या तो एक स्वायत्तशासी डिग्री प्रदान करने वाले महाविद्यालय में विकसित हो जाएंगे या किसी विश्वविद्यालय के संघटक महाविद्यालय बन जाएंगे। 👉 University and College Quality

प्रेरित, ऊर्जाशील और सक्षम संकाय

एनईपी सुस्पष्ट रूप से परिभाषित, स्वतंत्र, पारदर्शी नियुक्ति, पाठ्यक्रम/अध्यापन कला डिजाइन करने की स्वतंत्रता, उत्कृष्टता को प्रोत्साहन देने, संस्थागत नेतृत्व के जरिये प्रेरक, ऊर्जाशील एवं संकाय के क्षमता निर्माण की अनुशंसा करता है। इन मूलभूत नियमों का पालन न करने वाले संकायों को जबावदेह ठहराया जाएगा।  👉उच्चतर शिक्षा की नियामक प्रणाली में परिवर्तन

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