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संस्थागत पुनर्गठन और समेकन

संस्थागत पुनर्गठन और समेकन

Tags: Changes for University, College and Affiliated Institute. महाविद्यालय, विश्विद्यालय में बदलाव। नई शिक्षानीति से महाविद्यालयों पर पड़ने वाला प्रभाव। नए महाविद्यालयों का गठन। बड़े संस्थानों में बदलाव।
10.1 उच्चतर शिक्षा के बारे में इस नीति का मुख्य जोर उच्चतर शिक्षा संस्थानों को बड़े एवं बहु-विषयक विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और एचईआई कलस्टरों/ नॉलेज हबों में स्थानांतरित करके उच्चतर शिक्षा के विखंडन को समाप्त करना है। जिसमें प्रत्येक का लक्ष्य 3000 या उससे भी अधिक छात्रों का उत्थान करना होगा। यह पूरी उच्चतर शिक्षा में छात्रों के सीखने के लिए विद्वानों और साथियों के जीवंत समुदाय निर्माण, विषयों की बीच उपजी खाईयों को पाटने, छात्रों को उनके सम्पूर्ण मानसिक और चहुमुंखी (कलात्मक, रचनात्मक, विश्लेषणात्मक और खेल) विकास करने में सक्षम, सक्रिय अनुसंधान समुदायों अन्तर- अनुशासनिक अनुसंधान सहित को विकसित करने, और संसाधनों, सामग्री और मनुष्य, की कार्य कुशलता की बढ़ोत्तरी में मदद करेगी।

10.2 उच्चतर शिक्षा के ढाँचे के बारे में, यह नीति सबसे बड़ी अनुशंसा बड़े एवं बहु-विषयक विश्वविद्यालयों और उच्चतर शिक्षा संस्थान (एचईआई) क्लस्टरों के संबंध में करती है। भारतीय प्राचीन विश्वविद्यालयों तक्षशिला, नालन्दा, वललभी और विक्रमशिला जिनमें भारत और अन्य देशों के हजारों छात्र जीवंत एवं बहु- विषयक परिवेश में शिक्षा ले रहे थे, ने बड़ी सफलता का प्रदर्शन किया जो इस तरह के बड़े एवं बहु- विषयक अनुसंधान और शिक्षण विश्वविद्यालय ही कर सकते थे। भारत को बहुमुखी प्रतिभा वाले योग्य और अभिनव व्यक्तियों को बनाने के लिए इस परम्परा को वापस लाने की आवश्यकता है, जिससे कई देश पहले से ही शैक्षिक और आर्थिक रूप से इस दिशा में परिणत हो रहे हैं।

10.3 उच्चतर शिक्षा के इस विज़न के लिए खासकर एक नई वैचारिक धारणा / समझ की ज़रूरत होगी जिसमें एक उच्चतर शिक्षा संस्थान (एचईआई) अर्थात एक विश्वविद्यालय या एक कॉलेज गठन शामिल है। विश्वविद्यालय से अभिप्राय एक ऐसा बहु-विषयक संस्थान, जो उच्चतर स्तरीय अधिगम (लर्निंग) के लिए उच्चतर श्रेणी के शिक्षण, शोध और समुदायिक भागीदारी के साथ स्नातक और ख्रातकोत्तर कार्यक्रम चलाता है। इसलिए अगर विश्वविद्यालय को परिभाषित करें तो कई तरह के संस्थान होंगे जो शिक्षण और शोध को बराबर महत्व देने वाले होंगे जैसे शोध गहन विश्वविद्यालय और ऐसे संस्थान जो गुणवत्तापूर्ण शिक्षण पर अधिक बल देने वाले होंगे परंतु महत्वपूर्ण अनुसन्धान का संचालन करने वाले होंगे जैस शिक्षक गहन विश्वविद्यालय। प्राथमिक तौर पर, एक स्वायत्त डिग्री देने वाला कॉलेज (एसी) उच्चतर शिक्षा के एक बड़े बहु-विषयक संस्थान को संदर्भित करेगा जो स्नातक की डिग्री प्रदान करता है और मुख्य रूप से स्नातक शिक्षण पर केंद्रित है, हालांकि यह उस तक ही सीमित नहीं होगा और इसे उस तक सीमित करने की आवश्यकता नहीं है और यह आमतौर पर एक विशिष्ट विश्वविद्यालय से छोटा होगा।

नए महाविद्यालयों का गठन जिला स्तर पर

10.4 श्रेणीबद्ध मान्यता की एक पारदर्शी प्रणाली के माध्यम से, कॉलेजों को ग्रेडेड स्वायत्तता देने के लिए एक चरणबद्ध प्रणाली स्थापित की जाएगी। मान्यता प्राप्त करने के लिए हर स्तर पर जरूरी न्यूनतम मानकों को पूरा करने के लिए महाविद्यालयों को प्रोत्साहन, मार्गदर्शन, सहायता, और प्रेरित किया जाएगा। कालांतर में धीरे-धीरे सभी महाविद्यालय या तो डिग्री प्रदान करने वाले स्वायत्त महाविद्यालय बन जाएंगे, या किसी विश्वविद्यालय के अंग के रूप में विकसित होंगे; विश्वविद्यालय के अंग के रूप में वे पूर्ण रूप से उसका हिस्सा होंगे। अगर वो चाहें तो उपयुक्त मान्यता के साथ, स्वायत्त डिग्री देने वाले कॉलेज अनुसंधान- गहन या शिक्षण-गहन विश्वविद्यालयों में विकसित हो सकते हैं।

10.5 यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि इन तीन प्रकारों के संस्थानों का वर्गीकरण एक स्पष्ट, और अलग-अलग श्रेणियां नहीं है, बल्कि एक निरंतरता के साथ है। एचईआई को अपनी योजनाओं, कार्यों और प्रभावशीलता के आधार पर एक श्रेणी से दूसरी श्रेणी में जाने की स्वायत्तता और स्वतंत्रता होगी। इन संस्थाओं को चिह्नित करने के लिए सबसे प्रमुख कार्य उनके लक्ष्यों तथा काम का फोकस होगा। प्रत्यायन प्रणाली इस प्रकार के संस्थानों (एचईआई) के लिए उचित रूप से भिन्न और प्रासंगिक मापदंडों का विकास और उपयोग करेगी। हालांकि, सभी प्रकार के संस्थानों (एचईआई) में उच्चतर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और शिक्षण-अधिगम अपेक्षाएं समान होंगी।

10.6 शिक्षण और शोध के अलावा, उच्चतर शिक्षा संस्थाएं (एचईआई) अन्य महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां भी निभाएंगे, जैसे- अन्य उच्चतर शिक्षा संस्थान (एचईआई) को विकसित और स्थापित करने में सहयोग, सामुदायिक सहभागिता और सेवा, कार्यप्रणाली के विभिन्न क्षेत्रों में योगदान, उच्चतर शिक्षा प्रणाली के लिए प्रध्यापकों की योग्यता का विकास और स्कूली शिक्षा में योगदान, जिन्हें वे उपयुक्त संसाधनों, प्रोत्साहनों और संरचनाओं को मुहैया कराने के माध्यम से निर्वहन करेंगे।

10.7 2040 तक सभी वर्तमान उच्चतर शिक्षा संस्थानों (एचईआई) का उद्देश्य अपने आपको बहु-विषयक संस्थानों के रूप में स्थापित करना होगा। बुनियादी ढांचे और संसाधनों के इष्टतम उपयोग के लिए, और जीवंत बहु-विषयक समुदायों के निर्माण के लिए हजारों की संख्या में छात्र नामांकन होंगे। चूंकि इस प्रक्रिया में समय लगेगा, सभी उच्चतर शिक्षा संस्थान सबसे पहले 2030 तक बहु-विषयक संस्थान बनने की योजना बनायेंगे, और फिर धीरे-धीरे छात्रों की नामांकन संख्या वांछित स्तर तक बढ़ायेंगे। 

10.8 वंचित क्षेत्रों में पूर्ण उपलब्धता, न्यायसंगतता और समावेश के लिए उचित संख्या में उच्चतर शिक्षा संस्था स्थापित और विकसित किए जायेंगे। 2030 तक प्रत्येक जिले में या उसके समीप कम से कम एक बड़ा बहु-विषयक उच्चतर शिक्षा संस्थान (एचईआई) होगा। श्रेष्ठ गुणवत्तापूर्ण उच्चतर शिक्षा संस्थान सार्वजनिक और निजी दोनों को विकसित करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जायेंगे, जिनके निर्देश का माध्यम स्थानीय/भारतीय भाषाओं या द्विभाषिक होगा। इसका उद्देश्य सकल नामाकंन अनुपात को 2018 में 26.3% से बढ़ाकर वर्ष 2035 तक 50% करना होगा। हालांकि इन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए कई नए संस्थानों का विकास किया जा सकता है, लेकिन क्षमता निर्माण का एक बड़ा भाग मौजूदा (एचईआई) को समेकित, महत्वपूर्ण रूप से विस्तारित और बेहतर बनाने के माध्यम से प्राप्त किया जाएगा।

10.9 बड़ी संख्या में उत्कृष्ट सार्वजनिक संस्थानों के विकास में जोर देने के साथ, सार्वजनिक और निजी दोनों संस्थानों का विकास होगा। सार्वजनिक उच्चतर शिक्षा संस्थान (एचईआई) के लिए सार्वजनिक वित्त पोषण सहायता के स्तर को बढ़ाने के लिए एक निष्पक्ष और पारदर्शी प्रणाली होगी। यह प्रणाली सभी सार्वजनिक संस्थानों के विकास के लिए समान अवसर देगी। यह प्रत्यायन प्रणाली, प्रत्यायन नियमों जैसे पारदर्शिता और पूर्व-प्रचारित मानदंडों पर आधारित होगी। इस नीति के नियमों के अनुसार जो उच्चतर शिक्षा संस्थान (एचईआई) श्रेष्ठ तम प्रदर्शन करेंगें, उन्हें अपनी क्षमताओं का विस्तार करके प्रोत्साहित किया जाएगा।

Open Distance Learning and Online Courses

10.10 संस्थानों को अपने कार्यक्रमों की सीटें, पहुँच और सकल नामांकन अनुपात बढ़ाने एवं जीवनपर्य॑त सीखने के अवसरों को मुहैया कराने (एसडीजी4) हेतु मुक्त दूरस्थ शिक्षा और ऑनलाइन कोर्स को संचालित करने का अवसर होगा, बशर्तें उन्हें ऐसा करने के लिए मान्यता प्राप्त हो। सभी मुक्त दूरस्थ शिक्षा कार्यक्रमों (और उनके घटक) के किसी भी डिप्लोमा या डिग्री के मानक और गुणवत्ता, एचईआई के परिसर में संचालित उच्चतम गुणवत्ता कार्यक्रमों के समतुल्य होंगे। ओडीएल के लिए मान्यता प्राप्त बेहतरीन संस्थानों को उच्चतर-गुणवत्ता वाले ऑनलाइन कोर्स विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा और उनकी सहायता की जाएगी। ऐसे गुणवत्तापूर्ण ऑनलाइन कोर्सों को एचईआई के पाठ्यक्रमों के साथ समन्वित किया जाएगा और इस प्रकार पाठ्यक्रमों के मिश्रित स्वरूपों को वरीयता दी जाएगी।
 
10.11 एक ही स्ट्रीम वाले संस्थानों (एचईआई) को समय के साथ जीवंत बहु-विषयक संस्थानों या बहु-विषयक एचईआई क्लस्टर का अंग के रूप में चरणबद्ध तरीक़े से परिवर्तित किया जाएगा। जिन्हें उच्चतर गुणवत्ता बहु-विषयक और अंतर-विषयक शिक्षण और अनुसंधान के लिए सक्षम और प्रोत्साहित किया जायेगा। एक स्ट्रीम वाले एचईआई में विभिन्न विषयों के संकायों को जोड़ा जायेगा जिससे वे मजबूत होंगे। उपयुक्त प्रत्यायन (एक्रिडिटेशन) उपलब्धि के माध्यम से, सभी उच्चतर शिक्षा संस्थान (एचईआई) धीरे-धीरे पूर्ण अकादमिक और प्रशासनिक स्वायत्ता की तरफ बढ़ेंगे ताकि ऐसी जीवंत संस्कृति का निर्माण हो । सार्वजनिक संस्थानों की स्वायत्ता को पर्याप्त सार्वजनिक वित्त सहायता से स्थायित्व और मजबूती मिलेगी। निजी संस्थान जो सार्वजनिक हित के लिए उच्चतर गुणवत्ता, समतापूर्ण शिक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं उन्हें प्रोत्साहित किया जायेगा।

10.12 इस नीति द्वारा कल्पित नई विनियामक प्रणाली ग्रेडेड ऑटोनोमी के जरिये और इसे एक चुनौती की तरह लेते हुए समग्र रूप से इस संस्कृति को सशक्तिकरण और स्वायत्तता की ओर नवाचार के लिए बढ़ावा देगी। और 15 वर्षों के अंतराल में धीरे-धीरे संबद्ध (एफिलिएटेड) कॉलेज की प्रणाली समाप्त होगी। प्रत्येक संबद्ध विश्वविद्यालय अपने संबद्ध कॉलेज के मार्गदर्शन के लिए उत्तरदायी होगा ताकि वे अपनी क्षमताओं को विकसित कर सकें तथा अकादमिक और पाठ्यक्रम संबंधी मामलों में न्यूनतम मानदंड; शिक्षण और मूल्यांकन; गवर्नेंस सुधार; वित्तीय मजबूती; और प्रशासनिक दक्षता को प्राप्त कर सकें। वर्तमान में विश्वविद्यालय से संबद्ध सभी कॉलेज प्रत्यायन प्राप्त करने और स्वायत्त डिग्री देने वाले कॉलेज बनने के लिए निर्धारित बेंचमार्क एक समय-अववधि में प्राप्त करेंगे; इसे उचित मेंटरिंग और सरकार के सहयोग सहित एक संयुक्त राष्ट्रीय प्रयास के माध्यम से प्राप्त किया जाएगा।

 10.13 समूचे उच्चतर शिक्षा क्षेत्र का लक्ष्य एक एकीकृत उच्चतर शिक्षा प्रणाली में बनना होगा - जिसमें व्यावसायिक और पेशेवर शिक्षा शामिल है। यह नीति और इसका दृष्टिकोण वर्तमान में एचईआई के सभी स्ट्रीम्स पर समान रूप से लागू होंगे जो अंतत: उच्चतर शिक्षा के एक अनुकूल पारिस्थितिकी में विलय हो जाएंगे।

10.14 व्यापक तौर पर विश्वविद्यालय का अर्थ है, उच्चतर शिक्षा का एक बहु-विषयक संस्थान जो स्नातक, स्नातकोत्तर और पीएच-डी कार्यक्रम चलाता है, और उच्चतर गुणवत्ता वाले शिक्षण और अनुसंधान करता है। अभी देश में एचईआई का जटिल नामकरण 'समवत विश्वविद्यालय', 'संबद्ध विश्वविद्यालय', 'संबद्ध तकनीकी विश्वविद्यालय', 'एकात्मक विश्वविद्यालय' है जिसे मानकों के अनुसार मानदंड को पूरा करने पर केवल 'विश्वविद्यालय' के नाम से प्रतिस्थापित किया जाएगा।

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