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शिक्षा नीति 2020 में विषयों का एकीकरण

अनिवार्य विषयों, कौशलों और क्षमताओं का शिक्षाक्रमीय एकीकरण

शिक्षा नीति 2020 अध्याय 4 भाग 3

4.23 हालांकि विद्यार्थियों को अपने व्यक्तिगत पाठ्यक्रम को चुनने में बड़ी मात्रा में लचीले विकल्प मिलने चाहिए, लेकिन आज की तेजी से बदलती दुनिया में सभी विद्यार्थियों को एक अच्छे, सफल, अभिनव, अनुकूलनीय और उत्पादक व्यक्ति बनने के लिए कुछ विषयों, कौशलों और क्षमताओं को सीखना भी ज़रूरी है। भाषाओं में प्रवीणता के अलावा, कुछ अन्य कौशल जिनका ज्ञान विद्यार्थी को होना जरुरी है वो निम्न हैं

  • वैज्ञानिक स्वभाव और साक्ष्य आधारित सोच;
  • रचनात्मकता और नवीनता;
  • सौंदर्यशासत्न और कला की भावना;
  • मौखिक और लिखित अभिव्यक्ति और संवाद;
  • स्वास्थ्य और पोषण;
  • शारीरिक शिक्षा, फिटनेस, स्वास्थ्य और खेल;
  • सहयोग और टीम वर्क;
  • समस्या को हल करने और तार्किक चिंतन;
  • व्यावसायिक एक्सपोज़र और कौशल;
  • डिजिटल साक्षरता, कोडिंग और कम्प्यूटेशनल चिंतन;
  • नैतिकता और नैतिक तर्क, मानव और संवैधानिक मूल्यों का ज्ञान और अभ्यास;
  • लिंग संवेदनशीलता;
  • मौलिक कर्तव्य;
  • नागरिकता कौशल और मूल्य;
  • भारत का ज्ञान;
  • पर्यावरण संबंधी जागरूकता, जिसमें पानी और संसाधन संरक्षण, स्वच्छता और साफ-सफाई शामिल हैं; 
  • और समसामायिक मामलों और स्थानीय समुदायों, राज्यों, देश और दुनिया द्वारा जिन महत्वपूर्ण मुद्दों का सामना किया जा रहा है उनका ज्ञान भी होना आवश्यक है।

4.24 प्रासंगिक चरणों में समसामयिक विषयों, जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजाइन थिंकिंग, होलिस्टिक हेल्‍थ, ऑर्गेनिक लिविंग, पर्यावरण शिक्षा, वैश्विक नागरिकता शिक्षा (जीसीईडी), आदि जैसे समसामयिक विषयों की शुरुआत सहित सभी स्तरों पर छात्रों में इन विभिन्न महत्वपूर्ण कौशलों को विकसित करने हेतु समुचित शिक्षाक्रमीय और शिक्षण-शास्त्रीय कदम उठाए जाएंगे।

4.25 यह माना जाता है कि गणित और गणितीय सोच भारत के भविष्य और कई आगामी क्षेत्रों और व्यवसायों में भारत की नेतृत्वकारी भूमिका के लिए बहुत महत्वपूर्ण होगी। इन उभरते हुए क्षेत्रों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, और डेटा साइंस शामिल हैं। इस प्रकार गणित और कम्प्यूटेशनल सोच को विभिन्न प्रकार के अभिनव तरीकों के माध्यम से फाउंडेशनल स्तर से शुरू करके स्कूल की पूरी अवधि के दौरान विभिन्न तरीकों, जिनमें पहेलियाँ और गेम का नियमित उपयोग शामिल है जो गणितीय सोच को अधिक आनंददायी और आकर्षक बनाते हैं, के माध्यम से सिखाने पर जोर दिया जाएगा। मिडिल स्कूल स्तर पर कोडिंग संबंधी गतिविधियाँ शुरू की जाएँगी।

शिक्षा नीति 2020 में लागू नई शैक्षणिक पाठ्य सरंचना को अभ्यास आधारित बनाना।

4.26 प्रत्येक विद्यार्थी ग्रेड 6 और 8 के दौरान राज्यों और स्थानीय समुदायों द्वारा तय किए गए और स्थानीय कुशल आवश्यकताओं द्वारा मैपिंग के अनुसार एक आनंददायी कोर्स करेगा, जो कि महत्वपूर्ण व्यावसायिक शिल्प, जैसे कि बढ़ईगीरी, बिजली का काम, धातु का काम, बागवानी, मिट्टी के बर्तनों के निर्माण, आदि का एक जायजा देगा और अपने हाथों से काम करने का अनुभव प्रदान करेगा। ग्रेड 6-8 के लिए एक अभ्यास-आधारित पाठ्यक्रम को एनसीएफएसई 2020-24 को तैयार करते हुए एनसीईआरटी द्वारा उचित रूप से डिजाइन किया जाएगा। कक्षा 6 से 8 में पढ़ने के दौरान सभी विद्यार्थी एक दस दिन के बस्ता-रहित पीरियड में भाग लेंगे जब वे स्थानीय व्यावसायिक विशेषज्ञों, जैसे बढ़ई, माली, कुम्हार, कलाकार आदि के साथ प्रशिक्षु के रूप में काम करेंगे।

इसी तर्ज पर कक्षा 6 से 12 तक, छुट्टियों के दौरान भी, विभिन्न व्यावसायिक विषय समझने के लिए अवसर उपलब्ध कराये जा सकते हैं। ऑनलाइन माध्यम में भी व्यावसायिक कोर्स उपलब्ध कराये जा सकते हैं। वर्ष भर में ऐसे बस्ता-रहित दिनों को विभिन्न प्रकार की समृद्ध करने वाली कला, क्विज, खेल और व्यावसायिक हस्तकलाओं को प्रोत्साहन दिया जायेगा। बच्चों को ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और पर्यटक महत्व के स्थानों/ स्मारकों का दौरा करने, स्थानीय कलाकारों और शिल्पकारों से मिलने और अपने गांव / तहसील / जिला/ राज्य में उच्चतर शैक्षणिक संस्थानों का दौरा करने के माध्यम से स्कूल के बाहर की गतिविधियों के लिए आवधिक एक्सपोज़र दिया जाएगा।

4.27 "भारत का ज्ञान" में आधुनिक भारत और उसकी सफलताओं और चुनौतियों के प्रति प्राचीन भारत का ज्ञान और उसका योगदान शामिल होगा, और शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण, आदि के संबंध में भारत की भविष्य की आकांक्षाओं की स्पष्ट भावना शामिल होगी। इन तत्वों को पूरे स्कूल पाठ्यक्रम में जहाँ भी प्रासंगिक हो वहाँ वैज्ञानिक तरीके से और एक सटीक रूप से शामिल किया जाएगा। विशेष रूप से भारतीय ज्ञान प्रणाली को आदिवासी ज्ञान एवं सीखने के स्वदेशी और पारंपरिक तरीकों सहित कवर किया जाएगा और गणित, खगोल विज्ञान, दर्शन, योग, वास्तुकला, चिकित्सा, कृषि, इंजीनियरिंग, भाषा विज्ञान, साहित्य, खेल के साथ-साथ शासन, राजव्यवस्था, संरक्षण, आदि विषयों में शामिल किया जाएगा। जनजातीय एथनो-औषधीय प्रथाओं, वन प्रबंधन, पारंपरिक (जैविक) फसल की खेती, प्राकृतिक खेती, आदि में विशिष्ट पाठ्यक्रम भी उपलब्ध कराए जाएंगे।

भारतीय ज्ञान प्रणालियों पर एक आकर्षक पाठ्यक्रम भी एक वैकल्पिक के रूप में माध्यमिक विद्यालय में छात्रों के लिए उपलब्ध होगा। मस्ती और स्वदेशी खेलों के माध्यम से विभिन्न टॉपिक्स और विषयों को सीखने के लिए स्कूलों में प्रतियोगिताएं आयोजित की जा सकती हैं। पूरे स्कूल पाठ्यक्रम के दौरान विज्ञान और अन्य क्षेत्रों में प्राचीन और आधुनिक भारत के प्रेरणादायक व्यक्तित्वों पर वीडियो वृत्तचित्र दिखाए जाएंगे। छात्रों को सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रमों के हिस्से के रूप में विभिन्न राज्यों का दौरा करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

4.28 विद्यार्थियों को कम उम्र में "सही को करने" के महत्व को सिखाया जाएगा, और नैतिक निर्णय लेने के लिए एक तार्किक ढांचा दिया जाएगा | बाद के वर्षों में, इन मुद्दों को विभिन्न थीम जैसे धोखाधड़ी, हिंसा, साहित्यिक चोरी, गंदगी फैलाना, सहिष्णुता, समानता, समानुभूति इत्यादि की मदद से विस्तार दिया जाएगा, जिसमें बच्चों को अपने जीवन का संचालन करने में नैतिक / नैतिक मूल्यों को अपनाने के लिए सक्षम बनाने; कई दृष्टिकोणों से एक नैतिक मुद्दे के बारे में तर्क गढ़ने और निर्णय लेने; और सभी कार्यों में नैतिक आचरण को अपनाने में सक्षम बनाने पर जोर दिया जाएगा।

इस तरह विकसित हुए नैतिक बोध के चलते पारंपरिक भारतीय मूल्यों और सभी बुनियादी मानवीय और संवैधानिक मूल्यों (जैसे सेवा, अहिंसा, स्वच्छता,सत्य, निष्काम-कर्म, शांति, त्याग, सहिष्णुता, विविधता, बहुलवाद, नैतिक-आचरण, लैंगिक संवेदनशीलता, बुजुर्गों के लिए सम्मान, सभी लोगों और उनकी अंतर्निहित क्षमताओं का सम्मान, पर्यावरण के प्रति सम्मान, मदद करना, शिष्टाचार, थैर्य, क्षमा, समानुभूति, करुणा, देशभक्ति, लोकतांत्रिक दृष्टिकोण, अखंडता, जिम्मेदारी, न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व) को विद्यार्थियों में विकसित किया जा सकेगा। बच्चों को पंचतंत्र की मूल कहानियों, जातक, हितोपदेश, और अन्य मजेदार दंतकथाओं और भारतीय परंपरा से प्रेरक कहानियों को पढ़ने और सीखने का अवसर मिलेगा और वैश्विक साहित्य पर उनके प्रभावों के बारे में भी वे जानेंगे। भारतीय संविधान के अंश भी सभी छात्रों के लिए पढ़ना आवश्यक माना जाएगा। स्वास्थ्य में बुनियादी प्रशिक्षण जिसमें निवारक स्वास्थ्य, मानसिक स्वास्थ्य, अच्छा पोषण, व्यक्तिगत और सार्वजनिक स्वच्छता, आपदा प्रतिक्रिया और प्राथमिक चिकित्सा शामिल है के साथ ही साथ शराब, तम्बाकू और अन्य मादक पदार्थों के हानिकारक और विपरीत प्रभावों की वैज्ञानिक व्याख्या को भी पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा।

4.29 फाउंडेशनल स्तर से शुरू करके बाकी सभी स्तरों तक, पाठ्यचर्या और शिक्षण-शास्त्र को एक मजबूत भारतीय और स्थानीय संदर्भ देने की दृष्टि से पुनर्गठित किया जायेगा। इसके अंतर्गत संस्कृति, परंपराएँ, विरासत, रीति-रिवाज, भाषा, दर्शन, भूगोल, प्राचीन और समकालीन ज्ञान, सामाजिक और वैज्ञानिक आवश्यकताएं, सीखने के स्वदेशी और पारंपरिक तरीके आदि सभी पक्ष शामिल होंगे जिससे शिक्षा यथासंभव रूप से हमारे छात्रों के लिए अधिकतम भरोसेमंद, प्रासंगिक, रोचक और प्रभावी बने। कहानियों, कला, खेलों, उदाहरणों और समस्याओं आदि का चयन जहाँ तक संभव हो भारतीय और स्थानीय भौगोलिक सन्दर्भों के आधार पर किया जायेगा। शिक्षा को इस तरह का आधार मिलने पर निश्चित रूप से अमूर्त चिंतन, नए विचारों और रचनात्मकता को निखरने का अवसर मिलेगा।

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