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प्रेरित, सक्रिय और सक्षम संकाय

प्रेरित, सक्रिय और सक्षम संकाय

13.1 उच्चतर शिक्षण संस्थानों की सफलता का सबसे महत्वपूर्ण कारक यहाँ कार्यरत संकाय सदस्यों की गुणवत्ता और संलग्नता है। उच्चतर शिक्षा से जुड़े लक्ष्यों को हासिल करने में संकाय सदस्यों की महत्वपूर्ण भूमिका को ध्यान में रखते हुए, इनकी भर्ती प्रक्रिया में पिछले वर्षों में कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। ये कदम भर्ती और सेवा काल के दौरान कार्यस्थल में आगे बढ़ने के अवसरों को व्यवस्थित करने, और संकाय सदस्यों की भर्ती प्रक्रिया में विभिन्न समूहों की ओर से न्यायसंगत प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित करने से संबश्चित हैं। सार्वजनिक संस्थानों के स्थायी संकाय सदस्यों के वेतन भत्तों के स्तरों में भी पर्याप्त वृद्धि की गयी है। संकाय सदस्यों के व्यावसायिक विकास से संबन्धित विभिन्न अवसरों को सुनिश्चित करने की दिशा में भी कई कदम उठाए गए हैं।
अकादमिक पेशे की प्रतिष्ठा में विभिन्न सुधारों और हम सभी को सही अर्थों में प्रेरित करने वाले अनुकरणीय संकाय सदस्यों की अच्छी संख्या में मौजूदगी के बावजूद भी, उच्चतर शिक्षा प्रणती को सफल और समुन्नत होंने तथा अपेक्षित उच्चतमस्तर को प्राप्त करने के लिए आवश्यक उच्चतर शिक्षण संस्थानों के संकाय सदस्यों का प्रदर्शन शिक्षण, अनुसंधान और सेवा काल के मामले में, औसत से बहुत कम है। संकाय सदस्यों में प्रेरणा और उत्साह की कमी से संबंधित कारणों को संबोधित किया जाना चाहिए जिससे कि यह सुनिश्चित किया जा सके कि प्रत्येक संकाय सदस्य अपने छात्रों, संस्थान और पेशे में प्रगति के लिए पूरे उत्साह के साथ प्रसन्नतापूर्वक जुड़े हैं। उच्चतर शिक्षण संस्थानों में सर्वोत्कृष्ट, प्रेरित और सक्षम संकाय सदस्यों को सुनिश्चित करने के लिए यह नीति अपनी ओर से निम्न कदमों की अनुशंसा करती है।

13.2 सबसे बुनियादी कदम के रूप में सभी उच्चतर शिक्षण संस्थान स्वच्छ पेयजल, स्वच्छ शौचालयों, ब्लैकबोर्ड, कार्यालय, शिक्षण सामग्रियाँ, पुस्तकालय, प्रयोगशालाओं और सुखद कक्षा वातावरण और परिसर जैसी आवश्यक बुनियादी ढांचे और सुविधाओं से युक्त होंगे। हर कक्षा में नवीनतम शैक्षणिक प्रौद्योगिकी तक पहुंच होनी चाहिए जो सीखने के बेहतर अनुभवों को सक्षम बनाती है।

13.3 शिक्षण का अतिरिक्त बोझ नहीं होगा, छात्र - शिक्षक अनुपात भी बहुत अधिक नहीं होगा, जिससे कि शिक्षण प्रक्रिया एक सुखद गतिविधि बनी रहे, छात्रों से चर्चा करने, शोध करने, और विश्वविद्यालय से जुड़ी अन्य गतिविधियों के लिए पर्याप्त समय मिल सके। प्रत्येक संकाय सदस्य की नियुक्ति एकल संस्थान में की जाएगी और विभिन्न संस्थानों में इनका सामान्यतः स्थानांतरण नहीं किया जाएगा जिससे कि वे अपने संस्थान और वहाँ के लोगों के प्रति सही मायनों में तत्पर, संलग्न और प्रतिबद्ध महसूस कर सकें।

13.4 संकाय सदस्यों को स्वीकृत फ्रेमवर्क के भीतर पाठ्यपुस्तकों के चयन तथा असाइनमेंट और आकलन की प्रक्रियाओं को निर्मित करने के साथ ही साथ अपने स्वयं के पाठ्यक्रम संबंधी और शैक्षणिक प्रक्रियाओं को रचनात्मक रूप से निर्मित करने की स्वतन्त्रता दी जाएगी। संकाय सदस्यों को रचनात्मक शिक्षण, शोध, और उनके अपने अनुसार बेहतर कार्य के लिए प्रेरित और सशक्त किया जाना उन्हें उत्कृष्ट और रचनात्मक कार्यों को करने की ओर प्रेरित करने का सबसे महत्वपूर्ण प्रेरक होगा।

13.5 उत्कृष्ट कार्यों को उपयुक्त पुरस्कार, पदोन्नति, कार्यों की सराहना के साथ ही साथ संस्थागत नेतृत्वकर्ताओं में उचित स्थान सुनिश्चित करके बढ़ावा दिया जाएगा। इसी के साथ ही उन संकाय सदस्यों की जवाबदेही भी तय की जाएगी जो कि निर्धारित बुनियादी मानदंडों के अनुसार कार्य नहीं कर पा रहे।

13.6 उत्कृष्टता को बढ़ावा देने से जुड़े स्वायत्त संस्थानों के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए उच्चतर शिक्षण संस्थानों में संकाय सदस्यों की भर्ती से संबंधित प्रक्रियाएँ और मानदंड स्पष्ट रूप से पारिभाषित, स्वतंत्र और पारदर्शी होंगे। वर्तमान नियुक्ति प्रक्रिया को जारी रखते हुए भी उत्कृष्टता को सुनिश्चित करने के लिए एक 'कार्यकाल-द्रैक' प्रणाली यानि कि उपयुक्त प्रोबेशन अवधि को जोड़ा जाएगा। अत्यंत प्रभावी अनुसंधानों और योगदानों को मान्यता प्रदान करने के लिए एक फास्ट-ट्रैक पदोन्नति प्रणाली सुनिश्चित की जाएगी। कार्यों के उचित मूल्यांकन, 'कार्यकाल' (यानी परिवीक्षा के बाद स्थायी नियुक्ति) निर्धारण, पदोन्नति, वेतन में वृद्धि, मान्यता आदि सहित, सहकर्मी द्वारा समीक्षा, छात्र समीक्षा, शिक्षण और शिक्षण-शास्त्र में नवाचार, शोध की गुणवत्ता और प्रभाव, व्यावसायिक विकास से जुड़ी गतिविधियां और संस्थान तथा समाज से संबश्चित कार्य के अन्य विभिन्न रूपों और उनके प्रभावों के उचित आकलन के लिए मापदण्डों को समाहित करती प्रणालियों को सभी उच्चतर शिक्षण संस्थान द्वारा विकसित किया जाएगा और इन्हें संस्थानों की संस्थागत विकास योजना (आईडीपी) में स्पष्ट रूप से निर्दिष्ट किया जाएगा।

13.7 उत्कृष्टता और नवाचारों को बढ़ावा देने वाले उत्कृष्ट और उत्साही संस्थागत नेतृत्वकर्ताओं की जरूरत आज के समय की मांग है। एक संस्था और उसके संकाय सदस्यों की सफलता के लिए उच्चतर गुणवत्ता युक्त संस्थानिक नेतृत्व का होना अत्यंत महत्वपूर्ण है। उच्चतर अकादेमिक और सेवा क्रेडेंशियल्स के साथ ही साथ नेतृत्व और प्रबंध कौशल को प्रदर्शित करने वाले विभिन्न संकाय सदस्यों की समय रहते ही पहचान की जाएगी, और फिर उन्हें नेतृत्व से जुड़े विभिन्न पदों से गुजारते हुए प्रशिक्षित किया जाएगा। संस्थानों में नेतृत्व से जुड़े पद रिक्त नहीं रहेंगे, बल्कि नेतृत्व में परिवर्तन के दौरान एक निश्चित ओवरलैपिंग समयावधि का प्रावधान सभी संस्थानों में होना चाहिए, जिससे कि संस्थानों के सुचारु संचालन को सुनिश्चित किया जा सके। संस्था के नेतृत्वकर्ता ऐसी उत्कृष्टता की संस्कृति के निर्माण को ध्यान में रखेंगे जो कि सभी संकाय सदस्यों और उच्चतर शिक्षण संस्थानों के नेतृत्वकर्ताओं को उत्कृष्ट और नवोन्मेषी शिक्षण, शोध, संस्थागत और सामुदायिक कार्यों की ओर प्रेरित और प्रोत्साहित करे।

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