-->
ऑनलाइन और डिजिटल शिक्षा

ऑनलाइन और डिजिटल शिक्षा - प्रौद्योगिकी का न्यायसम्मत उपयोग सुनिश्चित करना

24.1 नई परिस्थितियाँ और वास्तविकताओं के लिए नई पहलें अपेक्षित हैं। संक्रामक रोगों और वैश्विक माहामारियों में हाल ही में वृद्धि को देखते हुए यह ज़रूरी हो गया है कि जब भी और जहाँ भी शिक्षा के पारंपरिक और विशेष साधन संभव न हों वहाँ हम गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा के वैकल्पिक साधनों के साथ तैयार हों। इस संबंध में, नई शिक्षा नीति, 2020 प्रौद्योगिकी की संभावित चुनौतियों को स्वीकार करते हुए उससे मिलने वाले लाभों के महत्व पर भी ध्यान केंद्रित है। यह निर्धारित करने के लिए कि ऑनलाइन/डिजिटल शिक्षा की हानियों को कम करते हुए हम कैसे इससे लाभ उठा सकते हैं, सावधानीपूर्वक और उपयुक्त रूप से तैयार किया गया अध्ययन करना होगा। साथ ही,सभी को गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा प्रदान करने से संबंधित वर्तमान और भावी चुनौतियों का सामना करने के लिए मौजूदा डिजिटल प्लेटफॉर्म और क्रियान्वित आईसीटी-आधारित पहलों को अनुकूल और विस्तारित करना होगा।

24.2 तथापि, ऑनलाइन/ डिजिटल शिक्षा का लाभ तब तक नहीं उठाया जा सकता जब तक डिजिटल इंडिया अभियान और किफ़ायती कंप्यूटिंग उपकरणों की उपलब्धता जैसे ठोस प्रयासों के माध्यम से डिजिटल अंतर को समाप्त नहीं किया जाता। यह जरूरी है कि ऑनलाइन और डिजिटल शिक्षा के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग समानता के सरोकारों को पर्याप्त रूप से संबोधित किया जाए |

24.3 प्रभावशाली ऑनलाइन प्रशिक्षक बनने के लिए शिक्षकों को उपयुक्त प्रशिक्षण और विकास चाहिए। पहले से ही यह माना नहीं जा सकता कि पारंपरिक कक्षा में एक अच्छा शिक्षक स्वचालित रूप से चलने वाली एक ऑनलाइन कक्षा में भी एक अच्छा शिक्षक सिद्ध होगा। अध्यापन में आवश्यक परिवर्तनों के अलावा, ऑनलाइन आकलन के लिए भी एक अलग दृष्टिकोण की आवश्यकता होती है। बड़े पैमाने पर ऑनलाइन परीक्षा आयोजित करने में कई चुनौतियां हैं, जिनमें ऑनलाइन परिवेश में पूछे जाने वाले प्रश्नों के प्रकार से संबंधित सीमाएं, नेटवर्क और बिजली के व्यवधान से जूझना और अनैतिक प्रथाओं को रोकना शामिल हैं। कुछ प्रकार के पाठ्यक्रम / विषय, जैसे प्रदर्शन कला और विज्ञान व्यावहारिक ऑनलाइन / डिजिटल शिक्षा क्षेत्र में सीमाएं हैं, जिन्हें नवीन उपायों के साथ कुछ सीमा तक दूर किया जा सकता है। इसके अलावा, जब तक ऑनलाइन शिक्षा को अनुभवात्मक और गतिविधि-आधारित शिक्षा के साथ मिश्रित नहीं किया जाता, तब तक यह सीखने के सामाजिक, भावात्मक और साइकोमोटर आयामों पर सीमित फोकस वाली एक स्क्रीन-आधारित शिक्षा मात्र ही बन जाएगी।

ऑनलाइन शिक्षा के लिए सिफारिश

24.4 डिजिटल प्रौद्योगिकी के उद्धव और स्कूल से लेकर उच्चतर शिक्षा तक सभी स्तरों पर शिक्षण-अधिगम के लिए प्रौद्योगिकी के उभरते हुए महत्व को देखते हुए - यह नीति निम्नलिखित प्रमुख पहलों की सिफारिश करती है:
  • ऑनलाइन शिक्षा के लिए पायलट अध्ययन : ऑनलाइन शिक्षा की हानियों को कम करते हुए उसे शिक्षा के साथ एकीकृत करने के लाभों का मूल्यांकन करने के लिए और छात्रों को उपकरणों की आदत, ई-कंटैंट का सबसे पसंदीदा प्रारूप आदि जैसे संबंधित विषयों का अध्ययन करने के लिए भी इसके साथ साथ प्रमुख अद्यायन संचालित करने के लिए एनईटीएफ़, सीआईईटी, एनआईओएस, इग्नू आईआईटी, एनआईटी आदि जैसी उपयुक्त एजेंसियों की पहचान की जाएगी। इन पायलट अध्ययनों के परिणामों को सार्वजनिक रूप से सूचित किया जाएगा और निरंतर सुधार के लिए इनका उपयोग किया जाएगा।
  • डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर: भारत के क्षेत्रफल, विविधता, जटिलता और डिवाइस अर्थबोध को हल करने के लिए शिक्षा के क्षेत्र में खुले, परस्पर, विकसित, सार्वजनिक डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर का निर्माण करने की आवश्यकता है, जिसका उपयोग कई प्लेटफार्मों और पॉइंट सॉल्यूशंस द्वारा किया जा सकता है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि प्रौद्योगिकी आधारित समाधान प्रौद्योगिकी में तेजी से प्रगति के साथ पुराने न हो जाएं।
  • ऑनलाइन शिक्षण मंच और उपकरण: शिक्षार्थियों की प्रगति की निगरानी के लिए शिक्षको को सहायक उपकरण के एक संरचित, उपयोगकर्ता अनुकूल, विकसित सेट प्रदान करने के लिए स्वयम, दीक्षा जैसे उपयुक्त मौजूदा ई-लर्निंग प्लेटफ़ॉर्म का विस्तार किया जाएगा। वर्तमान महामारी ने स्पष्ट कर दिया है कि ऑनलाइन कक्षाओं के आयोजन के लिए दो-तरफ़ा वीडियो और दो-तरफ़ा-ऑडियो इंटरफ़ेस जैसे उपकरण एक वास्तविक आवश्यकता है।
  • सामग्री निर्माण, डिजिटल रिपॉजिटरी और प्रसार: कोर्स वर्क, लर्निंग गेम्म और सिमुलेशन, ऑगमेंटेड रियलिटी और वर्चुअल रियलिटी के निर्माण सहित कंटेन्ट की एक डिजिटल रिपोजिटरी विकसित की जाएगी, जिसमें प्रभावशीलता और गुणवत्ता के लिए उपयोगकर्ताओं द्वारा रेटिंग करने के लिए एक स्पष्ट सार्वजनिक प्रणाली होगी। छात्रों के लिए मनोरंजन आधारित अधिगम हेतु उपयुक्त उपकरण जैसे ऐप, स्पष्ट संचालन निर्देश के साथ कई भाषाओं में भारतीय कला और संस्कृति का एकीकरण आदि भी बनाए जाएंगे। । छात्रों को ई-सामग्री का प्रसार करने के लिए एक विश्वसनीय बैकअप तंत्र प्रदान किया जाएगा।
  • डिजिटल अंतर को कम करना: इस तथ्य को देखते हुए कि अभी भी जनसंख्या का एक बड़ा हिस्सा ऐसा है, जिसकी डिजिटल पहुँच अत्यधिक सीमित है, मौजूदा जनसंचार माध्यम जैसे टेलीविज़न, रेडियो और सामुदायिक रेडियो का उपयोग टेलीकास्ट और प्रसारण के लिए बड़े पैमाने पर किया जाएगा। इस तरह के शैक्षिक कार्यक्रमों को छात्रों की बदलती आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए विभिन्न भाषाओं में 24/7 उपलब्ध कराया जाएगा। सभी भारतीय भाषाओं में सामग्री पर विशेष ध्यान दिया जाएगा और इस पर विशेष बल दिया जाएगा कि जहाँ तक संभव हो, शिक्षकों और छात्रों तक डिजिटल सामग्री उनकी सीखने की भाषा में पहुंचे ।
  • वर्चुअल लैब्स: वर्चुअल लैब बनाने के लिए दीक्षा, स्वयम और स्वयमप्रभा जैसे मौजूदा ई-लर्निंग प्लेटफ़ॉर्म का उपयोग किया जाएगा ताकि सभी छात्रों को गुणवत्ता पूर्ण व्यावहारिक और प्रयोग- आधारित अनुभव का समान अवसर प्राप्त हो। एसईडीजी छात्रों और शिक्षकों को पहले से लोड की गई सामग्री वाले टैबलेट जैसे उपयुक्त डिजिटल उपकरण पर्याप्त रूप से देने की संभावना पर विचार किया जाएगा और उन्हें विकसित किया जाएगा।
  • शिक्षकों के लिए प्रशिक्षण और प्रोत्साहन: शिक्षको को शिक्षार्थी-केंद्रित अध्यापन में गहन प्रशिक्षण दिया जाएगा और यह भी बताया जाएगा कि वे ऑनलाइन शिक्षण प्लेटफार्मों और उपकरणों का उपयोग करके उच्चतर गुणवत्ता वाली ऑनलाइन सामग्री का स्वयं सृजन करेंगे। ई-सामग्री के साथ साथ छात्रों में आपसी सहयोग स्थापित करने के लिए शिक्षक की भूमिका पर जोर दिया जाएगा।
  • ऑनलाइन मूल्यांकन और परीक्षाएं: उपयुक्त निकाय, जैसे कि प्रस्तावित राष्ट्रीय मूल्यांकन केंद्र अथवा 'परख', स्कूल बोर्ड, एनटीए, और अन्य चिह्नित निकाय मूल्यांकन रूपरेखाओं का निर्धारण करेंगे और कार्याच्वित करेंगे, जिसमें दक्षताओं, पोर्टफोलियो, रुब्रिक्स, मानकीकृत मूल्यांकन और मूल्यांकन विश्लेषण के डिजाइन शामिल होंगे। 21 वीं सदी के कौशल पर ध्यान केंद्रित करते हुए शिक्षा प्रौद्योगिकियों का उपयोग कर मूल्यांकन के नए तरीकों का अध्ययन किया जाएगा।
  • सीखने के मिश्रित मॉडल: डिजिटल शिक्षा व शिक्षण को बढ़ावा देने के साथ ही, परंपरागत व्यक्तिगत रूप से आमने-सामने सीखने के महत्व को भी पूरी तरह से स्वीकार किया जाता है। तदनुसार, विभिन्न विषयों के लिए सीखने के विभिन्न मिश्रित प्रभावी मॉडल, उपयुक्त प्रतिकृति के लिए चिह्नित किए जाएंगे।
  • मानकों को पूरा करना: जैसे जैसे ऑनलाइन / डिजिटल शिक्षा पर शोध सामने आ रहे हैं, एनईटीएफ़ और अन्य उपयुक्त निकाय ऑनलाइन / डिजिटल शिक्षण-शिक्षण के लिए सामग्री, प्रौद्योगिकी और शिक्षाशास्त्र के मानक स्थापित करेंगे। ये मानक राज्यों, बोर्डो, स्कूलों और स्कूल परिसरों, उच्चतर शिक्षण संस्थानों, आदि द्वारा ई-लर्निंग के लिए दिशानिर्देश तैयार करने में मदद करेंगे।
24.5 विश्व स्तरीय डिजिटल इनफ्रास्ट्क्चर, शैक्षिक डिजिटल कंटैंट सामग्री और क्षमता का निर्माण करने के लिए एक समर्पित इकाई का सृजन - शिक्षा में प्रौद्योगिकी कोई गंतव्य न होकर एक यात्रा के समान है और नीतिगत उद्देश्यों को लागू करने के लिए विभिन्न पारिस्थितिक तंत्र के खिलाड़ियों को तैयार करने हेतु क्षमता की आवश्यकता होगी। स्कूल और उच्चतर शिक्षा दोनों की ई-शिक्षा आवश्यकताओं पर ध्यान देने के लिए मंत्रालय में डिजिटल बुनियादी ढांचे, डिजिटल सामग्री और क्षमता निर्माण की व्यवस्था करने के उद्देश्य के लिए एक समर्पित इकाई की स्थापना की जाएगी। चूंकि प्रौद्योगिकी तेजी से विकसित हो रही है, और उच्चतर गुणवत्ता वाले ई-लर्निंग को वितरित करने के लिए विशेषज्ञों की आवश्यकता है, इसलिए एक जीवंत पारिस्थितिकी तंत्र को ऐसे समाधान के लिए प्रोत्साहित किया जाना है जो न केवल भारत के आकार, विविधता, इक्तिटी की चुनौतियों को हल करें, बल्कि तेजी से हो रहे प्रौद्योगीकीय बदलावों को ध्यान में रखते हुए विकसित किए जाए, जिसका कुछ भाग प्रत्येक बीतने वाले वर्ष के साथ पुराना होता जाता है। अत: इस केंद्र में प्रशासन, शिक्षा, शैक्षिक प्रौद्योगिकी, डिजिटल शिक्षाशास्त्र और मूल्यांकन, ई-गवर्नेंस, आदि के क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ शामिल होंगे।

Related Posts

0 Response to "ऑनलाइन और डिजिटल शिक्षा "

Post a Comment

Please leave your valuable comments here.

Iklan Bawah Artikel