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शिक्षक : कार्य-संस्कृति, व्यावसायिक विकास और मानक

सेवाकाल के दौरान कार्य-संस्कृति और वातावरण

5.8 स्कूलों के काम के वातावरण और संस्कृतियों में आमूल-चूल परिवर्तन करने का प्राथमिक लक्ष्य शिक्षकों की क्षमताओं को अधिकतम स्तर तक बढ़ाना होगा ताकि वे अपना काम प्रभावी ढंग से कर सकें और यह सुनिश्चित हो सके कि वे शिक्षकों, छात्रों, अभिभावकों, प्रधानाध्यापकों और अन्य सहायक कर्मचारियों के एक समावेशी समुदाय का हिस्सा बन सकें; जिनका एक कॉमन लक्ष्य यह सुनिश्चित करना होगा कि सभी बच्चे सीख रहे हैं।

5.9 इस दिशा में पहली आवश्यकता स्कूलों में सभ्य और सुखद कार्य-स्थिति सुनिश्चित करने की होगी। यह सुनिश्चित करने के लिए स्कूलों में पर्याप्त और सुरक्षित भौतिक संसाधन, शौचालय, स्वच्छ पेयजल, सीखने के लिए स्वच्छ और आकर्षक स्थान, बिजली, कंप्यूटिंग उपकरण, इंटरनेट, पुस्तकालय और खेल और मनोरंजन के साधन मुहैया करवाने होंगे ताकि स्कूलों के शिक्षक और छात्र, सभी जेंडर के छात्रों और दिव्यांग बच्चों सहित, एक सुरक्षित, समावेशी और प्रभावी शिक्षण वातावरण प्राप्त कर सकें और उनके स्कूलों में पढ़ाने और सीखने के लिए सुविधाजनक और प्रेरित महसूस करें। सेवाकालीन प्रशिक्षण में स्कूलों में कार्यस्थल पर सुरक्षा, स्वास्थ्य और पर्यावरण पर इनपुट होंगे ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सभी शिक्षक इन आवश्यकताओं के प्रति संवेदनशील हों।

5.10 प्रभावशाली स्कूली प्रशासन, संसाधनों की साझेदारी और समुदाय के निर्माण के लिए राज्य/संघ राज्य क्षेत्र की सरकारें स्कूल कॉम्प्लेक्स या स्कूलों के वैज्ञानीकरण, स्कूलों तक पहुँच को कम किए बिना, जैसे उन्नतिशील प्रारूप अपना सकती हैं। उदाहरण के लिए, स्कूल कॉम्प्लेक्सों का निर्माण जीवंत शिक्षक समुदायों के निर्माण की दिशा में एक लंबा रास्ता तय कर सकता है। स्कूल परिसरों में शिक्षकों को काम पर रखने से विद्यालय परिसर में स्कूलों के बीच संबंध स्वतः बन सकते हैं; यह शिक्षकों के उत्कृष्ट विषय-वार वितरण को सुनिश्चित करने में भी मदद करेगा, जिससे एक अधिक जीवंत शिक्षक-ज्ञान का आधार बनेगा। बहुत छोटे स्कूलों में शिक्षक अब अलग-थलग नहीं रहेंगे और बड़े स्कूल कॉम्प्लेक्स समुदायों के साथ काम कर सकते हैं और सर्वोत्तम व्यवहारों को एक-दूसरे के साथ साझा कर सकते हैं और सामूहिक रूप से और सहयोगी रूप से यह सुनिश्चित करने के लिए काम करेंगे कि सभी बच्चे सीख रहे हैं। शिक्षकों को आगे बढ़ाने और सीखने के लिए प्रभावी सामुदायिक वातावरण बनाने में मदद करने के लिए स्कूल कॉम्प्लेक्स परामर्शदाताओं, प्रशिक्षित सामाजिक कार्यकर्ताओं, तकनीकी और रखरखाव कर्मचारियों आदि को भी साझा कर सकते हैं।

5.11 अभिभावकों और अन्य प्रमुख स्थानीय हित-धारकों के साथ सहयोग से शिक्षक भी स्कूल और स्कूल कॉम्प्लेक्स के प्रशासन में स्कूल प्रबंधन समिति/स्कूल कॉम्पलैक्स प्रबंधन समिति के सदस्य के रूप में अधिक शामिल होंगे।

5.12 शिक्षकों का ज़्यादातर समय गैर-शिक्षण गतिविधियां करने में व्यतीत होने से रोकने के लिए शिक्षक को ऐसे कार्य जो शिक्षण से सीधे सबन्धित नही है उनको करने की अनुमति नही होगी। विशेष रूप से शिक्षकों को जटिल प्रशासनिक कार्य, मध्याह् भोजन से संबंधित कार्य के लिए तर्कसंगत न्यूनतम समय से अधिक समय में शामिल नहीं किया जाएगा जिससे वे पूरी तरह से शिक्षण अधिगम कार्य में ध्यान दे सकेंगे।

5.13 यह सुनिश्चित करने के लिए कि स्कूल में सीखने के लिए सकारात्मक वातावरण हो, प्रधानाचार्यों और शिक्षकों की अपेक्षित भूमिका में यह स्पष्ट रूप से शामिल होगा कि वे अपने स्कूलों में प्रभावी अधिगम और सभी हितधारकों के लाभार्थ एक संवेदनशील और समावेशी संस्कृति का निर्माण करें।

5.14 शिक्षकों को पाठ्यक्रम और शिक्षण के उन पहलुओं को चयनित करने के लिए ज्यादा स्वायत्तता दी जाएगी, जिससे वे उन तरीकों से पढ़ा सकें जो उनकी कक्षाओं और समुदाय के विद्यार्थियों के लिए अधिक प्रभावी हों। शिक्षक सामाजिक-भावनात्मक पक्षों पर भी ध्यान देंगे जो कि विद्यार्थी के सर्वागीण विकास की दृष्टि से नितांत आवश्यक पक्ष है। शिक्षकों को ऐसी शिक्षण विधि अपनाने के लिए सम्मानित किया जाएगा जिससे कक्षा में विद्यार्थियों के सीखने के प्रतिफल में वृद्धि हो।

सतत व्यावसायिक विकास (सीपीडी)

5.15 शिक्षक को खुद में सुधार करने के लिए और पेशे से संबंधित आधुनिक विचार और नवाचार को सीखने के लिए सतत अवसर दिये जाएंगे। इन्हें स्थानीय, क्षेत्रीय, राज्य, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कार्यशालाओं के साथ-साथ ऑनलाइन शिक्षक विकास मॉड्यूल के रूप में कई तरीकों में पेश किया जाएगा। प्लेटफ़ॉर्म (विशेष रूप से ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म, विकसित किए जाएंगे ताकि शिक्षक विचारों और सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा कर सकें। प्रत्येक शिक्षक से अपेक्षित होगा कि वे स्वयं के व्यावसायिक विकास के लिए स्वेच्छा से प्रत्येक वर्ष लगभग 50 घंटों के सीपीडी कार्यक्रम में हिस्सा लें। सीपीडी के अवसरों में विशेष रूप से बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान के नवीनतम शिक्षणशास्त्र, अधिगम परिणामों के रचनात्मक और अनुकूल आकलन, योग्यता आधारित अधिगम और संबंधित शिक्षणशास्त्र जैसे अनुभवात्मक शिक्षण, कला-एकीकृत, खेल-एकीकृत, और कहानी-आधारित दृष्टिकोण, आदि को क्रमबद्ध रूप में सम्मिलित किया जाएगा।

5.16. स्कूल के प्रधानाचार्य और स्कूल कॉम्प्लेक्स के प्रमुखों के लिए अपने लीडरशिप और मैनेजमेंट कौशल को लगातार विकसित करने के लिए एक समान मॉड्यूलर लीडरशिप/मैनेजमेंट कार्यशालाएँ और ऑनलाइन विकास के अवसर होंगे ताकि वे अपनी सर्वोत्तम प्रैक्टिस को एक दूसरे के साथ साझा कर सकें। इन संस्था प्रमुखों से भी यह अपेक्षित है कि वे भी प्रति वर्ष 50 घंटो के सीपीडी कार्यक्रम में भाग लेंगे। इसमें योग्यता और परिणाम-आधारित शिक्षा के आधार पर शैक्षणिक योजनाओं को तैयार करने और लागू करने को केंद्रित करते हुए लीडरशिप और मैनेजमेंट के साथ-साथ विषयवस्तु और शिक्षण शास्त्र संबंधी कार्यक्रम शामिल होंगे।

करियर मैनेजमेंट और प्रगति (सीएमपी)

5.17 उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे शिक्षकों की पहचान की जानी चाहिए और उन्हें पदोन्नति और वेतन वृद्धि दी जानी चाहिए जिससे कि सभी शिक्षकों को अपना बेहतरीन कार्य करने के लिए प्रोत्साहन मिले। अतः एक सशक्त मेरिट आधारित कार्यकाल, पदोन्नति, और वेतन व्यवस्था का निर्माण किया जाएगा जिसमें शिक्षकों का प्रत्येक स्तर बहुस्तरीय होगा जिससे बेहतरीन शिक्षकों को प्रोत्साहन और पहचान मिलेगी। शिक्षकों के प्रदर्शन के सही आकलन के लिए राज्य/ केंद्र शासित प्रदेशों की सरकार द्वारा मल्टीपल पैरामीटर्स की एक व्यवस्था को स्थापित किया जाएगा जो सहकर्मियों द्वारा की गयी समीक्षा, उपस्थिति, समर्पण, सीपीडी के घंटे और स्कूल और समुदाय में की गयी अन्य सेवा या पैरा 5.20 में दिए गए एनपीएसटी पर आधारित है। इस नीति में, कैरियर के संदर्भ में 'कार्यकाल' से आशय प्रदर्शन और योगदान के आकलन के बाद स्थायी रोजगार से है जबकि “कार्यकाल ट्रैक' से आशय स्थायी होने से पूर्व परिवीक्षा अवधि से है।

5.18 इसके अलावा, यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कैरियर की वृद्धि (कार्यकाल, पदोन्नति, वेतन वृद्धि, आदि के संदर्भ में) एक एकल स्कूल चरण (यानी, मूलभूत, प्रारंभिक, मिडिल या माध्यमिक) के भीतर शिक्षकों के लिए उपलब्ध है, और प्रारंभिक अवस्था से बाद के चरणों में शिक्षकों के लिए या इसके विपरीत (हालांकि चरणों में इस तरह के कैरियर संबंधी कदम उठाने की अनुमति होगी, बशर्ते शिक्षक के पास इस तरह के कदम उठाने की इच्छा और योग्यता हो) कैरियर की प्रगति से संबंधित कोई प्रोत्साहन नहीं है। यह इस तथ्य का समर्थन करने के लिए है कि स्कूली शिक्षा के सभी चरणों में उच्चतम-गुणवत्ता वाले शिक्षकों की आवश्यकता होगी, और किसी भी चरण को किसी अन्य की तुलना में अधिक महत्वपूर्ण नहीं माना जाएगा।

5.19. योग्यता के आधार पर शिक्षकों की वर्टिकल मोबिलिटी भी सर्वश्रेष्ठ होगी; उत्कृष्ट शिक्षक जिन्होंने लीडरशिप और मैनेजमेंट के कौशलों को दर्शाया होगा, उनको समय के साथ प्रशिक्षित किया जाएगा जिससे वे आगे चलकर स्कूल, स्कूल कॉम्प्लेक्स, बीआरसी, सीआरसी, बीआईटीई, डीआईईटी के साथ-साथ संबंधित सरकारी विभाग और मंत्रालय में अकादमिक नेतृत्व कर सकेंगे।

शिक्षकों के लिए व्यावसायिक मानक

5.20 राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद द्वारा एनसीईआरटी, एससीईआरटी, सभी स्तर और क्षेत्रों के शिक्षक, शिक्षक की तैयारी और विकास हेतु संस्थानों और उच्चतर शिक्षण संस्थानों के साथ परामर्श से सामान्य मानक परिषद (जीईसी) के तहत व्यावसायिक मानक सेटिंग बॉडी (पीएसएसबी) के रूप में पुनर्गठित अपने नए स्वरूप में शिक्षकों के लिए राष्ट्रीय व्यावसायिक मानकों (एनपीएसटी) का एक सामान्य मार्गदर्शक सेट 2022 तक विकसित किया जाएगा।मानकों में विशेषज्ञता / रैंक के विभिन्न स्तरों पर शिक्षक की भूमिका और उस रैंक के लिए आवश्यक दक्षताओं की अपेक्षाओं को शामिल किया जाएगा। इसमें प्रत्येक रैंक में किये गए प्रदर्शन के मूल्यांकन के लिए मानक भी शामिल होंगे, जो कि समय-समय पर किए जायेंगे। एनपीएसटी सेवा पूर्व शिक्षक शिक्षा कार्यक्रमों के डिजाइन को भी सूचित करेगा। तब जाकर इसे राज्य द्वारा अपनाया जा सकता है और इन मानकों के आधार पर शिक्षकों का कैरियर मैनेजमेंट होगा जिसमें कार्यकाल, व्यावसायिक विकास के प्रयास, वेतन वृद्धि, पदोन्नति, और अन्य पहचान शामिल
होंगे। कार्यकाल अवधि या वरिष्ठता के बजाय सिर्फ निर्धारित मानकों के आधार पर पदोन्नति और वेतन में वृद्धि होगी। 2030 में राष्ट्रीय स्तर पर व्यावसायिक मानकों की समीक्षा और संशोधन किया जाएगा और उसके बाद हर दस वर्षो में व्यवस्था की गुणवत्ता का सख्त आनुभविक विश्लेषण किया जाएगा।

विशिष्ट शिक्षक

5.21 स्कूल शिक्षा के कुछ क्षेत्रों में अतिरिक्त विशिष्ट शिक्षकों की अति आवश्यकता है। इन विशिष्ट आवश्यकताओं के कुछ उदाहरणों में मिडिल और माध्यमिक स्तर में विकलांग/दिव्यांग बच्चों, ऐसे छात्रों सहित जिन्हें सीखने में कठिनाई (लर्निंग डिसेबिलिटी) होती है, के शिक्षण हेतु विषयों का शिक्षण शामिल हैं। इन शिक्षकों को सिर्फ विषय-शिक्षण ज्ञान और विषय संबंधित शिक्षण के उद्देश्यों की समझ ही नहीं, बल्कि विद्यार्थियों की विशेष आवश्यकताओं को समझने के लिए उपयुक्त कौशल भी होने चाहिए। इसलिए इन क्षेत्रों में विषय शिक्षकों और सामान्य शिक्षकों को उनके शुरूआती दौर में या फिर सेवा पूर्व शिक्षक की तैयारी होने के बाद द्वितीयक विशेषज्ञता विकसित की जा सकती है। इसके लिए शिक्षकों को सेवाकालीन और पूर्व-सेवाकालीन मोड में, पूर्णकालिक या अंशकालिक / मिश्रित कोर्स बहुविषयक महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में उपलब्ध कराये जायेंगे। योग्य विशेष शिक्षकों, जो विषय शिक्षण को भी संभाल सकते हों, की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए एनसीटीई और आरसीआई के पाठ्यक्रम के बीच व्यापक तालमेल को सक्षम किया जाएगा।

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