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नवीन राष्ट्रीय अनुसंधान फाउण्डेशन के माध्यम से गुणवत्तायुक्त अकादेमिक अनुसंधान

नवीन राष्ट्रीय अनुसंधान फाउण्डेशन के माध्यम से सभी क्षेत्रों में गुणवत्तायुक्त अकादेमिक अनुसंधान को उत्प्रेरित करना

17.1 एक बड़ी और जीवंत अर्थव्यवस्था को विकसित करने और बनाए रखने में ज्ञान सृजन और अनुसंधान की महत्वपूर्ण भूमिका होती है जिससे समाज का उत्थान होता है और लगातार राष्ट्र को और भी अधिक ऊंचाइयों तक ले जाने में इससे प्रेरणा मिलती है । नि:संदेह, पूरे इतिहास में सबसे समृद्ध सभ्यताओं (जैसे भारत, मेसोपोटामिया, मिस्र, चीन और ग्रीस) से लेकर आधुनिक सभ्यताओं (जैसे संयुक्त राज्य अमेरिका, जर्मनी, इजरायल, दक्षिण कोरिया और जापान) तक, ऐसे समाज थे और हैं जिन्होंने अपनी बौद्धिक और भौतिक संपदा को मुख्यतः नए ज्ञान के लिए प्रख्यात एवं आधारभूत योगदान द्वारा प्राप्त किया है- जैसे विज्ञान के साथ-साथ कला, भाषा और संस्कृति के क्षेत्र में जिसने न केवल अपनी सभ्यताओं को बल्कि दुनियाभर की सभ्यताओं को परिष्कृत और उन्नत बनाया है।

17.2 अनुसंधान का एक मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र आज दुनिया में तेजी से होने वाले परिवर्तनों के साथ शायद पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। उदाहरण के लिए, जलवायु परिवर्तन, जनसांख्यिकी गतिशीलता और प्रबंधन, जैव प्रौद्योगिकी, एक डिजिटल बाजार का विस्तार, मशीन लर्निंग और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आदि, इस तरह के परिवर्तन है। यदि भारत को इन विषय क्षेत्रों में एक नेतृत्वकर्ता बनना है और वास्तव में अपने विशाल प्रतिभा पूल को फिर से एक प्रमुख ज्ञान समाज बनने की क्षमता प्राप्त कराना है तो आने वाले वर्षों और दशकों में, राष्ट्र को अपनी अनुसंधान क्षमताओं--संभावनाओं को सभी विषयों (डिसिप्लेन) में उत्पादन के साथ एक महत्वपूर्ण विस्तार की आवश्यकता होगी। आज, किसी भी राष्ट्र के आर्थिक, बौद्धिक, सामाजिक, पर्यावरणीय और प्रौद्योगीकीय विकास के लिए शोध का महत्व पहले से कई अधिक है।

17.3 इस पक्ष के इतना महत्वपूर्ण होने के बावजूद, भारत में वर्तमान समय में अनुसंधान और नवाचार निवेश संयुक्त राज्य अमेरिका में 2.8%, इज़राइल में 4.3% और दक्षिण कोरिया में 4.2% की तुलना में जीडीपी का केवल 0.69% है।

17.4 आज भारत को सामाजिक चुनौतियों का समाधान करने की आवश्यकता है, जैसे कि अपने सभी नागरिकों के लिए पीने के पानी की स्वच्छता, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा, बेहतर परिवहन-गुणवत्ता वायु, बिजली और बुनियादी चीजों की पहुँच आदि। इसके लिए एक व्यापक दृष्टिकोण और समाधानात्मक रवैये और क्रियान्वयन की जरूरत होगी जो न केवल शीर्ष-विज्ञान और प्रौद्योगिकी पर आधारित हों बल्कि सामाजिक विज्ञान और मानविकी तथा राष्ट्र के विभिन्न सामाजिक-सांस्कृतिक और पर्यावरणीय आयामों की गहरी समझ पर भी आधारित हों। इन चुनौतियों का सामना करने और इनके समाधान खोजने के लिए विभिन्न क्षेत्रों में उच्चतर स्तरीय अंतर-विषयक अनुसंधान करने की स्वयं की क्षमता का होना महत्वपूर्ण होगा। स्वयं के शोध करने की क्षमता किसी देश को अत्यधिक आसानी से अन्य देशों से अनुसंधानों को आयात करने और उनमें से अनुकूल शोध को अपनाने के योग्य बनता है ।

17.5 इसके अतिरिक्त, सामाजिक समस्याओं के हल निकालने के लिहाज़ से मूल्यवान होने के साथ-साथ, किसी देश की पहचान, उसकी प्रगति, आध्यात्मिक और बौद्धिक संतुष्टि और रचनात्मकता को भी उसके इतिहास, भाषा, कला और संस्कृति के माध्यम से प्राप्त किया जा सकता है। इसीलिए विज्ञान और सामाजिक विज्ञान के क्षेत्र में नवाचारों के साथ -साथ कला और मानविकी के क्षेत्रों में अनुसंधान किसी देश की प्रगति और प्रबुद्धता हेतु अति महत्वपूर्ण है।

17.6 भारत में शिक्षा संस्थानों में अनुसंधान और नवाचार, बहुत महत्वपूर्ण है, विशेष रूप से जो उच्चतर शिक्षा से जुड़े हुए हैं। पूरे इतिहास में दुनिया के सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालयों से मिलने वाले साक्ष्यों से पता चलता है कि उच्चतर शिक्षा के स्तर पर सर्वोत्तम शिक्षण और सीखने की प्रक्रियाएं उस वातावरण में होती हैं जहाँ अनुसंधान और ज्ञान सृजन की एक मजबूत संस्कृति रही है; इसके साथ ही, दुनिया के श्रेष्ठ अनुसंधान बहु-विषयी विश्वविद्यालयों में हुए हैं।

17.7 भारत में विज्ञान और गणित से लेकर कला, साहित्य, स्वर विज्ञान और भाषा से लेकर चिकित्सा और कृषि तक के विषयों में अनुसंधान और ज्ञान सृजन की एक लंबी ऐतिहासिक परंपरा रही है। अब समय की मांग है कि भारत जल्द से जल्द एक मजबूत और प्रबुद्ध ज्ञान-समाज के रूप में अपनी खोयी हुई स्थिति को शीघ्र ही पुनः प्राप्त करे और मज़बूत और प्रबुद्ध ज्ञान समाज तथा दुनिया की तीन सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक के रूप में 21 वीं सदी में अनुसंधान और नवाचार का नेतृत्व करने के लिए तैयार रहे।

17.8 अत: यह नीति भारत में अनुसंधान की गुणवत्ता और उनकी मात्रा को बदलने के लिए एक व्यापक दृष्टिकोण को लागू करती है । नीति में स्कूली शिक्षा में निश्चित बदलाव शामिल हैं जैसे सीखने की खोज और खोज-आधारित शैली, वैज्ञानिक पद्धति और तार्किक चिंतन पर बल इनमें शामिल है। छात्र हितों और प्रतिभाओं की पहचान करने के लिए स्कूलों में करियर परामर्श, उच्चतर शिक्षा का संस्थागत पुनर्गठन जो विश्वविद्यालयों में अनुसंधान को बढ़ावा दें, सभी उच्चतर शिक्षण संस्थानों में बहु-विषयी और समग्र शिक्षा पर बल, स्नातक पाठ्यक्रम में अनुसंधान और इंटर्नशिप का समावेश, संकाय कैरियर प्रबंधन प्रणाली जो अनुसंधान पर समुचित बल दे, प्रशासनिक और विनियामक परिवर्तन जो शिक्षकों की और संस्थागत स्वायत्तता और नवाचार को प्रोत्साहित करने वाले हों । ऊपर बताए सभी पहलू देश में एक शोध मानसिकता को मजबूत करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं ।

17.9 इन विभिन्न तत्वों पर सहक्रियात्मक तरीके से कार्य करने के लिए यह नीति एक राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (एनआरएफ) की स्थापना को प्रस्तावित करती है जिससे राष्ट्र में गुणवत्तायुक्त अनुसंधान को सही रूप में विकसित और उत्प्रेरित किया जा सके। एनआरएफ का व्यापक लक्ष्य हमारे विश्वविद्यालयों के माध्यम से शोध की संस्कृति को सक्षम बनाना होगा । विशेष रूप से, एनआरएफ योग्यता -आधारित एवं पियर रिव्यु पर आधारित शोध निधि का एक विश्वसनीय आधार प्रदान करेगा, जो उत्कृष्ट शोध के लिए उपयुक्त प्रोत्साहन के माध्यम से देश में अनुसंधान की संस्कृति विकसित करने में मदद करेगा । राज्य विश्वविद्यालयों और अन्य सार्वजनिक संस्थानों में अनुसंधान को स्थापित करने साथ इन्हें विकसित करने का कार्य करेगा जहाँ अनुसंधान संभावनाएं वर्तमान में सीमित ह। एनआरएफ प्रतिस्पर्धात्मक रूप से सभी बहु-विषयकों में अनुसंधान को फंड देगा। सफल अनुसंधानों को मान्यता दी जाएगी और प्रासंगिक सरकारी एजेंसियों के साथ-साथ उद्योग और निजी / परोपकारी संगठनों के साथ घनिष्ठ संबंधों के माध्यम से इसे कार्यान्वित किया जाएगा ।

17.10 ऐसे संस्थान जो वर्तमान में किसी स्तर पर अनुसंधान को निधि प्रदान करते हैं, जैसे विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी), परमाणु ऊर्जा विभाग (डीएई), जैव-प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी), भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर), भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर), भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद (आईसीएचआर) और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के साथ-साथ विभिन्न निजी और परोपकारी संगठनों से वे अपनी प्राथमिकताओं और आवश्यकताओं के अनुसार स्वतंत्र रूप से निधिगत अनुसंधान जारी रखेंगे। हालांकि, एनआरएफ सघन रूप से अन्य फंडिंग एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित करेगा और विज्ञान, इंजीनियरिंग, और अन्य सक्षम अकादेमियों के साथ काम करेगा। इसके साथ ही इससे जुड़े अपेक्षित उद्देश्यों और प्रयासों में तालमेल और दोहराव की कमी को सुनिश्चित करने का प्रयास करेगा। एनआरएफ स्वतंत्र रूप से सरकार के एक रोटेटिंग बोर्ड ऑफ़ गवर्नर्स द्वारा शासित होगा, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों के बहुत ही बेहतरीन शोधकर्ता और आविष्कर्ता शामिल होंगे।

17.11 एनआरएफ की प्राथमिक गतिविधियां इस प्रकार रहेंगी :
  • सभी प्रकार के और विभिन्न विषयों में, प्रतिस्पर्धी और पियर रिव्यु किए गए शोध प्रस्तावों के लिए फंड देना
  • शिक्षा संस्थानों में विशेषतः विश्वविद्यालयों में और महाविद्यालयों में जहाँ अभी अनुसंधान शैशवावस्था में हैं, इन संस्थानों को परामर्श प्रदान करके अनुसंधान शुरू करना, विकसित करना और उसके लिए सुविधा देना
  • शोधार्थियों और सरकार की संबंधित शाखाओं तथा उद्योगों के बीच संपर्क बनाने एवं समन्वयन का काम करना, जिससे शोधार्थियों को लगातार अति तात्कालिक राष्ट्रीय अनुसंधान मुद्दों के बारे में बताया जा सके और जिससे नीति निर्माता भी अनुसंधान के क्षेत्र में नवीनतम सफलताओं के प्रति जागरूक रहें। इससे इन सफलताओं को सर्वश्रेष्ठ तरीके से नीति और/अथवा उसके क्रियान्वयन में दर्ज किया जा सकेगा
  • उत्कृष्ट अनुसंधान और उनकी प्रगति को पहचानना ।

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