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स्कूली शिक्षा

Primary School Education 

राष्ट्रिय शिक्षा निति 2020 को मुख्यतः चार भागों में विस्तारित किया गया है, जिसमें पहला भाग है बच्चों की स्कूली शिक्षा में परिवर्तन। इस भाग में छोटे बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा व्यवस्था के बारे में जानकारी दी गई है। यह नीति वर्तमान की 10 + 2 वाली स्कूली व्यवस्था को 3 से 8 वर्ष के सभी बच्चों के लिए पाठ्यचर्या और शिक्षण-शास्त्रीय आधार पर 5 + 3 + 3 + 4 की एक नयी व्यवस्था में पुनर्गठित करने की बात करती है, जैसा कि यहाँ दी गयी आकृति में दिया गया है और अध्याय 4 New Education System 5+3+3+4 में भी इस पर विस्तृत विवरण दिया गया है।
राष्ट्रिय शिक्षा निति 2020  स्कूली शिक्षा प्रारूप 

वर्तमान में 3 से 6 वर्ष की उम्र के बच्चे 10 + 2 वाले ढांचे में शामिल नहीं हैं क्योंकि 6 वर्ष के बच्चों को कक्षा 1 में प्रवेश दिया जाता है। नए 5+3+3+4 ढांचे में 3 वर्ष के बच्चों को शामिल कर प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा (ईसीसीई) की एक मजबूत बुनियाद को शामिल किया गया है जिससे आगे चलकर बच्चों का विकास बेहतर हो, वे बेहतर उपलब्धियां हासिल कर सकें और खुशहाल हों।

राष्ट्रिय शिक्षा निति 2020 के स्कूली शिक्षा के भाग को  निम्नअध्यायों के द्वारा विस्तार से समझा जा सकता है :-
    1. प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा : सिखने की नींव 
    2. बुनियादी साक्षरता एवं संख्या-ज्ञान : सिखने के लिए एक तत्कालिक आवश्यकता और पूर्वशर्त 
    3. ड्रॉपआउट बच्चों की संख्या कम करना और सभी स्तरों पर शिक्षा की सार्वभौमिक पहुँच सुनिश्चित करना 
    4. स्कूलों में पाठ्यक्रम और शिक्षण-शास्त्र : अधिगम समग्र, एकीकृत, आनंदायी और रुचिकर होना चाहिए 
    5. शिक्षक 
    6. समतापूर्वक और समावेशी शिक्षा : सभी के लिए अधिगम 
    7. स्कूल कॉम्प्लेक्स/क्लस्टर के माध्यम से कुशल संसाधन और प्रभावी गवर्नेंस 
    8. स्कूली शिक्षा के लिए मानक निर्धारण और प्रत्यायन 

स्कूली शिक्षा

स्कूली शिक्षा के सभी स्तरों पर सबकी एकसमान पहुंच सुनिश्चित करना

एनईपी 2020 स्कूली शिक्षा के सभी स्तरों प्री-स्कूल से माध्यमिक स्तर तक सबके लिए एकसमान पहुंच सुनिश्चित करने पर जोर देती है। स्कूल छोड़ चुके बच्चों को फिर से मुख्य धारा में शामिल करने के लिए स्कूल के बुनियादी ढांचे का विकास औरर नवीन शिक्षा केंद्रों की स्थापनी की जाएगी। इस नई शिक्षा नीति में छात्रों और उनके सीखने के स्तर पर नज़र रखनेऔपचारिक और गैर-औपचारिक शिक्षा सहित बच्चों की पढ़ाई के लिए बहुस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध करानेपरामर्शदाताओं या प्रशिक्षित सामाजिक कार्यकर्ताओं को स्कूल के साथ जोड़नेकक्षा 3, 5 और 8 के लिए एनआईओएस और राज्य ओपन स्कूलों के माध्यम से ओपन लर्निंगकक्षा 10 और 12 के समकक्ष माध्यमिक शिक्षा कार्यक्रमव्यावसायिक पाठ्यक्रमवयस्क साक्षरता और जीवन-संवर्धन कार्यक्रम जैसे कुछ प्रस्तावित उपाय हैं। एनईपी 2020 के तहत स्कूल से दूर रह रहे लगभग 2 करोड़ बच्चों को मुख्य धारा में वापस लाया जाएगा। 👉Ensuring equal access at all levels of education

नए पाठ्यक्रम और शैक्षणिक संरचना के साथ प्रारंभिक बचपन की देखभाल और शिक्षा

बचपन की देखभाल और शिक्षा पर जोर देते स्कूल पाठ्यक्रम के 10 + 2 ढांचे की जगह 5 + 3 + 3 + 4 का नया पाठयक्रम संरचना लागू किया जाएगा जो क्रमशः 3-8, 8-11, 11-14, और 14-18  उम्र के बच्चों के लिए है। इसमें अब तक दूर रखे गए 3-6 साल के बच्चों को स्कूली पाठ्यक्रम के तहत लाने का प्रावधान हैजिसे विश्व स्तर पर बच्चे के मानसिक विकास के लिए महत्वपूर्ण चरण के रूप में मान्यता दी गई है। नई प्रणाली में तीन साल की आंगनवाड़ी प्री स्कूलिंग के साथ 12 साल की स्कूली शिक्षा होगी। 👉New Education System 5+3+3+4

एनसीईआरटी 8 ​​वर्ष की आयु तक के बच्चों के लिए प्रारंभिक बचपन देखभाल और शिक्षा (एनसीपीएफईसीसीई) के लिए एक राष्ट्रीय पाठ्यक्रम और शैक्षणिक ढांचा विकसित करेगा। एक विस्तृत और मजबूत संस्थान प्रणाली के माध्यम से प्रारंभिक बचपन देखभाल और शिक्षा (ईसीसीईमुहैया कराई जाएगी। इसमें आंगनवाडी और प्री-स्कूल भी शामिल होंगे जिसमें इसीसीई शिक्षाशास्त्र और पाठ्यक्रम में प्रशिक्षित शिक्षक और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता होंगे। इसीसीई की योजना और कार्यान्वयन मानव संसाधन विकासमहिला और बाल विकास (डब्ल्यूसीडी)स्वास्थ्य और परिवार कल्याण (एचएफडब्ल्यू),  और जनजातीय मामलों के मंत्रालयों द्वारा संयुक्त रूप से किया जाएगा। 👉Early Childhood Care and Education

बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान प्राप्त करना

बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान की प्राप्ति को सही ढंग से सीखने के लिए अत्‍यंत जरूरी एवं पहली आवश्यकता मानते हुए एनईपी 2020’ में मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एमएचआरडी) द्वारा बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान पर एक राष्ट्रीय मिशन की स्थापना किए जाने पर विशेष जोर दिया गया है। राज्‍य वर्ष 2025 तक सभी प्राथमिक स्कूलों में ग्रेड 3 तक सभी शिक्षार्थियों या विद्यार्थियों द्वारा सार्वभौमिक बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान प्राप्त कर लेने के लिए एक कार्यान्वयन योजना तैयार करेंगे। एक राष्ट्रीय पुस्तक संवर्धन नीति तैयार की जानी है। 👉Basic Literacy and Numeracy

स्कूल के पाठ्यक्रम और अध्यापन-कला में सुधार

स्कूल के पाठ्यक्रम और अध्यापन-कला का लक्ष्‍य यह होगा कि 21वीं सदी के प्रमुख कौशल या व्‍यावहारिक जानकारियों से विद्यार्थियों को लैस करके उनका समग्र विकास किया जाए और आवश्यक ज्ञान प्राप्ति एवं अपरिहार्य चिंतन को बढ़ाने व अनुभवात्मक शिक्षण पर अधिक फोकस करने के लिए पाठ्यक्रम को कम किया जाए। विद्यार्थियों को पसंदीदा विषय चुनने के लिए कई विकल्‍प दिए जाएंगे। कला एवं विज्ञान के बीचपाठ्यक्रम व पाठ्येतर गतिविधियों के बीच और व्यावसायिक एवं शैक्षणिक विषयों के बीच सख्‍त रूप में कोई भिन्‍नता नहीं होगी। स्कूलों में छठे ग्रेड से ही व्यावसायिक शिक्षा शुरू हो जाएगी और इसमें इंटर्नशिप शामिल होगी। एक नई एवं व्यापक स्कूली शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यक्रम रूपरेखा  एनसीएफएसई 2020-21’ एनसीईआरटी द्वारा विकसित की जाएगी।  👉 New Course Outline

बहुभाषावाद और भाषा की ताकत

नीति में कम से कम ग्रेड 5 तकअच्‍छा हो कि ग्रेड 8 तक और उससे आगे भी मातृभाषा/स्थानीय भाषा/क्षेत्रीय भाषा को ही शिक्षा का माध्यम रखने पर विशेष जोर दिया गया है। विद्यार्थियों को स्कूल के सभी स्तरों और उच्च शिक्षा में संस्कृत को एक विकल्प के रूप में चुनने का अवसर दिया जाएगा। त्रि-भाषा फॉर्मूले में भी यह विकल्‍प शामिल होगा। किसी भी विद्यार्थी पर कोई भी भाषा नहीं थोपी जाएगी। भारत की अन्य पारंपरिक भाषाएं और साहित्य भी विकल्प के रूप में उपलब्ध होंगे। विद्यार्थियों को एक भारत श्रेष्ठ भारत’ पहल के तहत 6-8 ग्रेड के दौरान किसी समय भारत की भाषाओं’ पर एक आनंददायक परियोजना/गतिविधि में भाग लेना होगा। कई विदेशी भाषाओं को भी माध्यमिक शिक्षा स्तर पर एक विकल्‍प के रूप में चुना जा सकेगा। भारतीय संकेत भाषा यानी साइन लैंग्वेज (आईएसएल) को देश भर में मानकीकृत किया जाएगा और बधिर विद्यार्थियों द्वारा उपयोग किए जाने के लिए राष्ट्रीय एवं राज्य स्‍तरीय पाठ्यक्रम सामग्री विकसित की जाएंगी। 👉Multilingualism and Power of Language

आकलन में सुधार

एनईपी 2020’ में योगात्मक आकलन के बजाय नियमित एवं रचनात्‍मक आकलन को अपनाने की परिकल्पना की गई हैजो अपेक्षाकृत अधिक योग्यता-आधारित हैसीखने के साथ-साथ अपना विकास करने को बढ़ावा देता हैऔर उच्चस्‍तरीय कौशल जैसे कि विश्लेषण क्षमताआवश्‍यक चिंतन-मनन करने की क्षमता और वैचारिक स्पष्टता का आकलन करता है। सभी विद्यार्थी ग्रेड 3, 5 और 8 में स्कूली परीक्षाएं देंगेजो उपयुक्त प्राधिकरण द्वारा संचालित की जाएंगी। ग्रेड 10 एवं 12 के लिए बोर्ड परीक्षाएं जारी रखी जाएंगीलेकिन समग्र विकास करने के लक्ष्‍य को ध्‍यान में रखते हुए इन्‍हें नया स्वरूप दिया जाएगा। एक नया राष्ट्रीय आकलन केंद्र परख (समग्र विकास के लिए कार्य-प्रदर्शन आकलनसमीक्षा और ज्ञान का विश्लेषण) एक मानक-निर्धारक निकाय के रूप में स्थापित किया जाएगा। 👉Change in Outcome Assessment

समान और समावेशी शिक्षा

एनईपी 2020’ का लक्ष्‍य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी बच्चा अपने जन्म या पृष्ठभूमि से जुड़ी परिस्थितियों के कारण ज्ञान प्राप्ति या सीखने और उत्कृष्टता प्राप्त करने के किसी भी अवसर से वंचित नहीं रह जाए। इसके तहत विशेष जोर सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से वंचित समूहों (एसईडीजी) पर रहेगा जिनमें बालक-बालिकासामाजिक-सांस्कृतिक और भौगोलिक संबंधी विशिष्‍ट पहचान एवं दिव्‍यांगता शामिल हैं। इसमें बुनियादी सुविधाओं से वंचित क्षेत्रों एवं समूहों के लिए बालक-बालिका समावेशी कोष और विशेष शिक्षा जोन की स्थापना करना भी शामिल है। दिव्‍यांग बच्चों को बुनियादी चरण से लेकर उच्च शिक्षा तक की नियमित स्कूली शिक्षा प्रक्रिया में पूरी तरह से भाग लेने में सक्षम बनाया जाएगा जिसमें शिक्षाविशारद का पूरा सहयोग मिलेगा और इसके साथ ही दिव्‍यांगता संबंधी समस्‍त प्रशिक्षणसंसाधन केंद्रआवाससहायक उपकरणप्रौद्योगिकी-आधारित उपयुक्त उपकरण और उनकी आवश्यकताओं के अनुरूप अन्य सहायक व्‍यवस्‍थाएं भी उपलब्‍ध कराई जाएंगी। प्रत्येक राज्य/जिले को कला-संबंधीकैरियर-संबंधी और खेलकूद-संबंधी गतिविधियों में विद्यार्थियों के भाग लेने के लिए दिन के समय वाले एक विशेष बोर्डिंग स्कूल के रूप में बाल भवन स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। स्कूल की नि:शुल्‍क बुनियादी ढांचागत सुविधाओं का उपयोग सामाजिक चेतना केंद्रों के रूप में किया जा सकता है। 👉Equitable and Inclusive Education - Part 1 👉Equitable and Inclusive Education - Part 2

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