-->
स्कूली शिक्षा के लिए मानक निर्धारण और प्रमाणन

स्कूली शिक्षा के लिए मानक निर्धारण और प्रमाणन

8. स्कूली शिक्षा नियामक प्रणाली का लक्ष्य शैक्षिक परिणामों में लगातार सुधार करना होगा; यह स्कूलों, नवाचारों को सीमित दायरे में नहीं रखेगा, या शिक्षकों, प्रधानाचार्यों, और विद्यार्थियों के उत्साह और हिम्मत में बाधा नहीं पहुंचाएगा। कुल मिलाकर, विनियमन को स्कूलों और शिक्षकों को विश्वास के साथ सशक्त बनाने का लक्ष्य रखना होगा, जिससे वे उत्कृष्टता के लिए प्रयास कर सकें और अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर सकें और सभी वित्त, प्रक्रियाओं, और शैक्षिक परिणामों को पूरी पारदर्शिता के साथ सार्वजनिक किये जाने के माध्यम से प्रणाली की अखंडता सुनिश्चित करेंगे।

8.2 वर्तमान में स्कूली शिक्षण प्रणाली में, सार्वजनिक शिक्षा के प्रावधान, समस्त शैक्षणिक संस्थानों के नियमन, और नीतियों के निर्माण से संबंधित कार्यों को एकल निकाय अर्थात्‌ स्कूल शिक्षा विभाग या इसके अंगों द्वारा संपन्न किया जाता है, जिसका परिणाम शक्ति के सशक्त केन्द्रीकरण और हितों के टकराव के रूप में सामने आता है। इसका एक और परिणाम स्कूल प्रणाली के अप्रभावी प्रबंधन के रूप में भी सामने आता है क्योकि शिक्षा प्रावधानों से संबंधित प्रयास, स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा आवश्यक रूप से निभाई जाने वाली विनियमन और इस जैसी अन्य भूमिकाओं के कारण अक्सर अपनी दिशा भटक जाते हैं।

8.3 वर्तमान नियामक व्यवस्था जहाँ एक तरफ लाभ के लिए खोले गए अधिकतर फॉर-प्रोफिट निजी स्कूलों द्वारा बड़े पैमाने पर हो रहे शिक्षा के व्यावसायीकरण और अभिभावकों के आर्थिक शोषण पर नियंत्रण नहीं कर सका है, वहीं, दूसरी तरफ़ ये अक्सर ही अनजाने में सार्वजनिक हितों के लिए समर्पित निजी/परोपकारी स्कूलों को हतोस्ताहित करता है। सार्वजनिक और निजी स्कूलों के लिए आवश्यक नियामक दृष्टिकोण के बीच बहुत अधिक विषमता रही है, जबकि दोनों प्रकार के स्कूलों का लक्ष्य एक ही होना चाहिए: गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना।

8.4 सार्वजनिक शिक्षा प्रणाली एक जीवंत लोकतान्लिक समाज का आधार है, और देश के लिए उच्चतम स्तर के शैक्षणिक परिणामों को हासिल करने के लिए इसके संचालन के तरीके को परिवर्तित और सुदृढ़ करना अत्यंत आवश्यक है। इसके साथ ही निजी/ परोपकारी स्कूलों को भी एक महत्वपूर्ण और फायदेमंद भूमिका निभाने के लिए प्रोत्साहित और सक्षम किया जाना चाहिए।

8.5 स्कूल शिक्षा प्रणाली से संबंधित ज़िम्मेदारियाँ, और इसके विनियमन से संबंधित दृष्टिकोण के बारे में इस नीति के प्रमुख सिद्धांत और ख़ास सिफ़ारिशें इस प्रकार हैं :
  • स्कूल शिक्षा विभाग, जो स्कूल शिक्षा में सर्वोच्च राज्य-स्तरीय निकाय है, सार्वजनिक शिक्षा प्रणाली के निरंतर सुधार के लिए समग्र निगरानी और नीति निर्धारण के लिए जिम्मेदार होगा; यह सार्वजनिक स्कूलों के सुधार पर ध्यान केंद्रित करने और हितों के टकराव को कम करने के लिए स्कूलों के प्रावधान और संचालन के साथ या स्कूलों के विनियमन में शामिल नहीं होगा।
  • संपूर्ण राज्य के सार्वजनिक विद्यालयी प्रणाली के सेवा प्रावधान और शैक्षिक संचालन की ज़िम्मेदारी स्कूल शिक्षा निदेशालय की होगी (जिसमें डीईओ, बीईओ आदि भी शामिल हैं)। यह शैक्षिक संचालन और प्रावधान से संबंधित नीतियों को लागू करने का काम स्वतंत्र रूप से करेगा।
  • प्री-स्कूल शिक्षा - निजी, सार्वजनिक और परोपकारी - सहित आवश्यक गुणवत्ता मानकों के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए शिक्षा के सभी चरणों के लिए एक प्रभावी गुणवत्ता विनियमन या मान्यता प्रणाली स्थापित की जाएगी। यह सुनिश्चित करने के लिए कि सभी स्कूल कुछ न्यूनतम व्यावसायिक और गुणवत्तापूर्ण मानकों का पालन करते हैं, राज्य/केंद्र शासित प्रदेश राज्य विद्यालय मानक प्राधिकरण (एसएसएसए) नामक एक स्वतंत्र, राज्य-व्यापी निकाय की स्थापना करेंगे। 
  • एसएसएसए कुछ बुनियादी मानकों (जैसे बचाव, सुरक्षा, आधारभूत ढांचा, कक्षाओं और विषयों के आधार पर शिक्षकों की संख्या, वित्तीय इमानदारी, और शासन की उपयुक्त प्रक्रिया) पर न्यूनतम मानकों की स्थापना करेगा, जिसका पालन सभी स्कूलों द्वारा करना होगा। एससीईआरटी द्वारा विभिन्न हितधारकों, विशेष रूप से शिक्षकों और स्कूलों से परामर्श के द्वारा प्रत्येक राज्य के लिए इन मापदंडों की रूपरेखा तैयार की जाएगी।
  • सार्वजनिक निगरानी और जवाबदेही के लिए एसएसएसए द्वारा निर्धारित सभी बुनियादी विनियामक सूचनाओं का पारदर्शी सार्वजनिक स्व-प्रकटीकरण बड़े पैमाने पर उपयोग किया जाएगा। जिन आयामों पर जानकारी का स्व-प्रकटीकरण किया जाना है, और प्रकटीकरण का प्रारूप एसएसएसए द्वारा स्कूलों के लिए मानक-तय करने की दुनियाँ भर में की जा रही बेहतरीन पहलों के अनुसार तय किया जाएगा। यह जानकारी सभी स्कूलों द्वारा अपडेट की जाएंगी और अपनी और सार्वजनिक वेबसाइटों जिन्हें एसएसएसए द्वारा संचालित किया जाता है पर मुहैया करवानी होगी। 
  • सार्वजनिक डोमेन में उठायी गयी या फिर सार्वजनिक जीवन से जुड़े हितधारकों या अन्य लोगों की किसी भी शिकायत को एसएसएसए द्वारा हल किया जाएगा। एक नियमित अंतराल पर, कुछ चयनित छात्रों से ऑनलाइन फीडबैक मंगाए जाएंगे ताकि नियमित अंतराल पर महत्वपूर्ण सुझाव मिल सके। एसएसएसए के सभी कार्यों में दक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रौद्योगिकी को उपयुक्त रूप से इस्तेमाल किया जाएगा। इससे स्कूलों द्वारा वर्तमान में वहन किए जाने वाले नियामक जनादेशों में भारी कमी आएगी।
  • राज्य में अकादमिक मानकों और पाठ्यक्रम सहित शैक्षणिक मामले, एससीईआरटी (जो एनसीईआरटी के साथ परामर्श और सहयोग के लिए नज़दीक से जुड़ा होगा) के नेतृत्व में होंगे, जो कि एक संस्थान के रूप में सुदृढ़ किया जाएगा। एससीईआरटी सभी हितधारकों के साथ व्यापक परामर्श के माध्यम से एक स्कूल क्वालिटी असेसमेंट एंड एक्रिडिटेशन फ्रेमवर्क (एसक्यूएएएफ) तैयार करेगा। 
  • सीआरसी, बीआरसी और डीआईईटी जैसे संस्थानों को पुनर्जीवित करने के लिए एससीईआरटी एक “परिवर्तन प्रबंधन प्रक्रिया" के तहत काम करेगा, जो कि 3 वर्षों के अन्दर निश्चित रूप से इनकी क्षमताओं और कार्य-संस्कृति को बदल कर इन्हें उत्कृष्टता के जीवंत संस्थान के रूप में स्थापित करेगा। इस बीच, स्कूल छोड़ने वाले स्तर पर छात्रों की दक्षताओं के प्रमाणन को प्रत्येक राज्य में प्रमाणन / परीक्षा बोर्ड द्वारा नियंत्रित किया जाएगा।
8.6 स्कूलों, संस्थानों, शिक्षकों, अधिकारियों, समुदायों और अन्य हितधारकों को सशक्त बनाने और इन्हें संसाधनों से परिपूर्ण बनाने का काम करने वाली संस्कृति, संरचनाएं, और व्यवस्थाएं इन सबकी जवाबदेही को भी सुनिश्चित करेंगी। प्रत्येक हितधारक और शिक्षा प्रणाली में भागीदार लोग उच्चतमस्तर की ईमानदारी, पूर्ण प्रतिबद्धता और अनुकरणीय कार्य नीति के साथ अपनी भूमिका निभाने के लिए जवाबदेह होंगे। व्यवस्था की प्रत्येक भूमिका से क्‍या अपेक्षाएं हैं यह स्पष्ट रूप से व्यक्त किया जाएगा और इन अपेक्षाओं के बरक्स हितधारकों के काम का मूल्यांकन गहन तरीके से होगा। जवाबदेही सुनिश्चित करते हुए मूल्यांकन प्रणाली खुद को एक उद्देश्यपूर्ण और विकासोन्मुख प्रक्रिया के रूप में विकसित करेगी। इसमें प्रतिक्रिया और मूल्यांकन के कई स्रोत होंगे, प्रदर्शन के बारे में पूरी जानकारी सुनिश्चित करने के लिए (और उदाहरण के लिए छात्रों के अंकों के साथ, केवल सरलीकृत रूप से नहीं जोड़ा जाएगा)। मूल्यांकन से यह पता चलेगा कि छात्रों की शैक्षिक प्राप्ति जैसे परिणामों में कई हस्तक्षेप करने वाले चर और बाहरी प्रभाव होते हैं। यह भी मान्यता देगा कि शिक्षा के लिए विशेषकर स्कूल के स्तर पर टीमवर्क की आवश्यकता होती है । सभी व्यक्तियों की पदोन्नति, मान्यता और जवाबदेही ऐसे प्रदर्शन मूल्यांकन पर आधारित होगी। सभी अधिकारी यह सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार होंगे कि यह 'विकास, प्रदर्शन और जवाबदेही प्रणाली'
उच्चतर अखंडता के साथ, और व्यवस्थित रूप से, उनके नियंत्रण में रहते हुए समुचित रूप से अपना काम करती रहे।

8.7 सार्वजनिक और निजी स्कूल (केंद्र सरकार द्वारा प्रबंधित / सहायता प्राप्त / नियंत्रित किए जाने वाले स्कूलों को छोड़कर) का मूल्यांकन और प्रमाणन समान मापदंड, बेंचमार्कों और प्रक्रियाओं के आधार पर किया जाएगा, जो ऑनलाइन और ऑफलाइन सार्वजनिक प्रकटीकरण और पारदर्शिता पर जोर देते हैं, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सार्वजनिक हित वाले निजी स्कूलों को प्रोत्साहित किया जाए और किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए निजी परोपकारी प्रयासों को प्रोत्साहित किया जाएगा - जिससे कि शिक्षा जो सार्वजनिक सेवा है सभी को मुहैया हो सके एवं माता-पिता और समुदायों को ट्यूशन फीस में मनमानी वृद्धि से सुरक्षित करने के प्रयास भी किये जायेंगे। स्कूल की वेबसाइट और एसएसएसए वेबसाइट पर - सार्वजनिक और निजी दोनों स्कूलों की सूचनाओं को सार्वजनिक किया जाएगा - जिसमें (कम से कम) कक्षाओं, छात्रों, और शिक्षकों की संख्या की जानकारी, पढ़ाए जाने वाले विषय, कोई शुल्क, और एनएएस और एसएएस जैसे मानकीकृत मूल्यांकन के आधार पर विद्यार्थियों के समग्र परिणाम शामिल किये जाएँगे। केंद्र सरकार द्वारा नियंत्रित / प्रबंधित / सहायता प्राप्त स्कूलों के लिए, सीबीएसई एमएचआरडी के परामर्श से एक फ्रेमवर्क तैयार करेगा। सभी शैक्षणिक संस्थानों को 'नॉट फॉर प्रोफिट' एंटिटी के रूप में लेखापरीक्षा और समान प्रकटीकरण मानकों के अनुसार माना जाएगा। अधिशेष, यदि कोई हो, तो शैक्षिक क्षेत्र में उसका पुनर्निविश किया जाएगा।

8.8 स्कूल विनियमन, प्रमाणन और गवर्नेंस के लिए तय मानक / विनियामक ढाँचे और सुगम प्रणाली की समीक्षा की जाएगी ताकि पिछले दशक में प्राप्त की गई सीख और अनुभवों के आधार पर सुधार किया जा सके। इस समीक्षा का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होगा कि सभी छात्र, विशेष रूप से सुविधाओं से वंचित तबकों के छात्रों को उच्चतर- गुणवत्ता और समतापूर्ण स्कूली शिक्षा आरंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा (3 वर्ष की आयु) से लेकर उच्चतर माध्यमिक शिक्षा (अर्थात, ग्रेड 12 तक) निशुल्क और अनिवार्य हो। इनपुट्स पर जोर देना, और उनके विनिर्देशों की यांत्रिकी प्रकृति - भौतिक और अवसंरचनात्मक, को बदल दिया जाएगा और आवश्यकताओं को जमीन पर वास्तविकताओं के लिए अधिक संवेदनशील बनाया गया है, उदाहरण के लिए, भूमि क्षेत्रों और कमरे के आकार, शहरी क्षेत्रों में खेल के मैदानों की व्यावहारिकता आदि के बारे में। जनादेश को समायोजित और शिथिल किया जाएगा, जिससे संरक्षा, सुरक्षा और एक सुखद और उत्पादक अधिगम स्थल सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक स्कूल को स्थानीय आवश्यकताओं और बाधाओं के आधार पर अपने निर्णय लेने के लिए उपयुक्त लचीलापन मिलेगा। शैक्षिक परिणाम और सभी वित्तीय, शैक्षणिक और परिचालन मामलों के पारदर्शी प्रकटीकरण को उचित महत्व
दिया जाएगा और स्कूलों के मूल्यांकन में उपयुक्त रूप से शामिल किया जाएगा। इससे सभी बच्चों के लिए नि: शुल्क, न्यायसंगत और गुणवत्तापूर्ण प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा सुनिश्चित करने के सतत विकास लक्ष्य 4 (एसडीजी) को प्राप्त करने की दिशा में भारत की प्रगति में और सुधार होगा।

8.9 पब्लिक-स्कूल शिक्षा प्रणाली का उद्देश्य उच्चतम गुणवत्ता वाली शिक्षा प्रदान करना होगा ताकि यह अपने बच्चों को शिक्षित करने के लिए जीवन के सभी क्षेत्रों से माता-पिता के लिए सबसे आकर्षक विकल्प बन जाए।

8.10 समय-समय पर समग्र प्रणाली की आवधिक जांच-पड़ताल के लिए, छात्रों के सीखने के स्तरों का एक नमूना-आधारित नेशनल अचीवमेंट सर्वे (एनएएस) प्रस्तावित नए राष्ट्रीय मूल्यांकन केंद्र, परख द्वारा अन्य सरकारी निकायों जैसे कि एनसीईआरटी के साथ उपयुक्त सहयोग के साथ किया जाएगा जो अनेकों कार्यों जैसे डेटा विश्लेषण के साथ-साथ मूल्यांकन प्रक्रियाओं में भी सहायता कर सकता है। मूल्यांकन में सरकारी के साथ-साथ निजी स्कूलों के छात्रों को भी शामिल किया जाएगा। राज्यों को अपने स्वयं के जनगणना-आधारित 'राज्य मूल्यांकन सर्वेक्षण' (एसएएस) का संचालन करने के लिए भी प्रोत्साहित किया जाएगा, जिसके परिणामों का उपयोग केवल विकास के उद्देश्यों के लिए किया जाएगा, स्कूल शिक्षा प्रणाली के निरंतर सुधार के लिए उनके समग्र और विद्यार्थियों की पहचान उजागर किये बिना उनके परिणामों को स्कूलों द्वारा सार्वजनिक किया जाएगा। प्रस्तावित नए मूल्यांकन केंद्र, परख की स्थापना तक एनसीईआरटी एनएएस को जारी रख सकता है।

8.11 अंत में, स्कूलों में नामांकित बच्चों और किशोरों को इस पूरी प्रक्रिया में नहीं भूलना चाहिए; आखिरकार, स्कूल प्रणाली उनके लिए डिज़ाइन की गई है। उनकी सुरक्षा और अधिकारों पर ध्यान देना - विशेष रूप से बालिकाओं - और किशोरों द्वारा सामना किए जाने वाले विभिन्न गंभीर मुद्दों, जैसे कि मादक द्रव्यों के सेवन और कई प्रकार के भेदभाव और उत्पीड़न की रिपोर्टिंग, बच्चों / किशोरों के अधिकारों या सुरक्षा के खिलाफ किसी भी तरह के उल्लंघन पर प्रक्रिया के लिए स्पष्ट, सुरक्षित और कुशल तंत्र के साथ प्रणाली द्वारा सर्वोच्च महत्व प्रदान किया जाना चाहिए। ऐसे तंत्रों का विकास जो सभी छात्रों के लिए प्रभावी, सामयिक और सर्वविदित हों, उच्चतर प्राथमिकता वाले होंगे।

Related Posts

0 Response to "स्कूली शिक्षा के लिए मानक निर्धारण और प्रमाणन"

Post a Comment

Please leave your valuable comments here.

Iklan Bawah Artikel