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शिक्षक : शिक्षक शिक्षा का दृष्टिकोण

शिक्षक शिक्षा का दृष्टिकोण

5.22 यह मानते हुए कि शिक्षकों को उच्चतर-गुणवत्ता की सामग्री के साथ-साथ शिक्षणशास्त्र में प्रशिक्षण की आवश्यकता होगी, शिक्षक-शिक्षा को धीरे-धीरे वर्ष 2030 तक बहु-विषयक कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में शामिल किया जाएगा। जैसे-जैसे सभी कॉलेज और विश्वविद्यालय बहु-विषयक बनने की दिशा में बढ़ेगे और उनका लक्ष्य ऐसे उत्कृष्ट शिक्षा विभाग स्थापित करना होगा जो शिक्षा में बीएड, एमएड और पीएचडी की डिग्री प्रदान करेंगे।

5.23 वर्ष 2030 तक, शिक्षण के लिए न्यूनतम योग्यता 4 वर्षीय एकीकृत बी.एड. डिग्री होगी जिसमें विस्तृत ज्ञान सामग्री और अध्यापन सामग्री से शिक्षण कराया जाएगा इसमें स्थानीय स्कूलों में छात्र-शिक्षण के रूप में व्यावहारिक अभ्यास प्रशिक्षण भी शामिल होगा। 4 वर्षीय एकीकृत बी.एड. डिग्री प्रदान करने वाले इन्ही बहु-विषयक संस्थानों के द्वारा ही 2 वर्षीय बी.एड. कार्यक्रम भी प्रदान किए जाएंगे और यह केवल उनके लिए ही आवश्यक होगा जो पहले से ही अन्य विशिष्ट विषयों में स्नातक की डिग्री प्राप्त कर चुके हैं।
इन बी.एड. कार्यक्रमों को एक वर्षीय बी. एड. कार्यक्रमों के रूप में भी समुचित रूप से विकसित किया जा सकता है जो केवल उन व्यक्तियों को प्रदान किया जाएगा जिन्होंने चार वर्षीय बहु-विषयक स्नातक डिग्री या किसी विशिष्टता में परा-स्नातक डिग्री प्राप्त की हो और उस विशिष्ट विषय में विषय शिक्षक बनना चाहते हो। इस प्रकार की सभी बी.एड. डिग्रियाँ केवल चार वर्षीय एकीकृत बी.एड. उपलब्ध कराने वाले मान्यता प्राप्त बहु-विषयक उच्चतर शिक्षा संस्थानों द्वारा ही प्रदान की जा सकती हैं । चार वर्षीय एकीकृत बी.एड. कार्यक्रम प्रदान करने वाले वे बहु-विषयक उच्चतर शिक्षा संस्थान, जिनके पास मुक्त दूरस्थ शिक्षण (ओडीएल) की मान्यता भी है, दूर-दराज और दुर्गम भौगौलिक स्थानों के विद्यार्थियों और अपनी अर्हता को बढ़ाने की इच्छा रखने वाले सेवारत शिक्षकों के लिए मिश्रित या ओडीएल मोड से भी उच्चतर गुणवत्ता वाले बी. एड. कार्यक्रम प्रदान कर सकते हैं जिसके लिए वे कार्यक्रम के व्यावहारिक प्रशिक्षण और छात्र-शिक्षण घटक तथा मेंटरिंग हेतु उपयुक्त और ठोस व्यवस्था करेंगे |

5.24 सभी बी.एड. कार्यक्रमों में शिक्षण-शास्त्र की जाँची-परखी तकनीकों के साथ साथ हाल ही में सबसे नवीनतम तकनीकों में प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिसमें बुनियादी साक्षरता और संख्या-ज्ञान के संबंध में शिक्षण-शास्त्र, बहुस्तरीय शिक्षण और मूल्यांकन, दिव्यांग बच्चों को पढ़ाना, विशेष रूचि या प्रतिभा वाले बच्चों को पढ़ाना, शैक्षिक प्रौद्योगिकी का प्रयोग और शिक्षार्थी केंद्रित एवं सहयोगात्मक शिक्षण शामिल है। सभी बी.एड. कार्यक्रमों में स्थानीय स्कूलों में जाकर कक्षा में शिक्षण कराने को व्यावहारिक प्रशिक्षण के रूप में शामिल किया जाएगा। सभी बी.एड. कार्यक्रम किसी भी विषय को पढ़ाने या किसी भी गतिविधि को करने के दौरान भारतीय संविधान के मौलिक कर्तव्यों (अनुच्छेद 51 A) और अन्य संवेधानिक प्रावधानों का पालन करने पर बल दिया जाएगा। इसमें पर्यावरण के प्रति जागरूकता और उसके संरक्षण तथा सतत विकास के प्रति संवेदनशीलता को भी उचित रूप से एकीकृत किया जाएगा, ताकि पर्यावरण शिक्षा स्कूल पाठ्यचर्या का एक अभिन्न अंग बन सके।

5.25 कुछ विशेष अल्प-अवधि के स्थानीय शिक्षक-शिक्षा कार्यक्रम बीआईटीई,डीआईईटी या स्वयं स्कूल परिसरों में भी उपलब्ध होंगे, जिससे कि स्थानीय व्यवसाय, ज्ञान और कौशलों जैसे; स्थानीय कला, संगीत, कृषि, व्यवसाय, खेल, बढ़ईगीरी और अन्य व्यावसायिक शिल्प को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रख्यात स्थानीय व्यक्तियों को स्कूलों या स्कूल परिसरों में 'मास्टर प्रशिक्षक' के रूप में पढ़ाने के लिए नियुक्त किया जाएगा।

5.26 बहु-विषयक कालेजों और विश्वविद्यालयों में उन शिक्षकों को बी.एड. के बाद कुछ अल्प-अवधि के सर्टिफिकेट कोर्स भी व्यापक रूप से उपलब्ध करवाएं जायेंगे जो शिक्षण के विशिष्ट क्षेत्रों जैसे कि विशेष जरुरत वाले विद्यार्थियों के शिक्षण, या स्कूली शिक्षा प्रणाली में नेतृत्व और प्रबंधन के पदो पर, या बुनियादी, प्रारम्भिक, उच्चतर प्राथमिक और मध्यमिक स्तरों के बीच एक स्तर से दूसरे स्तर में जाना चाहते हैं |

5.27 यह मान्य है कि विशेष विषयों के शिक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनेक शिक्षा विधियाँ हो सकती हैं; एनसीईआरटी विभिन्न विषयों के शिक्षण की विविध विधियों का अध्ययन, शोध, प्रलेखन और समेकन करेगा और सिफ़ारिशें करेगा कि इनमें से क्या सीखकर भारत में व्यवहार में लायी जा रही विधियों में शामिल किया जा सकता है।

5.28 वर्ष 2021 तक एनसीटीई द्वारा एनसीईआरटी के परामर्श से नई शिक्षा नीति 2020 के सिद्धांतों के आधार पर एक नवीन और व्यापक अध्यापक शिक्षा हेतु राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा, एनसीएफटीई 2021 तैयार की जाएगी । यह रूपरेखा राज्य सरकारों, केंद्र सरकार के संबंधित मंत्रालयों/विभागों और विभिन्न विशेषज्ञ निकायों सहित सभी हितधारकों से चर्चा के बाद तैयार की जाएगी और सभी क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध कराई जाएगी। एनसीएफटीई 2021 में व्यवसायिक शिक्षा के लिए अध्यापक शिक्षा पाठ्यचर्या की अपेक्षाओं को भी ध्यान में रखा जाएगा। तत्पश्चात, संशोधित एनसीएफ में परिवर्तन और अध्यापक शिक्षा की उभरती हुई अपेक्षाओं को दर्शाते हुए एनसीएफटीई में प्रत्येक 5-10 वर्षों में संशोधन किया जाएगा।

5.29 अंततः, अध्यापक शिक्षा प्रणाली की प्रामाणिकता को पूर्णतया बनाए रखने के लिए देश में चलाए जा रहे अवमानक स्टैंड अलोन अध्यापक शिक्षा संस्थानों (टीईआई) के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी जिसमें यदि ज़रूरी हो तो उन्हें बंद किया जाना शामिल है।

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